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टोक्यो पैरालंपिक : जैवलिन थ्रो स्पर्धा में आज दम दिखाएंगे सोनीपत के सुमित आंतिल

Mon, 30 Aug 2021 01:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 30 Aug 2021 01:20 AM IST
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Tokyo Paralympics: Sumit Antil of Sonipat will show his strength in Javelin Throw event today
पैरालंपियन सुमित आंतिल अपनी बहनों रेनू, सुशीला व किरण के साथ। - फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
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सोनीपत। टोक्यो पैरालंपिक में जैवलिन थ्रो स्पर्धा में सोनीपत के गांव खेवड़ा का छोरा सुमित आंतिल सोमवार को अपना दम दिखाएगा। पैरालंपिक में पहली बार देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे सुमित आंतिल से सभी को पदक की पूरी उम्मीद है। देश के लिए पदक लाने को आतुर सुमित आंतिल ने अभ्यास के दौरान जमकर पसीना बहाया है। 30 अगस्त को दोपहर बाद 3:30 बजे शुरू होने वाले मैच को लेकर सभी खेल प्रेमी उत्साहित हैं और लाडले के बेहतर प्रदर्शन के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं।
टोक्यो पैरालंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे सुमित आंतिल का सफर कठिनाइयों भरा रहा है। छह साल पहले हुए सड़क हादसे में एक पैर गंवाने के बाद भी सुमित ने जिंदगी से कभी हार नहीं मानी और बुलंद हौसले से हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला किया। चेहरे पर मुस्कान रखने वाले सुमित ने न सिर्फ अपने से बड़ी तीन बहनों रेनू, सुशीला व किरण को हौसला दिया, बल्कि इकलौते बेटे के साथ हुए हादसे से दुखी मां निर्मला देवी को भी कहा है, मां रो मत, मैं आपको जीवन की हर खुशी दूंगा। सुमित ने अपनी कही बात को सच कर दिखाया और कड़ी मेहनत से टोक्यो पैरालंपिक तक का सफर पूरा कर मां व बहनों को गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किया।
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हादसे ने बदल दी जिंदगी
सुमित आंतिल का जन्म 7 जून 1998 को हुआ था। तीन बहनों के इकलौते भाई ने परिवार की कमी को पूरा कर दिया। सुमित जब सात साल का था, तब एयरफोर्स में तैनात पिता रामकुमार की बीमारी से मौत हो गई। पिता का साया उठने के बाद मां निर्मला ने हर दुख सहन करते हुए चारों बच्चों का पालन-पोषण किया। निर्मला देवी ने बताया कि सुमित जब 12वीं कक्षा में था, कॉमर्स का ट्यूशन लेता था। 5 जनवरी 2015 की शाम को वह ट्यूशन लेकर बाइक से वापस आ रहा था, तभी सीमेंट के कट्टों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने सुमित को टक्कर मार दी और काफी दूर तक घसीटते ले गई। इस हादसे में सुमित को अपना एक पैर गंवाना पड़ा। कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद सुमित को वर्ष 2016 में पूना लेकर गईं, जहां उसका पैर चढ़वाया।
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कोच वीरेंद्र धनखड़ ने किया मार्गदर्शन
निर्मला देवी ने बताया कि हादसे के बावजूद सुमित कभी उदास नहीं हुआ। रिश्तेदारों व दोस्तों की प्रेरणा से सुमित ने खेलों की तरफ ध्यान दिया और साई सेंटर पहुंचा। जहां एशियन रजत पदक विजेता कोच विरेंद्र धनखड़ ने सुमित का मार्गदर्शन किया और उसे लेकर दिल्ली पहुंचे। यहां द्रोणाचार्य अवॉर्डी कोच नवल सिंह से जैवलिन थ्रो के गुर सीखे। सुमित ने वर्ष 2018 में एशियन चैंपियनशिप में भाग लिया, लेकिन 5वीं रैंक ही प्राप्त कर सका। वर्ष 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत पदक जीता। इसी वर्ष हुए नेशनल गेम में सुमित ने स्वर्ण पदक जीत खुद को साबित किया। सुमित की बहन किरण ने बताया कि उसने सुमित को बेहतर खेल के लिए शुभकामनाएं दी हैं। संवाद

मां निर्मला देवी के साथ पैरालंपियन सुमित आंतिल।

मां निर्मला देवी के साथ पैरालंपियन सुमित आंतिल।- फोटो : Sonipat

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