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चला गया रागिनी और अखाड़े का मास्टर

Tue, 19 Jul 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत Updated Tue, 19 Jul 2016 12:15 AM IST
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अपने गुरु सतवीर के साथ पहलवान योगेश्वर दत्त - फोटो : bureau
सूर्यकवि पंडित लखमीचंद के बाद हरियाणवी संस्कृति के स्तम्भ और रागनी गायकों के सिरमौर मास्टर सतबीर सिंह का सोमवार को 66 वर्ष की उम्र में उनके पैतृक गांव भैंसवाल कलां में निधन हो गया। वे गुर्दों की बीमारी से पीड़ित थे और पिछले तीन माह से डायलिसिस पर थे। मास्टर सतबीर ने गायकी में ही नाम नहीं कमाया बल्की वो अखाड़े में पहवानों को भी तैयार करते थे। ओलंपिक  पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने उनसे ही पहलवानी के गुर सीखे। उनके निधन का समाचार सुनते ही योगश्वर दत्त सहित प्रदेश भर के रागिनी गायक और इस फन के रसिक शोक में डूब गए। दोपहर करीब 12 बजे सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में योगेश्वर दत्त ने गांव में ही अपने खाली प्लॉट में परिजनों, ग्रामीणों के साथ मिलकर अपने गुरु का अंतिम संस्कार किया। एक दिन पहले ही योगी मास्टर सतबीर से रियो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने का आशीर्वाद लिया था।
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मास्टर सतबीर का जन्म 13 अप्रैल 1951 में गांव भैंसवाल कलां में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ था। मास्टर जी के संबंधी तारीफ शर्मा ने बताया कि उन्होंने युवावस्था में गांव में अखाड़ा खोला और अच्छे पहलवान तैयार किए जो ओलम्पिक खेलों तक पहुंचे। इनमें पहलवान योगेश्वर दत्त भी शामिल हैं। वह खुद ऐसे पहलवान थे कि कभी भी नहीं हारे। उन्होंने छोटी उम्र में ही रागनी गानी शुरू की और लगातार आगे बढ़ते ही रहे। उनकी एक खासियत यह भी थी कि कभी महिला कलाकारों के साथ नही गाया। वह गायक और पहलवान के साथ-साथ एक शिक्षक भी थे। वह चार भाई सूरजभान, उम्मेद सिंह, प्रेमसिंह, राममेहर और एक बहन सावित्री से छोटे थे। जबकि एक बहन राजकौर उनसे छोटी है। ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने गांव जौली के राजकीय स्कूल में पीटीआई की नौकरी शुरू की। इसलिए उन्हें मास्टर कहा जाना लगा। वर्ष 2009 में वह सेवानिवृत्त हो गए। मास्टर सतबीर का एक लड़का संदीप उर्फ काला, दो लड़की ममता और राखी हैं। संदीप तीन साल से अपने पिता की विरासत संभाल रहा है।
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