फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   The family's light died with the loss of their only son, leaving only elderly parents at home.

Sonipat News: इकलौते बेटे संग बुझ गया परिवार का चिराग, घर में केवल बुजुर्ग मां-बाप ही बचे

Tue, 26 May 2026 01:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 01:16 AM IST
विज्ञापन
The family's light died with the loss of their only son, leaving only elderly parents at home.
सिविल अस्पताल में पहुंचे परिवार के सदस्य। संवाद
रेवाड़ी। नेशनल हाईवे-11 पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने बोडिया कमालपुर गांव ही नहीं, पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। एक पल में हंसता-खेलता परिवार खत्म हो गया। हादसे में बोडिया कमालपुर निवासी बृजमोहन, उनकी पत्नी अनीता और इकलौते बेटे निमिश की मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
विज्ञापन

इस हादसे ने बुजुर्ग माता-पिता से उनका जवान बेटा, बहू और इकलौता पोता छीन लिया। बृजमोहन की बहन की शादी हो चुकी है और अब घर में केवल बुजुर्ग मां-बाप ही बचे हैं। गांव में हर आंख नम है। लोग यही कह रहे हैं कि परिवार बेटे के सपनों को संवारने निकला था, लेकिन लौटकर घर नहीं आ पाया।
विज्ञापन

रविवार की रात हुए इस हादसे की सूचना जैसे ही परिवार और गांव तक पहुंची, मातम छा गया। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ घंटे पहले तक हंसते-बोलते निकला परिवार अब इस दुनिया में नहीं रहा। गांव में हर ओर सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा पसरा हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन

40 वर्षीय बृजमोहन एक टेलीकॉम कंपनी में इंजीनियर थे। उनकी पत्नी अनीता सरकारी स्कूल में टीजीटी हिंदी अध्यापिका थीं। दोनों अपने 14 वर्षीय बेटे निमिश को बेहतर भविष्य देने के लिए सीकर गए थे। निमिश पढ़ाई में होनहार था और सीकर में रहकर कोचिंग करना चाहता था। माता-पिता भी बेटे के सपनों को पूरा करने के लिए उसके साथ गए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
राह चलते लोगों ने ढाबे वालों को सूचना दी
वापसी के दौरान उनकी स्कॉर्पियो हाईवे पर एक ट्रक से पीछे से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और तीनों अंदर ही बुरी तरह फंस गए। हादसे के बाद मौके पर पहुंचे लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। राह चलते लोगों ने ढाबे वालों को सूचना दी, जिसके बाद आसपास के लोग मदद के लिए पहुंचे।

सबसे ज्यादा मुश्किल निमिश को बाहर निकालने में हुई
प्रत्यक्षदर्शी रोहित के अनुसार स्कॉर्पियो इतनी बुरी तरह पिचक चुकी थी कि दरवाजे तक नहीं खुल रहे थे। लोगों ने लोहे की रॉड और अन्य औजारों की मदद से खिड़कियां तोड़ने का प्रयास किया। सबसे ज्यादा मुश्किल निमिश को बाहर निकालने में हुई, क्योंकि वह गाड़ी के अंदर बुरी तरह फंस चुका था। काफी मशक्कत के बाद तीनों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

सिविल अस्पताल में पहुंचे परिवार के सदस्य। संवाद

सिविल अस्पताल में पहुंचे परिवार के सदस्य। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed