फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sonipat News ›   Special on Teachers' Day: Became a teacher after getting education from a government school, now improving the lives of children

शिक्षक दिवस पर विशेष : राजकीय स्कूल से शिक्षा ग्रहण कर बने शिक्षक, अब संवार रहे बच्चों का जीवन

Thu, 05 Sep 2024 05:34 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Thu, 05 Sep 2024 05:34 AM IST
विज्ञापन
Special on Teachers' Day: Became a teacher after getting education from a government school, now improving the lives of children
सोनीपत। सरकारी स्कूलों को लेकर लोगों की धारणाएं ज्यादा बेहतर नहीं है। अधिकतर लोग अपने बच्चों काे निजी स्कूलों में ही शिक्षा दिलवाने को प्राथमिकता देते हैं। जिले में काफी शख्सियतेें ऐसी भी हैं, जो इस धारणा के विपरीत न सिर्फ राजकीय स्कूलों में पढ़े, बल्कि अपने लिए एक अलग मुकाम भी बनाया। इन्हीं में से एक हैं सहायक परियोजना समन्वयक (एपीसी) रूपेंद्र पूनिया। इन्होंने गांव के राजकीय स्कूल से शिक्षा ग्रहण की और शिक्षक बने। रूपेंद्र पूनिया आज शिक्षा विभाग में बतौर एपीसी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
विज्ञापन

एपीसी रूपेंद्र पूनिया ने बताया कि उनका जन्म 23 जून 1978 को गोहाना के गांव बिचपड़ी में हुआ। गांव के ही राजकीय स्कूल से 12वीं कक्षा तक की पढ़ाई की। रोहतक से आर्ट एंड क्राफ्ट का दो साल का डिप्लोमा किया। जिसके बाद साल 1997 में 89 दिनों के लिए शिक्षा विभाग में नौकरी मिल गई। साल 1998 में वह नियमित हुए। उनकी पहली पोस्टिंग करनाल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय राहड़ा में हुई, जहां नौ साल रहे। साल 2007 में पदोन्नती मिली। वह महमुदपुर स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बतौर अंग्रेजी प्राध्यापक गए। वहां पांच साल तक रहे और विद्यार्थियों को अंग्रेजी विषय में पारंगत बनाने का काम किया। वह दो साल डायट बीसवांमील, पांच साल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय जटवाड़ा और एक साल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बेगा में रहे। उन्होंने बतौर शिक्षक राजकीय स्कूलों के विद्यार्थियों का जीवन संवारने का काम किया है। साथ ही मास्टर ट्रेनर के रूप में शिक्षकों को खेल-खेल में पढ़ाने के बेहतर तरीके सुझाए।
विज्ञापन

साल 2020 में समग्र शिक्षा में बने एपीसी
रूपेंद्र पूनिया बताते हैं कि साल 2020 में समग्र शिक्षा में बतौर सहायक परियोजना समन्वयक उनका तबादला पानीपत किया गया। वहां एक साल तक रहे। जनवरी 2021 में पानीपत से सोनीपत तबादला हो गया। रूपेंद्र बताते हैं कि उन्हें पढ़ने का शौक था। नौकरी पर रहते हुए उन्होंने पत्राचार के माध्यम से बीए, बीएड, एमएम, एमएड की पढ़ाई की। उन्होंने कहा कि दिल में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो कोई भी बाधा आपका रास्ता नहीं रोक सकती। बस जरूरत है लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए कठोर परीश्रम करने की।
विज्ञापन
विज्ञापन

बेहतर चित्रकार व लेखक भी हैं पूनिया

रूपेंद्र पूनिया एक शिक्षक होने के साथ ही बेहतर चित्रकार व लेखक भी हैं। पेंटिंग करने का शौक बचपन से है। उनकी बनाई पेंटिंग अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए भी गई थी। उन्होंने अनेक कविताएं भी लिखी हैं। उनकी बनाई पेंटिंग समाज को आइना दिखाने का काम करती हैं। वह जल्द ही अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाने पर विचार कर रहे हैं। इसी वर्ष फरवरी माह में सूरजकुंड मेले में उन्होंने मध्य प्रदेश की गोंद आर्ट बनाते हुए वहां की लोककला को प्रदर्शित किया था। इस पेंटिंग को लोककला एवं संस्कृति विभाग की तरफ से 21 हजार रुपये प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया था। रूपेंद्र पूनिया आज विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed