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बॉन्ड की नीति के विरोध में महिला मेडिकल कॉलेज की छात्राओं ने शुरू की हड़ताल
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भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज में हड़ताल पर बैठकर रोष जताती छात्राएं। संवाद
- फोटो : Sonipat
भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की छात्राओं ने बांड नीति के खिलाफ हड़ताल शुरू कर दी है। बांड नीति के तहत एमबीबीएस के कोर्स की फीस बढ़ाने के खिलाफ विभिन्न कॉलेजों में चल रही हड़ताल का महिला मेडिकल कॉलेज की छात्राओं ने समर्थन किया है। इस दौरान छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए हस्ताक्षर अभियान भी चलाया है।
छात्राओं का कहना है कि बांड नीति के तहत एमबीबीएस के कोर्स की फीस बढ़ा दी गई है। अब एमबीबीएस करने वाले छात्रों को हर साल 9 लाख 20 हजार रुपये जमा करवाने होंगे। इसके साथ 80 हजार रुपये फीस भी जमा करानी होगी। ऐसे में हर साल छात्रों को 10 लाख रुपये कॉलेज में जमा कराने होंगे। 4 साल के कोर्स में एमबीबीएस के छात्रों को 40 लाख रुपये की फीस जमा करानी होगी। जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं, वह एमबीबीएस का कोर्स नहीं कर पाएंगे। जिससे बांड नीति के खिलाफ एमबीबीएस की छात्राओं में रोष है। छात्राओं ने सरकार से मांग की है कि बांड नीति को वापस लिया जाए, ताकि छात्र एमबीबीएस का कोर्स आसानी से कर सके।
उधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने भी प्रदेश में एमबीबीएस-यूजी पाठ्यक्रम में बांड नीति के खिलाफ आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का समर्थन किया है। प्रधान डॉ. पुनिता हसीजा व सचिव डॉ. दिव्या सक्सेना ने बताया कि वह विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। हरियाणा सरकार के इस कृत्य की निंदा की जाती है।
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छात्राओं का कहना है कि बांड नीति के तहत एमबीबीएस के कोर्स की फीस बढ़ा दी गई है। अब एमबीबीएस करने वाले छात्रों को हर साल 9 लाख 20 हजार रुपये जमा करवाने होंगे। इसके साथ 80 हजार रुपये फीस भी जमा करानी होगी। ऐसे में हर साल छात्रों को 10 लाख रुपये कॉलेज में जमा कराने होंगे। 4 साल के कोर्स में एमबीबीएस के छात्रों को 40 लाख रुपये की फीस जमा करानी होगी। जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं, वह एमबीबीएस का कोर्स नहीं कर पाएंगे। जिससे बांड नीति के खिलाफ एमबीबीएस की छात्राओं में रोष है। छात्राओं ने सरकार से मांग की है कि बांड नीति को वापस लिया जाए, ताकि छात्र एमबीबीएस का कोर्स आसानी से कर सके।
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उधर, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा ने भी प्रदेश में एमबीबीएस-यूजी पाठ्यक्रम में बांड नीति के खिलाफ आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों का समर्थन किया है। प्रधान डॉ. पुनिता हसीजा व सचिव डॉ. दिव्या सक्सेना ने बताया कि वह विद्यार्थियों के साथ खड़े हैं। हरियाणा सरकार के इस कृत्य की निंदा की जाती है।
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