{"_id":"58922e694f1c1bc24ee81691","slug":"sonipat-property-tax-bil-for-agriculture-land","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेती की जमीन पर भेजा 1.98 लाख प्रापर्टी टैक्स का बिल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेती की जमीन पर भेजा 1.98 लाख प्रापर्टी टैक्स का बिल
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
Updated Thu, 02 Feb 2017 12:22 AM IST
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प्रापर्टी टेक्स का भेजा गया गलत बिल दिखाता सतपाल
- फोटो : bureau
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शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के पति व भाजपा मीडिया प्रदेश प्रभारी राजीव जैन ने भले ही गांवों में प्रापर्टी टैक्स बिल नहीं वसूले जाने का दावा किया हो, लेकिन यहां नगर निगम की लापरवाही के कारण रिहायशी जमीन ही नहीं, बल्कि खेती की जमीनों का लाखों में प्रापर्टी टैक्स बिल भेजा जा रहा है। नगर निगम की ओर से केवल यही कारनामा नहीं किया जा रहा है, बल्कि जमीन को अपने रिकार्ड में खुद ही बढ़ा दिया गया है। इससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है और उनको बिना वजह नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ रहे है। हालांकि निगम कमिश्नर ने इसे सर्वे करने वाली प्राइवेट कंपनी की गलती बताया है और किसी को गलत बिल मिल रहा है तो उसे ठीक कराने की बात कही है।
रिकार्ड में जमीन भी एक एकड़ खुद ही बढ़ा डाली
कुमासपुर गांव में जीटी रोड पर अमीर चंद सूरी की लगभग 2.75 एकड़ जमीन है। इस पर खेती की जाती है और वहां खेती करने के लिए यूपी के इटावा का सतपाल नौकर रहता है। उस खेती की जमीन का नगर निगम की ओर से वर्ष 2016-17 का 1 लाख 98 हजार रुपये का प्रापर्टी टैक्स बिल भेज दिया गया। इतना बिल देखकर जमीन मालिक चौंक गए क्योंकि वहां केवल नौकर के रहने के लिए एक कमरा बनाया गया है, जबकि बाकी जमीन पर खेती की जा रही है। निगम की ओर से केवल इतनी ही लापरवाही नहीं की गई है, बल्कि उनकी जमीन को अपने रिकार्ड में 3.75 एकड़ दिखा दिया गया। इस कारण ही उनको बिल ठीक कराने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह अकेला ऐसा मामला नहीं है, जिसमें इस तरह की लापरवाही की गई है। बल्कि गांवों के अधिकतर बिल इस तरह ही बनाए गए हैं, जिसमें किसी के एक मंजिल मकान को दो मंजिल दिखा दिया गया है तो किसी की प्रापर्टी ज्यादा दिखाकर बिल तैयार कर दिया गया। 3 हजार से ज्यादा लोग अभी तक अपने बिल ठीक करा चुके हैं, लेकिन बिलों की कमियां दूर नहीं हो रही हैं।
इस पर निगम कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा का कहना है कि प्रापर्टी टैक्स के लिए सर्वे प्राइवेट कंपनी से कराया गया था। इस कारण बिलों में कमियां हो रही हैं और पहली बार ऐसा होने के कारण परेशानी ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी के बिल में दिक्कत है तो वह नगर निगम कार्यालय में जाकर उसे ठीक करा सकता है, जिसमें कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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गांवों से वसूला जाएगा प्रापर्टी टैक्स : कमिश्नर
नगर निगम के कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा ने कहा है कि जिनके यहां गलत बिल पहुंच रहा है उसे तो सही करा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है कि गांवों से प्रापर्टी टैक्स वसूला ही नहीं जाएगा। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और न ही ऐसा कोई आदेश आया है, जिससे टैक्स वसूली की प्रक्रिया को रोका जाए। उनका कहना है कि सरकार इस तरह का कोई आदेश करती है तो प्रापर्टी टैक्स छोड़ दिया जाएगा और ऐसा कोई आदेश नहीं आता है तो वसूली जारी रखी जाएगी क्योंकि प्रापर्टी टैक्स वसूली के सहारे ही उन जगहों का विकास कराया जाएगा और उसका उन लोगों को फायदा मिलेगा जो प्रापर्टी टैक्स जमा करते हैं।
