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Sonipat News: छह दिन बाद समाप्त हुआ गन्ना किसानों का धरना, मांगें पूरी करने का आश्वासन
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- सहकारी चीनी मिल प्रदेश की अन्य मिलों के साथ होगी शुरू
- अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने का खर्च उठाएगा प्रबंधन
फोटो 14 व 15:
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सहकारी चीनी मिल के नवीनीकरण, पेराई सत्र जल्द शुरू करने और अतिरिक्त गन्ने की व्यवस्था सहित लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले चल रहा गन्ना किसानों का धरना वीरवार को छठे दिन समाप्त हो गया। उपायुक्त नेहा सिंह के साथ हुई बैठक में मांगों को पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। प्रशासन ने भरोसा दिया कि सोनीपत शुगर मिल प्रदेश की अन्य शुगर मिलों के साथ ही शुरू होगी और मिल की क्षमता से अधिक गन्ने को दूसरी मिलों में पहुंचाने का परिवहन खर्च भी प्रबंधन उठाएगा।
किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर वीरवार को मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री की शवयात्रा निकालकर पुतले दहन करने का एलान किया था। हालांकि, मिल प्रशासन और उपायुक्त की ओर से बातचीत की पहल के बाद किसानों ने यह निर्णय रद्द कर दिया। इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त और मिल प्रशासन के साथ बैठक की, जिसमें मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया।
भाकियू (टिकैत) के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र पहल ने बताया कि चीनी मिल के एमडी डॉ. अनमोल के पिता के निधन पर किसानों ने धरनास्थल पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मिल प्रशासन की टीम धरनास्थल पर पहुंची और उपायुक्त की ओर से किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया।
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बैठक में उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि प्रदेश की अन्य शुगर मिलों के साथ द सोनीपत सहकारी चीनी मिल भी चालू होगी और किसान उसी दिन अपना गन्ना लेकर मिल पहुंच सकेंगे। मिल प्रबंधन प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार गन्ने की पेराई करेगा। यदि अतिरिक्त गन्ने की पेराई संभव नहीं हुई तो उसे दूसरी मिलों तक पहुंचाने का परिवहन खर्च प्रबंधन वहन करेगा।
वीरेंद्र पहल के अनुसार चीनी मिल की वार्षिक पेराई क्षमता करीब 22 से 25 लाख क्विंटल है, जबकि क्षेत्र में लगभग 50 लाख क्विंटल गन्ना उपलब्ध है। ऐसे में करीब 25 लाख क्विंटल अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की जरूरत पड़ती है। किसानों का कहना था कि पहले अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की व्यवस्था पेराई सत्र के अंतिम चरण में की जाती थी। इससे किसानों को परेशानी होती थी।
किसानों की मांग थी कि अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की व्यवस्था सत्र के अंत तक टालने के बजाय पहले दिन से लागू किया जाए। बैठक में इस व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। अब किसानों की नजर पेराई सत्र शुरू होने के साथ इन आश्वासनों पर अमल होने पर रहेगी। धरने के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी भी किसानों के समर्थन में पहुंचे। इनमें किसान नेता श्रद्धानंद सोलंकी, ईश्वर राठी, ईश्वर दहिया और सिलकराम मलिक शामिल रहे। आम आदमी पार्टी ने भी गन्ना किसानों की मांगों का समर्थन किया।
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- अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने का खर्च उठाएगा प्रबंधन
फोटो 14 व 15:
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। सहकारी चीनी मिल के नवीनीकरण, पेराई सत्र जल्द शुरू करने और अतिरिक्त गन्ने की व्यवस्था सहित लंबित मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के बैनर तले चल रहा गन्ना किसानों का धरना वीरवार को छठे दिन समाप्त हो गया। उपायुक्त नेहा सिंह के साथ हुई बैठक में मांगों को पूरा करने का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने आंदोलन खत्म करने की घोषणा की। प्रशासन ने भरोसा दिया कि सोनीपत शुगर मिल प्रदेश की अन्य शुगर मिलों के साथ ही शुरू होगी और मिल की क्षमता से अधिक गन्ने को दूसरी मिलों में पहुंचाने का परिवहन खर्च भी प्रबंधन उठाएगा।
किसानों ने मांगें पूरी नहीं होने पर वीरवार को मुख्यमंत्री और सहकारिता मंत्री की शवयात्रा निकालकर पुतले दहन करने का एलान किया था। हालांकि, मिल प्रशासन और उपायुक्त की ओर से बातचीत की पहल के बाद किसानों ने यह निर्णय रद्द कर दिया। इसके बाद किसान प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त और मिल प्रशासन के साथ बैठक की, जिसमें मांगों के समाधान का आश्वासन दिया गया।
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भाकियू (टिकैत) के जिला अध्यक्ष वीरेंद्र पहल ने बताया कि चीनी मिल के एमडी डॉ. अनमोल के पिता के निधन पर किसानों ने धरनास्थल पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मिल प्रशासन की टीम धरनास्थल पर पहुंची और उपायुक्त की ओर से किसानों के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया।
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बैठक में उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि प्रदेश की अन्य शुगर मिलों के साथ द सोनीपत सहकारी चीनी मिल भी चालू होगी और किसान उसी दिन अपना गन्ना लेकर मिल पहुंच सकेंगे। मिल प्रबंधन प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार गन्ने की पेराई करेगा। यदि अतिरिक्त गन्ने की पेराई संभव नहीं हुई तो उसे दूसरी मिलों तक पहुंचाने का परिवहन खर्च प्रबंधन वहन करेगा।
वीरेंद्र पहल के अनुसार चीनी मिल की वार्षिक पेराई क्षमता करीब 22 से 25 लाख क्विंटल है, जबकि क्षेत्र में लगभग 50 लाख क्विंटल गन्ना उपलब्ध है। ऐसे में करीब 25 लाख क्विंटल अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की जरूरत पड़ती है। किसानों का कहना था कि पहले अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की व्यवस्था पेराई सत्र के अंतिम चरण में की जाती थी। इससे किसानों को परेशानी होती थी।
किसानों की मांग थी कि अतिरिक्त गन्ने को दूसरी मिलों में भेजने की व्यवस्था सत्र के अंत तक टालने के बजाय पहले दिन से लागू किया जाए। बैठक में इस व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने धरना समाप्त कर दिया। अब किसानों की नजर पेराई सत्र शुरू होने के साथ इन आश्वासनों पर अमल होने पर रहेगी। धरने के दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी भी किसानों के समर्थन में पहुंचे। इनमें किसान नेता श्रद्धानंद सोलंकी, ईश्वर राठी, ईश्वर दहिया और सिलकराम मलिक शामिल रहे। आम आदमी पार्टी ने भी गन्ना किसानों की मांगों का समर्थन किया।