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भगवान श्रीकृष्ण के गऊ प्रेम का प्रतीक है गोपाष्टमी का पर्व : श्यामदास
Sun, 10 Nov 2024 02:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 10 Nov 2024 02:26 AM IST
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फोटो 31- सोनीपत के गन्नौर स्थित मंदिर प्रांगण से निकाली गई शोभा यात्रा के दौरान पालकी उठाए गोशा
गन्नौर। श्रीकृष्ण प्रणामी मंदिर गोशाला सेवा समिति गढ़ी केसरी की तरफ से गोपाष्टमी के उपलक्ष्य में संगीतमय गो कथा का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर से शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके बाद श्रीकृष्ण प्रणामी गोशाला के संस्थापक श्यामदास महाराज, प्रधान सतपाल शर्मा, गोभक्तों, नंद बाबा व ग्वालों की तरफ से गोमाता का पूजन किया गया।
श्यामदास महाराज ने कहा कि गोपाष्टमी ब्रज संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। इंद्र के प्रकोप से ब्रज के निवासियों और प्राणियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से अष्टमी तक गोवर्धन पर्वत को धारण किए रहे और अंत में इंद्र ने अपने अहंकार को त्याग कर भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा प्रार्थना की। तब कामधेनु ने कृष्ण जी का अभिषेक किया और उसी दिन से उनका नाम गोविंद पड़ा। इस दिन गोवर्धन, गाय और बछड़े व गोपाल की पूजन का विधान है।
शास्त्रों में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन गायों को भोजन खिलाता है, उनकी सेवा करता है व सायं काल में गायों का पंचोपचार विधि से पूजन करता है तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के रमेश भाई प्रणामी की तरफ से भजनों का गुणगान किया गया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारा लगाया गया।
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श्यामदास महाराज ने कहा कि गोपाष्टमी ब्रज संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है। इंद्र के प्रकोप से ब्रज के निवासियों और प्राणियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से अष्टमी तक गोवर्धन पर्वत को धारण किए रहे और अंत में इंद्र ने अपने अहंकार को त्याग कर भगवान श्रीकृष्ण से क्षमा प्रार्थना की। तब कामधेनु ने कृष्ण जी का अभिषेक किया और उसी दिन से उनका नाम गोविंद पड़ा। इस दिन गोवर्धन, गाय और बछड़े व गोपाल की पूजन का विधान है।
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शास्त्रों में कहा जाता है कि जो व्यक्ति इस दिन गायों को भोजन खिलाता है, उनकी सेवा करता है व सायं काल में गायों का पंचोपचार विधि से पूजन करता है तो उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। उत्तर प्रदेश के रमेश भाई प्रणामी की तरफ से भजनों का गुणगान किया गया। कार्यक्रम के समापन पर भंडारा लगाया गया।
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