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Sonipat News: युद्ध से महंगा हुआ कच्चा माल, उद्यमियों को नुकसान का डर
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सोनीपत। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर जिले के उद्योग-धंधों पर भी दिखने लगा है। युद्ध के कारण उद्यमियों और एक्सपोर्टरों को जहां माल फंसने का डर सता रहा है वहीं लगातार बढ़ रही महंगाई के कारण भी उनकी परेशानी बढ़ गई है।
राई में पैकेजिंग इंडस्ट्री ज्यादा हैं। इनके पास पैकेजिंग से जुड़ी सामग्रियों के लिए बाहरी कंपनियों से ऑर्डर आते हैं। युद्ध के कारण इनके कच्चा माल के दामों में उछाल आ गया है। ऐसे में इन उद्योगपतियों के समक्ष ऑर्डर पूरा करने में परेशानी आ रही है। उन्हें नुकसान का डर सता रहा है।
पैकेजिंग उद्योगपति और राई मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान महेंद्र गोयल ने बताया कि उनके पास युद्ध शुरू होने से पहले के ऑर्डर हैं। ऑर्डर के वक्त तय रेट के अनुसार उन्हें माल की सप्लाई देनी होती है। इसी बीच युद्ध के कारण कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
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उनका कहना है कि उन्हें अब महंगे दाम पर कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है। ऑर्डर पूरा करने और सप्लाई देने में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे इंडस्ट्री को बड़ा घाटा हो सकता है। राई क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा फैक्टरी हैं। 200 से ज्यादा फैक्टरियां पैकेजिंग से जुड़ीं हैं।
यदि युद्ध पर विराम नहीं लगा तो पैकेजिंग इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। पैकेजिंग उद्योगपति रविंद्र मलिक ने कहा कि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उन्हें सीधा नुकसान होगा क्योंकि जिस कंपनी से वे ऑर्डर लेते हैं वे एकदम से रेट नहीं बढ़ाते हैं।
उनसे हम लोगों को अप्रूवल लेना पड़ता है जिसमें एक से डेढ़ महीने का भी समय लग सकता है। ऐसे में उन्हें इतने समय तक के लिए नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि वे रेट न बढ़ाएं। ऐसी स्थिति में उन्हें मोटा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
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राई में पैकेजिंग इंडस्ट्री ज्यादा हैं। इनके पास पैकेजिंग से जुड़ी सामग्रियों के लिए बाहरी कंपनियों से ऑर्डर आते हैं। युद्ध के कारण इनके कच्चा माल के दामों में उछाल आ गया है। ऐसे में इन उद्योगपतियों के समक्ष ऑर्डर पूरा करने में परेशानी आ रही है। उन्हें नुकसान का डर सता रहा है।
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पैकेजिंग उद्योगपति और राई मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान महेंद्र गोयल ने बताया कि उनके पास युद्ध शुरू होने से पहले के ऑर्डर हैं। ऑर्डर के वक्त तय रेट के अनुसार उन्हें माल की सप्लाई देनी होती है। इसी बीच युद्ध के कारण कच्चे माल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
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उनका कहना है कि उन्हें अब महंगे दाम पर कच्चा माल खरीदना पड़ रहा है। ऑर्डर पूरा करने और सप्लाई देने में नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे इंडस्ट्री को बड़ा घाटा हो सकता है। राई क्षेत्र में एक हजार से ज्यादा फैक्टरी हैं। 200 से ज्यादा फैक्टरियां पैकेजिंग से जुड़ीं हैं।
यदि युद्ध पर विराम नहीं लगा तो पैकेजिंग इंडस्ट्री को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा। पैकेजिंग उद्योगपति रविंद्र मलिक ने कहा कि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उन्हें सीधा नुकसान होगा क्योंकि जिस कंपनी से वे ऑर्डर लेते हैं वे एकदम से रेट नहीं बढ़ाते हैं।
उनसे हम लोगों को अप्रूवल लेना पड़ता है जिसमें एक से डेढ़ महीने का भी समय लग सकता है। ऐसे में उन्हें इतने समय तक के लिए नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसा भी हो सकता है कि वे रेट न बढ़ाएं। ऐसी स्थिति में उन्हें मोटा नुकसान झेलना पड़ सकता है।