संयुक्त राष्ट्र संघ की तरफ से ‘मलाला अवॉर्ड’ से सम्मानित रजिया सुल्तान ने कहा कि अफगानिस्तान की महिलाएं तालिबान के पहले दौर में कड़ी यातनाएं झेल चुकी हैं। अभी भी वहां भय का माहौल है। खास तौर पर महिलाओं को इस बात की चिंता है कि तालिबान के आने के बाद सबसे बुरा दौर इन्हें ही देखना पड़ सकता है। तालिबान वर्तमान में जिस तरह महिलाओं के प्रति अपनी सुधरी हुई छवि को दिखाने की कोशिश कर रहा है, वह अपने बदले रुख पर कायम रहे।
रजिया सुल्तान शनिवार को शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर गुरु सदन स्थित गीतांजलि सीनियर सेकेंडरी स्कूल व रूरल नर्सिंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंची थीं। रजिया सुल्तान ने कहा कि पिछले दिनों तालिबान की तरफ से कहा गया था कि वह इस्लामिक कानूनों के दायरे में रहते हुए महिलाओं को पूरे हक देगा। तालिबान अपनी बातों पर किस तरह से अमल करता है, यह आने वाले समय में ही पता चल सकेगा। उन्होंने कहा कि अब वह एनजीओ बनाकर देश व समाज की सेवा करना चाहती हैं। रजिया उत्तर प्रदेश के मेरठ के गांव नंगला कुंभा की रहने वाली हैं। वह फिलहाल मुजफ्फरनगर स्थित ससुराल में भी बच्चों को शिक्षा के प्रति प्रेरित कर रही हैं। उनका मानना है कि अभी प्रत्येक बच्चे की शिक्षा व बाल श्रम मुक्ति को लेकर सरकार को लंबा सफर तय करना है। साथ ही समाज के लोगों को भी नैतिक तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए। इस दौरान संस्था के चेयरमैन नरेंद्र सूरा, गीतांजलि स्कूल की प्राचार्य ए. शर्मिला, प्राध्यापिका मंजू शुक्ला, डॉ. दीपिका राणा, चंचल वत्स सहित अन्य शिक्षक मौजूद रहे।