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वर्कर के बजाय स्वयंसेवी मानकर लाभों से वंचित कर रही सरकार : सुनीता
Sat, 06 Dec 2025 10:22 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 06 Dec 2025 10:22 PM IST
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फोटो 18: सोनीपत के गन्नौर में बैठक के दौरान नारेबाजी करती आशा कार्यकर्ता। स्रोत: यूनियन
गन्नौर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गन्नौर और हलालपुर की आशा कार्यकर्ताओं की बैठक शनिवार को लहरी पार्क में हुई। इसमें राज्य प्रधान सुनीता ने कार्यकर्ताओं की समस्याओं और मांगों को लेकर चर्चा की।
सुनीता ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मजदूरों और किसानों से जुड़े हितों की लगातार उपेक्षा कर रही हैं। कई जनकल्याणकारी योजनाएं या तो बंद कर दी गई हैं या उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
आईसीडीएस, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं में देशभर की 60 लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं फिर भी सरकार इन्हें कार्यकर्ता के स्थान पर स्वयंसेवी मानकर सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रखती है।
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वर्ष 2018 के बाद से मानदेय में वृद्धि न होना और श्रम संहिताओं का दबाव उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। इन्हीं मांगों को लेकर आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता 7 और 8 दिसंबर को करनाल, फरीदाबाद, हिसार और भिवानी में मंत्रियों के आवासों पर महापड़ाव करेंगी।
सरकार से 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, एक्स-ग्रेशिया सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ, परियोजनाओं के निजीकरण पर रोक और पर्याप्त बजट आवंटन की मांग की जाएगी।
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सुनीता ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मजदूरों और किसानों से जुड़े हितों की लगातार उपेक्षा कर रही हैं। कई जनकल्याणकारी योजनाएं या तो बंद कर दी गई हैं या उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
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आईसीडीएस, मिड-डे मील और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी योजनाओं में देशभर की 60 लाख से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं फिर भी सरकार इन्हें कार्यकर्ता के स्थान पर स्वयंसेवी मानकर सामाजिक सुरक्षा लाभों से वंचित रखती है।
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वर्ष 2018 के बाद से मानदेय में वृद्धि न होना और श्रम संहिताओं का दबाव उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। इन्हीं मांगों को लेकर आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा कार्यकर्ता 7 और 8 दिसंबर को करनाल, फरीदाबाद, हिसार और भिवानी में मंत्रियों के आवासों पर महापड़ाव करेंगी।
सरकार से 26 हजार रुपये न्यूनतम वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी, एक्स-ग्रेशिया सहित सामाजिक सुरक्षा लाभ, परियोजनाओं के निजीकरण पर रोक और पर्याप्त बजट आवंटन की मांग की जाएगी।