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देसी घी से तैयार घेवर बेचकर कमाई गई राशि को गोशाला में दान कर रहे युवा
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हवन के बाद तैयार घेवर को प्रसाद स्वरूप लोगों को बांटते युवा। संवाद
- फोटो : Sonipat
भागदौड़ भरी जिंदगी मेें हर व्यक्ति अपने व परिवार के लिए कमाने में जुटा है। इस भीड़ में विरले ही ऐसे हैं जो खुद से पहले बेजुबानों के बारे में सोच रहे हैं। इन विरलों में गांव पिनाना के कुछ युवा शामिल हैं, जो गोमाता व गोशालाओं के संरक्षण के लिए लगातार प्रयासरत हैं। इन युवाओं ने गोमाता व गोशालाओं के लिए एक अनूठी पहल शुरू की है, जिसके तहत ये गांव में सावन के पूरे महीने देसी घी स घेवर तैयार कर बिक्री करेंगे। इससे होने वाली कमाई को गोशाला व मंदिर में दान करेंगे।
गांव पिनाना के राकेश, प्रदीप, जयकरण व दीपक ने बताया कि गोमाता की हो रही बेकद्री व सड़कों किनारे भटकती गोमाता को देखते हुए ही उन्होंने युवाओं के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है। इस पहल से जहां आमजन को मिलावट रहित शुद्ध देसी घी से बना घेवर मिल सकेगा। वहीं गोशाला व मंदिर के लिए चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि वे तीन साल से इस मुहिम को चला रहे हैं। गांव के अड्डे पर सावन माह के सीजन में घेवर बनाने का काम करते हैं। यह दुकान केवल 40-45 दिनों के लिए ही खोली जाती है। इन दिनों बिना मिलावट व देसी घी से तैयार घेवर बनाकर बेचते हैं। देसी घी से बना घेवर बेचकर जो कमाई होती है, उसे वे गांव की गोशाला व मंदिर में दान कर देते हैं।
गांव में नहीं है घेवर बनाने की दुकान
युवाओं ने बताया कि गांव में या आसपास घेवर बनाने की दुकान नहीं है। लोगों को घेवर के लिए शहर तक दौड़ लगानी पड़ती है। शहर में भी शुद्ध व मिलावट रहित घेवर मिलता है या नहीं, इसकी भी गारंटी नहीं है। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने मिलकर यह पहल शुरू की है। इससे एक पंथ दो काज हो रहे हैं। युवाओं ने बताया कि बीते वर्ष भी उन्होंने घेवर बेचकर जो लाखों रुपये मुनाफा कमाया था। जिससे गोशाला व मंदिर में दान कर दिया था।
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प्रसाद स्वरूप निशुल्क वितरित किया घेवर
युवाओं ने बताया कि सावन माह की शुरुआत के साथ ही उन्होंने भी शुक्रवार को हवन के साथ देसी घी से घेवर बनाने का काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को हवन के बाद तैयार देसी घी के घेवर को प्रसाद स्वरूप राहगीरों को निशुल्क वितरित किया। अब तैयार घेवर को महीने भर बिक्री करेंगे। इससे होने वाले कमाई को अंत में गोशाला व मंदिर में दान कर देंगे। हमारा प्रयास है कि किसी प्रकार गो माताओं की हो रही बेकद्री को रोक सकें और उन्हें भूखा मरने से बचा सकें।
युवाओं का मिलने लगा है सहयोग
पिनाना निवासी राकेश व प्रदीप ने बताया कि हरियाणा के मशहूर घेवर को देसी घी में बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आसपास के गांवों के साथ ही अन्य जिलों में भी यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। जिससे लोग यहां घेवर खरीदने पहुंच रहे हैं। ताकि युवाओं की अच्छी बचत हो सके और यह बचत गोशाला व धार्मिक कार्यों में लगाई जा सके। यही नहीं हमारी इस मुहिम में अब अन्य युवा भी आकर सहयोग करने लगे हैं।
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गांव पिनाना के राकेश, प्रदीप, जयकरण व दीपक ने बताया कि गोमाता की हो रही बेकद्री व सड़कों किनारे भटकती गोमाता को देखते हुए ही उन्होंने युवाओं के साथ मिलकर यह पहल शुरू की है। इस पहल से जहां आमजन को मिलावट रहित शुद्ध देसी घी से बना घेवर मिल सकेगा। वहीं गोशाला व मंदिर के लिए चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने बताया कि वे तीन साल से इस मुहिम को चला रहे हैं। गांव के अड्डे पर सावन माह के सीजन में घेवर बनाने का काम करते हैं। यह दुकान केवल 40-45 दिनों के लिए ही खोली जाती है। इन दिनों बिना मिलावट व देसी घी से तैयार घेवर बनाकर बेचते हैं। देसी घी से बना घेवर बेचकर जो कमाई होती है, उसे वे गांव की गोशाला व मंदिर में दान कर देते हैं।
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गांव में नहीं है घेवर बनाने की दुकान
युवाओं ने बताया कि गांव में या आसपास घेवर बनाने की दुकान नहीं है। लोगों को घेवर के लिए शहर तक दौड़ लगानी पड़ती है। शहर में भी शुद्ध व मिलावट रहित घेवर मिलता है या नहीं, इसकी भी गारंटी नहीं है। इस समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने मिलकर यह पहल शुरू की है। इससे एक पंथ दो काज हो रहे हैं। युवाओं ने बताया कि बीते वर्ष भी उन्होंने घेवर बेचकर जो लाखों रुपये मुनाफा कमाया था। जिससे गोशाला व मंदिर में दान कर दिया था।
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प्रसाद स्वरूप निशुल्क वितरित किया घेवर
युवाओं ने बताया कि सावन माह की शुरुआत के साथ ही उन्होंने भी शुक्रवार को हवन के साथ देसी घी से घेवर बनाने का काम शुरू कर दिया है। शुक्रवार को हवन के बाद तैयार देसी घी के घेवर को प्रसाद स्वरूप राहगीरों को निशुल्क वितरित किया। अब तैयार घेवर को महीने भर बिक्री करेंगे। इससे होने वाले कमाई को अंत में गोशाला व मंदिर में दान कर देंगे। हमारा प्रयास है कि किसी प्रकार गो माताओं की हो रही बेकद्री को रोक सकें और उन्हें भूखा मरने से बचा सकें।
युवाओं का मिलने लगा है सहयोग
पिनाना निवासी राकेश व प्रदीप ने बताया कि हरियाणा के मशहूर घेवर को देसी घी में बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि आसपास के गांवों के साथ ही अन्य जिलों में भी यह पहल चर्चा का विषय बनी हुई है। जिससे लोग यहां घेवर खरीदने पहुंच रहे हैं। ताकि युवाओं की अच्छी बचत हो सके और यह बचत गोशाला व धार्मिक कार्यों में लगाई जा सके। यही नहीं हमारी इस मुहिम में अब अन्य युवा भी आकर सहयोग करने लगे हैं।