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Sonipat News: पहले चुनाव में बने दो रिकॉर्ड 57 साल बाद भी कायम
Thu, 19 Sep 2024 08:08 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 19 Sep 2024 08:08 AM IST
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सोनीपत। प्रदेश के गठन के बाद जिले में हुए पहले विधानसभा चुनाव में बने दो रिकॉर्ड 57 साल बाद भी कायम हैं। इसमें पहला रिकॉर्ड सबसे अधिक मतदान का और दूसरा सबसे कम अंतर से जीत का है। दोनों रिकॉर्ड 13 विधानसभा चुनाव के बाद भी बरकरार हैं। 14वें विधानसभा चुनाव में यह रिकॉर्ड टूटता है या फिर इतिहास बरकरार रहता है, यह देखना दिलचस्प रहेगा।
पंजाब से अलग कर वर्ष 1966 में हरियाणा का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 1967 में पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में सर्वाधिक 75.96 फीसदी मतदान हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के मोहनलाल ठक्कर ने जनसंघ के मुख्त्यार सिंह को नजदीकी मुकाबले में 895 मतों से मात दी थी। उसके बाद आज तक किसी भी विधानसभा चुनाव में यहां जीत का अंतर 2500 वोट से कम का नहीं रहा है। ऐसे में पहले विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक मतदान व जीत का अंतर एक रिकॉर्ड बन गया।
देवराज दीवान ने दर्ज की थी सबसे बड़ी जीत
मतों के अंतर से सबसे बड़ी जीत की बात करें तो यह रिकॉर्ड दिवंगत देवराज दीवान के नाम दर्ज है। उन्होंने वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में अपने विपक्षी सपा के ओमप्रकाश को 37,140 मतों के अंतर से सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। देवराज दीवान ने वर्ष 2000 में अपने अगले चुनाव में भी जीत का क्रम बरकरार रखा था, हालांकि इस बार अपने विपक्षी भाजपा के बाबू देवीदास से महज 3485 मतों से ही आगे रहे थे। 1996 के बाद दूसरी सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार के नाम दर्ज है, जो उन्होंने वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा की कविता जैन को 32,861 मतों से हराकर बनाया था। इससे पहले कविता जैन लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुकी थीं।
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अनिल ठक्कर के नाम भी दर्ज है रिकॉर्ड
जिले में पिता के बाद पुत्रों ने भी राजनीति के अखाड़े में हाथ आजमाए हैं। हालांकि यहां महज एक को ही कामयाबी मिली है। जिले के पहले विधायक एवं मंत्री बनने वाले मोहन लाल ठक्कर के बाद वर्ष 2005 में उनके बेटे अनिल ठक्कर चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की थी। वह कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव भी रहे हैं। हालांकि पूर्व विधायकों के राजनीति में एंट्री करने वाले वारिसों में देवराज दीवान के बेटे कमल दीवान व बाबू देवीदास के पोते तरुण देवीदास भी शामिल हैं।
अब तक यह रहा है मतदान प्रतिशत व जीत का अंतराल
वर्ष विजेता उपविजेता जीत का अंतर मतदान प्रतिशत
1967 मोहनलाल ठक्कर मुख्त्यार सिंह 895 75.96
1968 मुख्त्यार सिंह दीवान द्वारका नाथ 5306 58.45
1972 चिरंजीलाल वासदेव 8120 69.86
1977 बाबू देवीदास चिरंजीलाल 13734 63.71
1982 बाबू देवीदास मोहनलाल 8077 67.24
1987 बाबू देवीदास शामदास 15745 65.35
1991 शामदास सतेंद्र 8600 60.61
1996 देवराज दीवान ओमप्रकाश 37140 64.43
2000 देवराज दीवान बाबू देवीदास 3485 58.78
2005 अनिल ठक्कर राजीव कुमार 4116 63.93
2009 कविता जैन अनिल ठक्कर 2657 62.80
2014 कविता जैन देवराज दीवान 25810 68.45
2019 सुरेंद्र पंवार कविता जैन 32861 59.51
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पंजाब से अलग कर वर्ष 1966 में हरियाणा का गठन किया गया था। इसके बाद वर्ष 1967 में पहले विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में सर्वाधिक 75.96 फीसदी मतदान हुआ था। इस चुनाव में कांग्रेस के मोहनलाल ठक्कर ने जनसंघ के मुख्त्यार सिंह को नजदीकी मुकाबले में 895 मतों से मात दी थी। उसके बाद आज तक किसी भी विधानसभा चुनाव में यहां जीत का अंतर 2500 वोट से कम का नहीं रहा है। ऐसे में पहले विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक मतदान व जीत का अंतर एक रिकॉर्ड बन गया।
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देवराज दीवान ने दर्ज की थी सबसे बड़ी जीत
मतों के अंतर से सबसे बड़ी जीत की बात करें तो यह रिकॉर्ड दिवंगत देवराज दीवान के नाम दर्ज है। उन्होंने वर्ष 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में अपने विपक्षी सपा के ओमप्रकाश को 37,140 मतों के अंतर से सबसे बड़ी जीत दर्ज की थी। देवराज दीवान ने वर्ष 2000 में अपने अगले चुनाव में भी जीत का क्रम बरकरार रखा था, हालांकि इस बार अपने विपक्षी भाजपा के बाबू देवीदास से महज 3485 मतों से ही आगे रहे थे। 1996 के बाद दूसरी सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड कांग्रेस विधायक सुरेंद्र पंवार के नाम दर्ज है, जो उन्होंने वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा की कविता जैन को 32,861 मतों से हराकर बनाया था। इससे पहले कविता जैन लगातार दो बार जीत दर्ज कर चुकी थीं।
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अनिल ठक्कर के नाम भी दर्ज है रिकॉर्ड
जिले में पिता के बाद पुत्रों ने भी राजनीति के अखाड़े में हाथ आजमाए हैं। हालांकि यहां महज एक को ही कामयाबी मिली है। जिले के पहले विधायक एवं मंत्री बनने वाले मोहन लाल ठक्कर के बाद वर्ष 2005 में उनके बेटे अनिल ठक्कर चुनावी मैदान में उतरे और जीत दर्ज की थी। वह कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव भी रहे हैं। हालांकि पूर्व विधायकों के राजनीति में एंट्री करने वाले वारिसों में देवराज दीवान के बेटे कमल दीवान व बाबू देवीदास के पोते तरुण देवीदास भी शामिल हैं।
अब तक यह रहा है मतदान प्रतिशत व जीत का अंतराल
वर्ष विजेता उपविजेता जीत का अंतर मतदान प्रतिशत
1967 मोहनलाल ठक्कर मुख्त्यार सिंह 895 75.96
1968 मुख्त्यार सिंह दीवान द्वारका नाथ 5306 58.45
1972 चिरंजीलाल वासदेव 8120 69.86
1977 बाबू देवीदास चिरंजीलाल 13734 63.71
1982 बाबू देवीदास मोहनलाल 8077 67.24
1987 बाबू देवीदास शामदास 15745 65.35
1991 शामदास सतेंद्र 8600 60.61
1996 देवराज दीवान ओमप्रकाश 37140 64.43
2000 देवराज दीवान बाबू देवीदास 3485 58.78
2005 अनिल ठक्कर राजीव कुमार 4116 63.93
2009 कविता जैन अनिल ठक्कर 2657 62.80
2014 कविता जैन देवराज दीवान 25810 68.45
2019 सुरेंद्र पंवार कविता जैन 32861 59.51