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Sonipat News: नागरिक अस्पताल में कैंसर जांच की सुविधा पर विशेषज्ञ नहीं, ढाई साल से कीमोथैरेपी भी नहीं हो पा रही

Sat, 03 Feb 2024 11:00 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Sat, 03 Feb 2024 11:00 PM IST
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There is no specialist in the cancer testing facility in the civil hospital, chemotherapy is also not being done for two and a half years.
सोनीपत। नागरिक अस्पताल में कैंसर जांच की सुविधा तो है, लेकिन विशेषज्ञ न होने के कारण संदिग्ध मरीजों को उपचार के लिए पीजीआई व मेडिकल कॉलेज खानपुर रेफर करना पड़ रहा है। अस्पताल में तीन तरह के कैंसर की स्क्रीनिंग (जांच) की जाती हैं। जिला अस्पताल में ढाई साल से विशेषज्ञ न होने के कारण कीमोथैरेपी भी नहीं हो पाती।
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जिले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से गैर संचारी रोग (एनसीडी) नियंत्रण कार्यक्रम की शुरुआत 1 अप्रैल 2019 की की गई थी। जिला अस्पताल में एनसीडी क्लीनिक भी चल रहा है। जिसमें आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच डॉ. सीमा व डॉ. वृंदा करती हैं। जब पीड़ित मरीज कैंसर के तीसरे व चौथे चरण पर पहुंच जाता है तो उस समय उन्हें पैलिएटिव केयर की सुविधा दी जाती है। पैलिएटिव केयर कैंसर, एड्स, हृदय, गुर्दा फेल या कोमा के मरीजों को दर्द से राहत प्रदान करने के लिए प्रदान किया जाता है। रोगियों की देखरेख के साथ-साथ उन्हें कुछ दवाएं भी दी जाती हैं जिससे उन्हें आराम मिल सके। संक्रमण से बचाने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं भी नियमित रूप से दी जाती हैं जिससे उनकी परेशानी समय के साथ न बढ़े।
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पांच साल में 3.65 लाख लोगों की जांच
स्वास्थ्य विभाग विभाग की ओर से 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 जनवरी 2024 तक अभियान चलाया गया। इस दौरान 30 साल से ज्यादा उम्र के 3,65,741 लोगों की कैंसर जांच की गई। इनमें 64,362 संदिग्ध मिल चुके हैं। इनमें से 562 मरीजों में कैंसर की पुष्टि हो सकी। जिले में 83 लोगों को ओरल कैंसर, 62 महिलाओं को स्तन कैंसर और 20 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर और 397 लोगों को अन्य तरह के कैंसर की पुष्टि हो चुकी है।
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यह टेस्ट होते हैं अस्पताल में :
जिला नागरिक अस्पताल में पैपस्मीयर टेस्ट महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की जांच के लिए किया जाता है। इसके लिए गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं से सैंपल निकाला जाता है। स्तन कैंसर की जांच के लिए बायोप्सी टेस्ट भी किया जाती है। इस कैंसर से बनने वाली गांठ में आमतौर पर दर्द नहीं होता और शरीर को अंदर ही अंदर बहुत नुकसान होता है। ऐसे में कैंसर से बचने के लिए महिलाओं को सतर्क रहने को जागरूक किया जा रहा है। वर्तमान में बेहतर खानपान के अभाव में लोग कैंसर समेत अन्य बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। वहीं दंत चिकित्सक की ओर से ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) की जांच की जाती है। अगर मुंह के अंदर बदला हुआ रंग मिलता है तो कैंसर होने की आशंका रहती है। अस्पताल में कैंसर की पुष्टि होने के बाद रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया जाता है


कैंसर होने के खतरे को कम करने के उपाय

- ज्यादा मात्रा में फल-सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

- रोजाना सुबह-शाम व्यायाम जरूरी है।

- हैपेटाइटिस बी का टीका लगवाना चाहिए।

- शराब से दूर रहना चाहिए।

- तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए।

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वर्जन
जिले में विभाग की ओर से कैंसर जांच की जाती है। पांच साल में 562 मरीज मिल चुके हैं। जिला अस्पताल में तीन तरह के कैंसर की स्क्रीनिंग की सुविधा है। कैंसर से बचाव के लिए लोगों को समय-समय पर जांच करानी चाहिए। अस्पताल में आने वाले मरीजों को कैंसर की जांच के लिए आह्वान किया जाता है। 30 वर्ष से ज्यादा उम्र के पुरुष व महिला को हर पांच साल में अपनी कैंसर की जांच जरूर करा लेनी चाहिए।
- डॉ. जयकिशोर, सिविल सर्जन सोनीपत
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