विश्व कुश्ती चैंपियनशिप: जीजा-साली छाए, दो कांस्य पदक लाए, बजरंग ने चोटिल होने के बाद भी जीता मेडल
सर्बिया में हुई विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में विनेश के बाद बजरंग पूनिया ने भी कांस्य पदक जीता है। बजरंग ने चोटिल होने के बाद भी रेपचेज राउंड में कांस्य पदक दिलाया है। परिजनों ने लाडले की जीत पर खुशी मनाई है। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में बजरंग का चौथा पदक है।
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सर्बिया के बेलग्रेड में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों का प्रदर्शन आशा अनुरूप नहीं रहा। प्रतियोगिता में सोनीपत के खरखौदा में रह रहीं पहलवान विनेश और उनकी चचेरी बहन संगीता के पति मॉडल टाउन निवासी बजरंग पूनिया ही देश के लिए पदक जीत पाए। सिर में चोट लगने के बाद भी उन्होंने कड़े मुकाबले में पदक जीता।
ओलंपिक में रजत पदक विजेता रवि दहिया को प्रतियोगिता के शुरुआत में ही झटका लग गया था। वह प्री-क्वार्टर फाइनल में ही हारकर बाहर हो गए थे। उन्हें रेपचेज में भी मौका नहीं मिल सका। रविवार रात को पहलवान बजरंग पूनिया के कांस्य पदक जीतते ही मॉडल टाउन स्थित उनके घर पर जश्न शुरू हो गया था।
रविवार रात को 65 किलो भारवर्ग में बजरंग पूनिया ने कांस्य जीता तो रविवार सुबह से ही मॉडल टाउन में उनके घर परिचितों का तांता लग गया। परिचितों ने पिता बलवान सिंह, मां ओम प्यारी, भाई हरेंद्र व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खुशियां साझा कीं।
बजरंग के भाई हरेंद्र के मासूम बेटे अमन व नमन ने भी अपने दादा-दादी को मिठाई खिलाकर खुशियां मनाई। हालांकि दूसरे मुकाबले में बेटे के चोटिल होने से उनकी चिंता बढ़ गई थी। उसके बावजूद बजरंग ने अपने चिर परिचित अंदाज में खेलते हुए रेपचेज में मिले मौके को भुनाया और देश को कांस्य पदक दिलवाया।
मूलरूप से झज्जर के गांव खुड्डन के रहने वाले बजरंग पूनिया का परिवार अब सोनीपत के मॉडल टाउन में रहता है। परिजनों का कहना है कि बेटे की जीत पर सभी देशवासियों को गर्व है। विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में उनका चौथा पदक है। चार पदक जीतने वाले वह देश के एकमात्र पहलवान हैं।
चोटिल होने पर भी म्हारे शेर ने देश को दिलाया पदक
बजरंग पूनिया के भाई हरेंद्र पूनिया ने कहा कि बजरंग ने कड़ी मेहनत की थी। विश्व चैंपियनशिप के पहले मुकाबले में चोट लगने के बाद भी उन्होंने हौसला नहीं तोड़ा। रेपचेज में मौका मिला तो मेरा भाई शेर की तरह लड़ा और देश की झोली में कांस्य पदक डाल दिया। लाडले ने दिखा दिया कि वह सर्वश्रेष्ठ पहलवान है। बजरंग पूनिया मंगलवार को स्वदेश आएंगे।
बजरंग की काबिलियत पर पूरा भरोसा, ओलंपिक में लाएगा सोना
बजरंग के पिता बलवान पूनिया ने कहा कि बजरंग जब भी मैदान में उतरा, खाली हाथ कभी नहीं लौटा। जापान के टोक्यो में हुए ओलंपिक में चोट के कारण बजरंग स्वर्ण पदक जीतने से चूक गया था। अब पेरिस ओलंपिक में बेटे से स्वर्ण पदक की उम्मीद है। मां ओम प्यारी ने कहा कि बेटा जब भी बाहर गया तो देश के लिए पदक जरूर लेकर आया है।
पहलवानों को मिली कड़ी चुनौती
विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवानों को कड़ी चुनौती मिली, इसलिए ग्रीको रोमन का कोई पहलवान पदक नहीं जीत सका। वहीं विनेश फोगाट के अलावा कोई महिला पहलवान भी देश को पदक नहीं दिला सकी। पहले मुकाबले में हार के बाद विनेश को रेपचेज में मौका मिला। फ्री स्टाइल के पहलवान भी हारकर चैंपियनशिप से बाहर होते गए। पहली कुश्ती में बजरंग को बाई मिलने पर दूसरी कुश्ती में उन्हें कड़ी चुनौती मिली। कुश्ती के बीच में चोट लगने पर सिर से खून बहने लगा, लेकिन बजरंग ने कुश्ती 5-3 से जीत ली। हालांकि वह अगली कुश्ती हार गए। वहीं रेपचेज में मौका मिलने पर बजरंग ने संघर्ष पूर्ण मुकाबले में 10-9 से कुश्ती जीतकर कांस्य जीता।
बजरंग का पदक जीतने का सफर
- वर्ष 2013 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य
- वर्ष 2018 में विश्व कुश्ती प्रतियोगिता में रजत पदक
- वर्ष 2019 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक
- वर्ष 2014 राष्ट्रमंडल व एशियन गेम्स में रजत पदक
- अप्रैल 2018 में ऑस्ट्रेलिया में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक
- अगस्त 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक
- अप्रैल 2019 में चीन में हुई एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक
- मई 2019 में बुल्गारिया में हुए अली अलीयेव अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक
- अगस्त 2019 में जार्जिया में हुए तिबलिस अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक
- वर्ष 2020 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक
- वर्ष 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक