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Sonipat News: बुकिंग बंद और ट्रकों का चक्का जाम होने से रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ेगा
Fri, 22 May 2026 08:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Fri, 22 May 2026 08:52 PM IST
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फोटो : सोनीपत के फाजिलपुर स्थित ट्रक यूनियन में महाचक्का जाम के दौरान खड़े ट्रक। संवाद
सोनीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में बढ़ोतरी और गैर-दिल्ली पंजीकृत बीएस-4 वाहनों पर प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्टर्स कांग्रेस के आह्वान पर महाचक्का जाम के चलते सोनीपत और दिल्ली के बीच प्रतिदिन संचालित होने वाले 500 से अधिक भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही।
ट्रांसपोर्टर की हड़ताल से औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापारियों की चिंता बढ़ने लगी है। बुकिंग बंद और ट्रकों का चक्का जाम होने से रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ेगा। लगातार दूसरे दिन ट्रकों के चक्काजाम रहने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। बड़ी कंपनियों में कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की डिलीवरी प्रभावित है।
भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के प्रधान अमित कटारिया का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन और उग्र होगा। दिल्ली सरकार की ओर से जरूरी सामान के वाहनों से भी ग्रीन टैक्स वसूला जा रहा है। इससे सामान महंगा होगा।मांगें पूरी नहीं हुई तो सांकेतिक हड़ताल को आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है। इस दौरान ट्रांसपोर्टर की हड़ताल के चलते आगामी बुकिंग भी बंद रही।
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उद्योगपतियों की तरफ से दिल्ली के लिए 150 से ज्यादा काॅल आती रही, लेकिन उन्होंने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की बात कहकर दिल्ली जाने से इंकार कर दिया। फाजिलपुर स्थित ट्रक यूनियन में सन्नाटा पसरा हुआ है और रोजमर्रा के सामान से लेकर औद्योगिक व निर्माण सामग्री की सप्लाई पर असर पड़ने लगा है।
ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्ट संगठन लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार की नई नीतियों ने पहले से आर्थिक संकट झेल रहे ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें, टैक्स और अन्य खर्च पहले ही कारोबार पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में ईसीसी शुल्क और नए प्रतिबंधों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि कई छोटे ट्रांसपोर्टर अब घाटे में पहुंच चुके हैं और किश्तें भरना भी मुश्किल हो रहा है।
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ट्रांसपोर्टर की हड़ताल से औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापारियों की चिंता बढ़ने लगी है। बुकिंग बंद और ट्रकों का चक्का जाम होने से रोजमर्रा की चीजों पर असर पड़ेगा। लगातार दूसरे दिन ट्रकों के चक्काजाम रहने से औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ा है। बड़ी कंपनियों में कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार माल की डिलीवरी प्रभावित है।
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भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के प्रधान अमित कटारिया का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन और उग्र होगा। दिल्ली सरकार की ओर से जरूरी सामान के वाहनों से भी ग्रीन टैक्स वसूला जा रहा है। इससे सामान महंगा होगा।मांगें पूरी नहीं हुई तो सांकेतिक हड़ताल को आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है। इस दौरान ट्रांसपोर्टर की हड़ताल के चलते आगामी बुकिंग भी बंद रही।
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उद्योगपतियों की तरफ से दिल्ली के लिए 150 से ज्यादा काॅल आती रही, लेकिन उन्होंने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की बात कहकर दिल्ली जाने से इंकार कर दिया। फाजिलपुर स्थित ट्रक यूनियन में सन्नाटा पसरा हुआ है और रोजमर्रा के सामान से लेकर औद्योगिक व निर्माण सामग्री की सप्लाई पर असर पड़ने लगा है।
ईसीसी शुल्क और बीएस-4 वाहनों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में ट्रांसपोर्ट संगठन लगातार सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि सरकार की नई नीतियों ने पहले से आर्थिक संकट झेल रहे ट्रक मालिकों और ड्राइवरों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं। ट्रक ऑपरेटरों का कहना है कि डीजल की लगातार बढ़ती कीमतें, टैक्स और अन्य खर्च पहले ही कारोबार पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में ईसीसी शुल्क और नए प्रतिबंधों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि कई छोटे ट्रांसपोर्टर अब घाटे में पहुंच चुके हैं और किश्तें भरना भी मुश्किल हो रहा है।