राजीव जैन ने एक दिन पहले किया था टैक्स माफी का दावा
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के पति व भाजपा मीडिया प्रदेश प्रभारी राजीव जैन ने मंगलवार को ग्रामीणों के सामने यह दावा किया था कि उनसे प्रापर्टी टैक्स नहीं वसूला जाएगा, लेकिन इस तरह के कोई आदेश सरकार की ओर से नहीं आने पर ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। इससे साफ हो गया है कि नगर निगम के तहत आने वाले गांवों के लोगों को अभी प्रापर्टी टैक्स में कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
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रिकार्ड में जमीन भी एक एकड़ खुद ही बढ़ा डाली
कुमासपुर गांव में जीटी रोड पर अमीर चंद सूरी की लगभग 2.75 एकड़ जमीन है। इस पर खेती की जाती है और वहां खेती करने के लिए यूपी के इटावा का सतपाल नौकर रहता है। उस खेती की जमीन का नगर निगम की ओर से वर्ष 2016-17 का 1 लाख 98 हजार रुपये का प्रापर्टी टैक्स बिल भेज दिया गया। इतना बिल देखकर जमीन मालिक चौंक गए क्योंकि वहां केवल नौकर के रहने के लिए एक कमरा बनाया गया है, जबकि बाकी जमीन पर खेती की जा रही है। निगम की ओर से केवल इतनी ही लापरवाही नहीं की गई है, बल्कि उनकी जमीन को अपने रिकार्ड में 3.75 एकड़ दिखा दिया गया। इस कारण ही उनको बिल ठीक कराने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। यह अकेला ऐसा मामला नहीं है, जिसमें इस तरह की लापरवाही की गई है। बल्कि गांवों के अधिकतर बिल इस तरह ही बनाए गए हैं, जिसमें किसी के एक मंजिल मकान को दो मंजिल दिखा दिया गया है तो किसी की प्रापर्टी ज्यादा दिखाकर बिल तैयार कर दिया गया। 3 हजार से ज्यादा लोग अभी तक अपने बिल ठीक करा चुके हैं, लेकिन बिलों की कमियां दूर नहीं हो रही हैं।
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इस पर निगम कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा का कहना है कि प्रापर्टी टैक्स के लिए सर्वे प्राइवेट कंपनी से कराया गया था। इस कारण बिलों में कमियां हो रही हैं और पहली बार ऐसा होने के कारण परेशानी ज्यादा हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी के बिल में दिक्कत है तो वह नगर निगम कार्यालय में जाकर उसे ठीक करा सकता है, जिसमें कोई परेशानी नहीं आने दी जाएगी।
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गांवों से वसूला जाएगा प्रापर्टी टैक्स : कमिश्नर
नगर निगम के कमिश्नर वीरेंद्र हुड्डा ने कहा है कि जिनके यहां गलत बिल पहुंच रहा है उसे तो सही करा दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है कि गांवों से प्रापर्टी टैक्स वसूला ही नहीं जाएगा। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है और न ही ऐसा कोई आदेश आया है, जिससे टैक्स वसूली की प्रक्रिया को रोका जाए। उनका कहना है कि सरकार इस तरह का कोई आदेश करती है तो प्रापर्टी टैक्स छोड़ दिया जाएगा और ऐसा कोई आदेश नहीं आता है तो वसूली जारी रखी जाएगी क्योंकि प्रापर्टी टैक्स वसूली के सहारे ही उन जगहों का विकास कराया जाएगा और उसका उन लोगों को फायदा मिलेगा जो प्रापर्टी टैक्स जमा करते हैं।
राजीव जैन ने एक दिन पहले किया था टैक्स माफी का दावा
शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के पति व भाजपा मीडिया प्रदेश प्रभारी राजीव जैन ने मंगलवार को ग्रामीणों के सामने यह दावा किया था कि उनसे प्रापर्टी टैक्स नहीं वसूला जाएगा, लेकिन इस तरह के कोई आदेश सरकार की ओर से नहीं आने पर ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। इससे साफ हो गया है कि नगर निगम के तहत आने वाले गांवों के लोगों को अभी प्रापर्टी टैक्स में कोई राहत नहीं मिलने वाली है।