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न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर कोई समझौता नहीं होगा : सीजेआई सूर्यकांत
Sun, 30 Nov 2025 01:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 30 Nov 2025 01:42 AM IST
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फोटो :24: सोनीपत के राठधना रोड स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में विश्व के सबसे बड़े मूट
सोनीपत। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है। इस पवित्र सिद्धांत पर किसी भी प्रकार का दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में न्यायपालिका की स्वतंत्रता विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विश्व के सबसे बड़े मूट कोर्ट -ईमानदार: न्यायाभ्यास मंडपम-को राष्ट्र को समर्पित किया गया। आधुनिक न्यायालय जैसी यह संरचना छात्रों को वास्तविक अदालतनुमा माहौल में वकालत और बहस की व्यावहारिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराएगा।
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संविधान की मूल संरचना अटूट : सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संविधान की मूल संरचना स्वतंत्रता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और न्याय संविधान की चारपाई है। इनकी स्वतंत्रता अटल है। इन्हें न कमजोर किया जा सकता है और न बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल रिव्यू न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति है और यह हमेशा कायम रहेगी। मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय संविधान की तुलना एक मजबूत चारपाई से करते हुए कहा कि इसकी मजबूती कठोरता और लचीलेपन के संतुलन में है। रस्सियां बहुत कसीं तो टूट जाएंगी और ढीली छोड़ दी जाएं तो ढह जाएंगी। यही संतुलन भारत को दुनिया की सबसे स्थिर और परिपक्व संवैधानिक लोकतंत्रों में शामिल करता है।
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न्यायपालिका स्वतंत्र ही नहीं, सक्षम भी होनी चाहिए : मेघवाल
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संविधान ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को अत्यंत मजबूत सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने अनुच्छेद 50, 121 और 122 का हवाला देते हुए कहा कि शक्तियों का पृथक्करण और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा किसी भी हस्तक्षेप से परे है। मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका सिर्फ स्वतंत्र नहीं, सक्षम भी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार ई-कोट्र्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और न्यायिक प्रशासन के आधुनिकीकरण को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।
ऐतिहासिक ‘केशवानंद भारती केस’ का हुआ मंचन
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा भारतीय संविधान की मूल संरचना सिद्धांत निर्धारित करने वाले ऐतिहासिक केशवानंद भारती केस का नाट्य-प्रस्तुतीकरण रहा। मंचन में देश के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी एवं सिद्धार्थ लूथरा ने भाग लिया। सोनीपत में पहली बार 13 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एक साथ मंच पर उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन कार्यकारी डीन प्रो. दीपिका जैन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. डबीरु श्रीधर पटनायक ने किया।
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जस्टिस सूर्यकांत शनिवार को ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में न्यायपालिका की स्वतंत्रता विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में विश्व के सबसे बड़े मूट कोर्ट -ईमानदार: न्यायाभ्यास मंडपम-को राष्ट्र को समर्पित किया गया। आधुनिक न्यायालय जैसी यह संरचना छात्रों को वास्तविक अदालतनुमा माहौल में वकालत और बहस की व्यावहारिक ट्रेनिंग उपलब्ध कराएगा।
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संविधान की मूल संरचना अटूट : सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि संविधान की मूल संरचना स्वतंत्रता, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और न्याय संविधान की चारपाई है। इनकी स्वतंत्रता अटल है। इन्हें न कमजोर किया जा सकता है और न बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि ज्यूडिशियल रिव्यू न्यायपालिका की सबसे बड़ी शक्ति है और यह हमेशा कायम रहेगी। मुख्य न्यायाधीश ने भारतीय संविधान की तुलना एक मजबूत चारपाई से करते हुए कहा कि इसकी मजबूती कठोरता और लचीलेपन के संतुलन में है। रस्सियां बहुत कसीं तो टूट जाएंगी और ढीली छोड़ दी जाएं तो ढह जाएंगी। यही संतुलन भारत को दुनिया की सबसे स्थिर और परिपक्व संवैधानिक लोकतंत्रों में शामिल करता है।
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न्यायपालिका स्वतंत्र ही नहीं, सक्षम भी होनी चाहिए : मेघवाल
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि संविधान ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को अत्यंत मजबूत सुरक्षा प्रदान की है। उन्होंने अनुच्छेद 50, 121 और 122 का हवाला देते हुए कहा कि शक्तियों का पृथक्करण और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा किसी भी हस्तक्षेप से परे है। मेघवाल ने कहा कि न्यायपालिका सिर्फ स्वतंत्र नहीं, सक्षम भी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से सरकार ई-कोट्र्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और न्यायिक प्रशासन के आधुनिकीकरण को तेज गति से आगे बढ़ा रही है।
ऐतिहासिक ‘केशवानंद भारती केस’ का हुआ मंचन
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा भारतीय संविधान की मूल संरचना सिद्धांत निर्धारित करने वाले ऐतिहासिक केशवानंद भारती केस का नाट्य-प्रस्तुतीकरण रहा। मंचन में देश के शीर्ष विधि अधिकारी अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी एवं सिद्धार्थ लूथरा ने भाग लिया। सोनीपत में पहली बार 13 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश एक साथ मंच पर उपस्थित हुए। कार्यक्रम का संचालन कार्यकारी डीन प्रो. दीपिका जैन ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. डबीरु श्रीधर पटनायक ने किया।

फोटो :24: सोनीपत के राठधना रोड स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल विश्वविद्यालय में विश्व के सबसे बड़े मूट