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कड़ाके की ठंड में बाहर बैठने को मजबूर हैं विद्यार्थी
अमर उजाला ब्यूरो/कैथल
Updated Sun, 19 Jan 2014 10:10 AM IST
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कड़ाके की सर्दी में राजकीय हाईस्कूल गली नंबर चार के विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए स्कूल प्रशासन ने स्कूल कमरों के बाहर बरामदों में तिरपाल का सहारा लिया है, लेकिन इससे ठंड नहीं रुक रही। बच्चों का कहना है कि उन्हें मजबूरन तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है।
स्कूल में विद्यार्थियों के बैठने के लिए करीब 17 कमरे हैं, जबकि विद्यार्थियों की संख्या 1300 से अधिक है। कमरों में कक्षाएं लगाने के लिए 20 और नए कमरों की आवश्यकता है। स्कूल केवल 1600 गज में बना हुआ है।
इसके अलावा एक आंगनबाड़ी केंद्र भी है। स्कूल में हर समय अव्यवस्था का माहौल रहता है। हैरानीजनक है कि स्कूल के अध्यापकों को भी नहीं पता है कि कौन-सा बच्चा किस कक्षा का है।
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...आखिर तिरपाल कितना कारगर होगा
स्कूल प्रधानाचार्य रमेश शर्मा ने बताया कि बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लिया गया है। स्कूल के बरामदों में तिरपाल लगाई गई है।
स्कूल के विद्यार्थी रोहन, मनीष, यमन कुमार, सोनू, अनूप ने बताया कि वे स्कूल के बरामदाें में ही बैठते हैं। स्कूल में कमरों की कमी के कारण बाहर कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्कूल के कमरों में बेंच रखने की जगह न होने के कारण बेंचों को कमरों से बाहर निकाल रखा है।
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कड़ाके की सर्दी से बचने के लिए स्कूल प्रशासन ने स्कूल कमरों के बाहर बरामदों में तिरपाल का सहारा लिया है, लेकिन इससे ठंड नहीं रुक रही। बच्चों का कहना है कि उन्हें मजबूरन तिरपाल के नीचे बैठकर पढ़ना पड़ रहा है।
स्कूल में विद्यार्थियों के बैठने के लिए करीब 17 कमरे हैं, जबकि विद्यार्थियों की संख्या 1300 से अधिक है। कमरों में कक्षाएं लगाने के लिए 20 और नए कमरों की आवश्यकता है। स्कूल केवल 1600 गज में बना हुआ है।
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इसके अलावा एक आंगनबाड़ी केंद्र भी है। स्कूल में हर समय अव्यवस्था का माहौल रहता है। हैरानीजनक है कि स्कूल के अध्यापकों को भी नहीं पता है कि कौन-सा बच्चा किस कक्षा का है।
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स्कूल प्रधानाचार्य रमेश शर्मा ने बताया कि बच्चों को सर्दी से बचाने के लिए तिरपाल का सहारा लिया गया है। स्कूल के बरामदों में तिरपाल लगाई गई है।
स्कूल के विद्यार्थी रोहन, मनीष, यमन कुमार, सोनू, अनूप ने बताया कि वे स्कूल के बरामदाें में ही बैठते हैं। स्कूल में कमरों की कमी के कारण बाहर कक्षाएं लगाई जा रही हैं। स्कूल के कमरों में बेंच रखने की जगह न होने के कारण बेंचों को कमरों से बाहर निकाल रखा है।