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खजूर के पेड़ सूख गए, फिर भी कर दी तीन लाख रुपये की पेमेंट
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
Updated Wed, 05 Apr 2017 12:46 AM IST
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बहालगढ़ रोड पर सूखे पड़े खजूर के पेड़
- फोटो : bureau
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शहर के सौंदर्यीकरण के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। पाम की जगह खजूर के पेड़ लगवा दिए गए। इतना ही नहीं उनके सूखने के बावजूद ठेकेदार को लाखों रुपये की पेमेंट तक कर दी गई, जबकि निगम के अधिकारी ठेकेदार की पेमेंट रोकने का दावा कर रहे थे। अब निगम अधिकारी खुद मान रहे हैं कि ठेकेदार को तीन लाख रुपये दे दिए गए, लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि अगर खजूर के पेड़ दोबारा से हरे नहीं होते है तो ठेकेदार को एक रुपया भी नहीं दिया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ठेकेदार को तीन लाख रुपये की पेमेंट कैसे कर दी गई और तीन महीने बाद भी पेड़ हरे नहीं होने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। इस पर कोई भी अधिकारी बोलने के लिए तैयार नहीं है, क्योंकि इस मामले में नगर निगम के अधिकारियों के खेल की पोल खुल गई है।
हरा होने के बाद दी जानी थी पेमेंट
नगर निगम की ओर से शहर के सौंदर्यीकरण के लिए 27 लाख रुपये का ठेका छोड़ा गया था। इसमें सभी सेक्टरों की सड़कों के बीच डिवाइडर पर सौंदर्यीकरण के लिए पेड़ लगाए जाने थे, लेकिन इसमें सबसे बड़ा खेल यह किया गया कि सेक्टर 23, सेक्टर 14-15 की डिवाइडर रोड आदि जगहों पर पाम की जगह खजूर के पेड़ लगा दिए गए। वह भी छोटे पेड़ नहीं लगाए गए, बल्कि बड़े पेड़ किसी अन्य जगह से उखाड़कर लाए गए। वह पेड़ काफी बड़े होने के कारण उखाड़ने के बाद दोबारा लगाने पर हरे नहीं हो सके। इनको लगाए हुए तीन माह से ज्यादा समय हो गया है। वहीं पाम की जगह खजूर के पेड़ लगाए जाने पर हंगामा शुरू हुआ तो शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन से लेकर नगर निगम के अधिकारियों तक ने ठेकेदार की पेमेंट रोकने के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने खुद ही उन दावों की पोल खोल दी। नगर निगम के कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह ठेका 27 लाख रुपये का छोड़ा गया था और जिन पेड़ों को लगाया गया है, उनके पूरी तरह से हरे होने के बाद ही पेमेंट की जानी है। इसके बावजूद ठेकेदार को तीन लाख रुपये की पेमेंट फिर भी कर दी गई, जिससे नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए है। कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा का कहना है कि ठेकेदार को बाकी पेमेंट तब दी जाएगी, जब वह पेड़ हरे हो जाएंगे और वह बढ़ने लगेंगे।
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हरा होने के बाद दी जानी थी पेमेंट
नगर निगम की ओर से शहर के सौंदर्यीकरण के लिए 27 लाख रुपये का ठेका छोड़ा गया था। इसमें सभी सेक्टरों की सड़कों के बीच डिवाइडर पर सौंदर्यीकरण के लिए पेड़ लगाए जाने थे, लेकिन इसमें सबसे बड़ा खेल यह किया गया कि सेक्टर 23, सेक्टर 14-15 की डिवाइडर रोड आदि जगहों पर पाम की जगह खजूर के पेड़ लगा दिए गए। वह भी छोटे पेड़ नहीं लगाए गए, बल्कि बड़े पेड़ किसी अन्य जगह से उखाड़कर लाए गए। वह पेड़ काफी बड़े होने के कारण उखाड़ने के बाद दोबारा लगाने पर हरे नहीं हो सके। इनको लगाए हुए तीन माह से ज्यादा समय हो गया है। वहीं पाम की जगह खजूर के पेड़ लगाए जाने पर हंगामा शुरू हुआ तो शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन से लेकर नगर निगम के अधिकारियों तक ने ठेकेदार की पेमेंट रोकने के बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने खुद ही उन दावों की पोल खोल दी। नगर निगम के कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा ने कहा कि यह ठेका 27 लाख रुपये का छोड़ा गया था और जिन पेड़ों को लगाया गया है, उनके पूरी तरह से हरे होने के बाद ही पेमेंट की जानी है। इसके बावजूद ठेकेदार को तीन लाख रुपये की पेमेंट फिर भी कर दी गई, जिससे नगर निगम अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए है। कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा का कहना है कि ठेकेदार को बाकी पेमेंट तब दी जाएगी, जब वह पेड़ हरे हो जाएंगे और वह बढ़ने लगेंगे।
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