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विश्व एड्स दिवस : साइकिलिंग खिलाड़ी स्वीटी मलिक ने 100 किमी यात्रा कर दिया जागरूकता का संदेश
Mon, 02 Dec 2024 01:40 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 02 Dec 2024 01:40 AM IST
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सोनीपत। विश्व एड्स दिवस पर साइकिलिंग खिलाड़ी स्वीटी मलिक एड्स व नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश लेकर रोहतक से सोनीपत पहुंची। वह साइकिल चलाकर सोनीपत आई और लोगों को एड्स के प्रति व नशे के खिलाफ जागरूक रहने का संदेश दिया। स्वीटी मलिक ने बताया कि उन्होंने पौने 2 घंटे में रोहतक से सोनीपत का सफर तय किया है। इसके बाद वह साइकिल से ही सोनीपत से रोहतक के लिए वापस रवाना हुई।
रोहतक निवासी व गोहाना के भैंसवान खुर्द की बहू साइकिलिंग खिलाड़ी स्वीटी मलिक ने कहा कि अगर हौसला मजबूत हो तो दुनिया में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। वह 44 वर्ष की आयु में एक जिद के साथ सात वर्ष से साइकिल यात्रा से लोगों को समाज में फैली बुराइयों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके पति रविंद्र मलिक ने भी हमेशा उनके सपनों को उड़ान में पूरा सहयोग किया है। वह आधुनिक युग में भी रोजमर्रा के सभी कार्य साइकिल पर करती हैं। रोहतक से निकलते ही उन्होंने बीच रास्ते में पड़ने वाले सभी गांवों में ग्रामीणों व खासकर युवाओं को एड्स जैसी बीमारी से बचने के लिए जागरूक किया।
पड़ोसी की साइकिल मांग पहली बार जीता था स्वर्ण पदक
स्वीटी मलिक ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में पहली बार पड़ोसी से साइकिल मांगकर दौड़ में भाग लिया था। उसके बाद पलट कर नहीं देखा। पहली बार पड़ोसी से साइकिल लेकर उन्होंने रोहतक प्रशासन की ओर से आयोजित 10 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया था। तब उनके 14 वर्षीय बेटे ने भी दौड़ में भाग लिया था। उस साइकिल दौड़ में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, लेकिन उनके बेटे को पदक गंवाना पड़ा था। इसके बाद उनके बेटे को भी उन पर गर्व महसूस होने लगा।
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50 हजार किमी साइकिल यात्रा से सामाजिक कुरीतियों पर कर चुकी वार
स्वीटी मलिक बताया कि वह गृहिणी होने के साथ शिक्षक व खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2017 से अब तक वह देश के अलग-अलग हिस्सों में साइकिल यात्रा कर चुकी हैं। करीब 50 हजार किलोमीटर साइकिल यात्रा के साथ जागरूकता अभियान भी चला चुकी हैं। अभियान के तहत वह एड्स, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नशा हटाओ, नशे को ना कहो व दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें कई मुख्यमंत्री व मंत्रियों से लेकर प्रदेश स्तर व जिला प्रशासन की ओर से सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें श्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के अवाॅर्ड से नवाजा था।
3778 किमी की दौड़ में पा चुकी दूसरा स्थान
स्वीटी मलिक बताया कि कुछ समय पहले सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता अभियान के दौरान कश्मीर से कन्याकुमारी तक 3778 किलोमीटर की रिले साइकिल दौड़ में वह द्वितीय स्थान हासिल कर चुकी हैं। इस साइकिल दौड़ में पोलैंड व केन्या के खिलाड़ियों सहित 22 टीमों ने भाग लिया था। उनका उद्देश्य युवाओं को एड्स व नशे के खिलाफ जागरूक करना है।
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रोहतक निवासी व गोहाना के भैंसवान खुर्द की बहू साइकिलिंग खिलाड़ी स्वीटी मलिक ने कहा कि अगर हौसला मजबूत हो तो दुनिया में कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। वह 44 वर्ष की आयु में एक जिद के साथ सात वर्ष से साइकिल यात्रा से लोगों को समाज में फैली बुराइयों के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनके पति रविंद्र मलिक ने भी हमेशा उनके सपनों को उड़ान में पूरा सहयोग किया है। वह आधुनिक युग में भी रोजमर्रा के सभी कार्य साइकिल पर करती हैं। रोहतक से निकलते ही उन्होंने बीच रास्ते में पड़ने वाले सभी गांवों में ग्रामीणों व खासकर युवाओं को एड्स जैसी बीमारी से बचने के लिए जागरूक किया।
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पड़ोसी की साइकिल मांग पहली बार जीता था स्वर्ण पदक
स्वीटी मलिक ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017 में पहली बार पड़ोसी से साइकिल मांगकर दौड़ में भाग लिया था। उसके बाद पलट कर नहीं देखा। पहली बार पड़ोसी से साइकिल लेकर उन्होंने रोहतक प्रशासन की ओर से आयोजित 10 किलोमीटर दौड़ में हिस्सा लिया था। तब उनके 14 वर्षीय बेटे ने भी दौड़ में भाग लिया था। उस साइकिल दौड़ में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता, लेकिन उनके बेटे को पदक गंवाना पड़ा था। इसके बाद उनके बेटे को भी उन पर गर्व महसूस होने लगा।
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50 हजार किमी साइकिल यात्रा से सामाजिक कुरीतियों पर कर चुकी वार
स्वीटी मलिक बताया कि वह गृहिणी होने के साथ शिक्षक व खिलाड़ी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। वर्ष 2017 से अब तक वह देश के अलग-अलग हिस्सों में साइकिल यात्रा कर चुकी हैं। करीब 50 हजार किलोमीटर साइकिल यात्रा के साथ जागरूकता अभियान भी चला चुकी हैं। अभियान के तहत वह एड्स, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नशा हटाओ, नशे को ना कहो व दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना चाहती हैं। इसके लिए उन्हें कई मुख्यमंत्री व मंत्रियों से लेकर प्रदेश स्तर व जिला प्रशासन की ओर से सम्मान मिल चुका है। वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भी अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्हें श्रेष्ठ महिला खिलाड़ी के अवाॅर्ड से नवाजा था।
3778 किमी की दौड़ में पा चुकी दूसरा स्थान
स्वीटी मलिक बताया कि कुछ समय पहले सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूकता अभियान के दौरान कश्मीर से कन्याकुमारी तक 3778 किलोमीटर की रिले साइकिल दौड़ में वह द्वितीय स्थान हासिल कर चुकी हैं। इस साइकिल दौड़ में पोलैंड व केन्या के खिलाड़ियों सहित 22 टीमों ने भाग लिया था। उनका उद्देश्य युवाओं को एड्स व नशे के खिलाफ जागरूक करना है।