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खेल विवि के विद्यार्थी डिग्रीधारी नहीं खेल संस्कृति के संवाहक बनेंगे : कुलपति
Sat, 07 Feb 2026 05:46 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sat, 07 Feb 2026 05:46 PM IST
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फोटो 02: सोनीपत के हरियाणा खेल विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को संबोधित करते कुलपति अशोक कु
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। विश्वविद्यालय में औपचारिक या फर्जी डिग्री की संस्कृति को प्रोत्साहन के लिए कोई जगह नहीं। यह बात शनिवार को हरियाणा खेल विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करना और गुणवत्ता बनाए रखना विषय पर व्याख्यान में कही। इस आयोजन का उद्देश्य विश्वविद्यालय की विकास यात्रा, शैक्षणिक गुणवत्ता व भविष्य सार्थक विचार मंथन रहा।
कुलपति ने नियमित उपस्थिति और अनुशासन को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि यहां छात्र केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि सीखने वाले, उत्कृष्ट खिलाड़ी और खेल संस्कृति के संवाहक बनेंगे। उन्होंने नकल और अनुचित साधनों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को दोहराया।
शिक्षक, कोच और छात्रों को नवाचार की दिशा में निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते हुए विश्वविद्यालय की ब्रांडिंग और सकारात्मक छवि निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने बीते वर्षों में कई ठोस कदम उठाए हैं। इन्हीं के परिणामस्वरूप खेल विश्वविद्यालय हरियाणा आज देश का तीसरा सबसे बड़ा खेल विश्वविद्यालय है।
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इस प्रगति में मोतीलाल नेहरू स्पोर्ट्स स्कूल (एमएनएसएस) की वर्षों पुरानी प्रतिष्ठा, अनुशासन और अनुभव काम आया। उन्होंने विश्वविद्यालय की धारणा और ब्रांड बिल्डिंग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की उत्कृष्टता कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है।
इनमें विद्यार्थियों की गुणवत्ता, शिक्षण एवं कोचिंग की गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, शैक्षणिक नियमितता, परीक्षा प्रणाली और शोध एवं नवाचार की संस्कृति प्रमुख हैं।
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सोनीपत। विश्वविद्यालय में औपचारिक या फर्जी डिग्री की संस्कृति को प्रोत्साहन के लिए कोई जगह नहीं। यह बात शनिवार को हरियाणा खेल विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक कुमार ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त करना और गुणवत्ता बनाए रखना विषय पर व्याख्यान में कही। इस आयोजन का उद्देश्य विश्वविद्यालय की विकास यात्रा, शैक्षणिक गुणवत्ता व भविष्य सार्थक विचार मंथन रहा।
कुलपति ने नियमित उपस्थिति और अनुशासन को अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि यहां छात्र केवल डिग्रीधारी नहीं बल्कि सीखने वाले, उत्कृष्ट खिलाड़ी और खेल संस्कृति के संवाहक बनेंगे। उन्होंने नकल और अनुचित साधनों के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति को दोहराया।
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शिक्षक, कोच और छात्रों को नवाचार की दिशा में निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा देते हुए विश्वविद्यालय की ब्रांडिंग और सकारात्मक छवि निर्माण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने बीते वर्षों में कई ठोस कदम उठाए हैं। इन्हीं के परिणामस्वरूप खेल विश्वविद्यालय हरियाणा आज देश का तीसरा सबसे बड़ा खेल विश्वविद्यालय है।
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इस प्रगति में मोतीलाल नेहरू स्पोर्ट्स स्कूल (एमएनएसएस) की वर्षों पुरानी प्रतिष्ठा, अनुशासन और अनुभव काम आया। उन्होंने विश्वविद्यालय की धारणा और ब्रांड बिल्डिंग पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की उत्कृष्टता कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है।
इनमें विद्यार्थियों की गुणवत्ता, शिक्षण एवं कोचिंग की गुणवत्ता, आधारभूत संरचना, शैक्षणिक नियमितता, परीक्षा प्रणाली और शोध एवं नवाचार की संस्कृति प्रमुख हैं।