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Sonipat News: एक्यूआई 374 पर पहुंचा तो लागू हुआ ग्रैप-3, निर्माण और खनन कार्य बंद

Fri, 03 Nov 2023 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Fri, 03 Nov 2023 12:20 AM IST
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When AQI reached 374, Grap-3 came into effect, construction and mining work stopped.
नेशनल हाईवे-44 के पास राई क्षेत्र में छाया स्मॉग। संवाद
सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल सोनीपत में प्रदूषण बेहद खराब स्थिति में बना हुआ है। सुबह-रात स्मॉग छाने से लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। धूल व धुएं के कणों के कारण सांस लेने में दिक्कत आ रही है। साथ ही गले में खराश महसूस होने लगी है। वीरवार सुबह कई इलाकों में स्मॉग के कारण हवा दमघोंटू बनी रही। सोनीपत में एक्यूआई 374 दर्ज किया गया। इसके साथ ही सोनीपत में ग्रैप-3 लागू कर दिया गया है। जिसके साथ ही अब निर्माण कार्य, खनन व स्टोन क्रशर चलाने पर रोक लग गई है।
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सर्दी बढ़ने के साथ ही वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है। सुबह-शाम स्मॉग छा रहा है। रात को इससे ज्यादा दिक्कत हो रही है। दिन में हवा चलने से मौसम थोड़ा साफ हो जाता है, लेकिन यह समस्या कम नहीं हो रही है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ रहा है। यह बेहद खराब स्तर पर जा चुका है। सर्दी बढ़ने के साथ प्रदूषण स्तर में और इजाफा होने का अनुमान है। जिले में वीरवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 374 दर्ज किया गया। रात को नौ बजे के बाद यह 403 तक पहुंच गया था। वहीं पीएम-10 का स्तर 479 व पीएम 2.5 का स्तर 430 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
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बुजुर्गों को घर रहने की सलाह

बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। स्मॉग के साथ अनेक प्रकार के प्रदूषित तत्व मिले होते हैं। यह शरीर में जाकर सांस से संबंधित रोग के कारण बनते हैं। चिकित्सक स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत देने लगे हैं। वह सुबह-शाम घूमने वालों को सावधानी बरतने की कह रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने के लिए हिदायत दे रहे हैं।
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अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे सांस के 125 मरीज

जिले में प्रदूषण का स्तर ज्यादा बढ़ने के कारण जिला अस्पताल में सांस के मरीज बढ़े हैं। सांस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से सबसे अधिक बुजुर्ग इसका शिकार हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोज 110 से 125 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। पहले 50 से 70 सांस के मरीज पहुंचते थे।



सांस की नली आ जाती है सूजन

चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र राणा के अनुसार बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्थमा में सांस नली या इससे जुड़े हिस्सों में सूजन आ जाती है। इसके चलते फेफड़ों में हवा जाने में रुकावट पैदा होती है। इससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है।


प्रदूषण फैलाने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। मेरी टीम लगातार प्रदूषण फैलाने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। लोगों को बेहतर मास्क लगाने की सलाह भी दी जा रही है। प्रदूषण बढऩे पर ग्रैप-3 लागू कर दिया गया है। -प्रदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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