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Sonipat News: दावों और वादों में उलझी विकास की गाड़ी
Tue, 14 May 2024 10:06 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Tue, 14 May 2024 10:06 PM IST
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सोनीपत में गन्नौर के गांव घसौली में चुनाव पर चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
गन्नौर। लोकसभा चुनाव के मतदान की तिथि नजदीक आते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। चौक, चौपाल व चाय की दुकानों पर सुबह-शाम लोग चुनाव की चर्चा कर रहे हैं।
गांव घसौली में ग्रामीण स्वराज त्यागी, जिनेश्वर, राजीव त्यागी, बंटी, नरेश, बिल्लू, सतीश व सुंदर ने बताया कि चुनाव में प्रत्याशी दावे और वादे तो करते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई उनकी सुध नहीं लेता है। गांव में न पुस्तकालय है और ना ही खेल के मैदान। जो बच्चे पढ़ने के लिए सोनीपत जाते हैं उनके लिए बस की सुविधा नहीं है। गांव में अगर किसी की अचानक तबीयत खराब हो जाए तो उन्हें गन्नौर या सोनीपत भागना पड़ता है। गांव में काफी समय से पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) की मांग की जा रही है लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याशी अलग-अलग लुभावनी बातें करते हैं लेकिन कोई भी प्रत्याशी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात नहीं करता।
ग्रामीणों को कहना है कि जो प्रत्याशी उनके गांव में पीएचसी, पुस्तकालय व यातायात की सुविधा देने का वादा करेगा, वह उसी के पक्ष में मतदान करेंगे। कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लग रही है। मनमानी फीस ली जा रही है। स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाते हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल होता जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में पूरी दवाई नहीं मिलती और ना ही डॉक्टर। लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। उसकी वजह से आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों पर कोई बात नहीं करते। सभी एक-दूसरे पर आरोप लगाकर मतदाताओं को भटकाने का काम कर रहे हैं। उनके गांव में यातायात की सुविधा नहीं है, सड़कें टूटी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह इस बार सोच समझ कर वोट करेंगे।
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गांव घसौली में ग्रामीण स्वराज त्यागी, जिनेश्वर, राजीव त्यागी, बंटी, नरेश, बिल्लू, सतीश व सुंदर ने बताया कि चुनाव में प्रत्याशी दावे और वादे तो करते हैं लेकिन चुनाव के बाद कोई उनकी सुध नहीं लेता है। गांव में न पुस्तकालय है और ना ही खेल के मैदान। जो बच्चे पढ़ने के लिए सोनीपत जाते हैं उनके लिए बस की सुविधा नहीं है। गांव में अगर किसी की अचानक तबीयत खराब हो जाए तो उन्हें गन्नौर या सोनीपत भागना पड़ता है। गांव में काफी समय से पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) की मांग की जा रही है लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों ने बताया कि सभी प्रत्याशी अलग-अलग लुभावनी बातें करते हैं लेकिन कोई भी प्रत्याशी शिक्षा और स्वास्थ्य की बात नहीं करता।
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ग्रामीणों को कहना है कि जो प्रत्याशी उनके गांव में पीएचसी, पुस्तकालय व यातायात की सुविधा देने का वादा करेगा, वह उसी के पक्ष में मतदान करेंगे। कहा कि निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम नहीं लग रही है। मनमानी फीस ली जा रही है। स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाते हैं, जिससे बच्चों को पढ़ाना भी मुश्किल होता जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में पूरी दवाई नहीं मिलती और ना ही डॉक्टर। लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। उसकी वजह से आम आदमी की जेब पर बोझ पड़ता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि प्रत्याशी स्थानीय मुद्दों पर कोई बात नहीं करते। सभी एक-दूसरे पर आरोप लगाकर मतदाताओं को भटकाने का काम कर रहे हैं। उनके गांव में यातायात की सुविधा नहीं है, सड़कें टूटी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वह इस बार सोच समझ कर वोट करेंगे।