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नगर निगम और हुडा के बीच लटका सेक्टरों का विकास

Wed, 15 Feb 2017 11:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत।
अमर उजाला ब्यूरो सोनीपत। Updated Wed, 15 Feb 2017 11:50 PM IST
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सेक्टर-12 में स्थित पार्क में टूटे पड़े झूले। - फोटो : bureau
हुडा ने विकास के लिए नगर निगम को कई सेक्टर भले ही सौंप दिए, लेकिन अभी तक विकास कराने को एक भी पैसा नहीं दिया गया है। इससे सेक्टरों में काफी समय से विकास कार्य अटके हुए हैं। किसी जगह सीवर लाइन ब्लाक होने से दूषित पानी भर गया है तो सेक्टरों के अधिकतर पार्कों की हालत बदतर हो गई है। वहीं, समय पर सफाई न होने के कारण सेक्टर के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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जिले में सेक्टर-3, 12, 13, 14, 15, 7 व 23 हैं, जिनमें से सेक्टर 12, 14, 15 को नगर निगम के हवाले किया गया, जो अगस्त में निगम के पास जा चुके हैं। वहीं, अब 13 व 23 सेक्टर को निगम के सुपुर्द करने की तैयारी है। इन सेक्टरों की सफाई व्यवस्था, पार्कों को ठीक कराने व स्ट्रीट लाइटों की देखरेख करने की जिम्मेदारी निगम तो सीवर व पेयजल व्यवस्था की जिम्मेदारी पब्लिक हेल्थ को दी गई है। सेक्टर 12, 14 व 15 को निगम को सौंपे हुए छह महीने बीतने के बावजूद हुडा ने इनमें विकास कार्य कराने के लिए एक भी रुपया अभी तक निगम को नहीं दिया है। इससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है और सेक्टरों में हालत बदतर होती जा रही है।
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दोनों विभागों की बैठकों में उलझे विकास कार्य
सेक्टरों का विकास कराने के लिए हुडा व निगम के अधिकारियों में जनवरी व फरवरी माह में दो बैठक हो चुकी हैं। हुडा की ओर से सफाई, पार्क, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के लिए तीन सेक्टर निगम को सौंपे जा चुके हैं तो दो सौंपने अभी बाकी है। इनमें विकास के लिए हुई दोनों बैठक बेनतीजा रही। इसके चलते सेक्टरों के लोगों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
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सफाई से लेकर पेयजल व्यवस्था बदतर
सेक्टर-12 रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एस काकराण ने बताया कि सेक्टर में काफी समय से सफाई से लेकर पेयजल व्यवस्था तक हालात बदतर है। कई बार सेक्टर में पीने का गंदा पानी भी आता है क्योंकि खान कॉलोनी की सड़क हमेशा टूटी रहती है। सड़क टूटने के कारण पेयजल की पाइप लाइन भी टूट जाती है, जिससे गंदा पानी सप्लाई होता है। सेक्टर में करीब 30 सफाई कर्मियों की जरूरत है, लेकिन 10 कर्मचारी ही सफाई के लिए आते हैं। वह भी पूरी तरह से सफाई न कर वापस चले जाते हैं। इसके अलावा सेक्टर में एक सामुदायिक केंद्र बना हुआ है। इसके आसपास हर समय गंदा पानी भरा रहता है। इसका मुख्य कारण समय पर सीवरों की सफाई न होना है। सेक्टरों की कई सड़के भी टूटी हुई हैं।
कार्यालयों के चक्कर काटकर हुए परेशान
सेक्टर-15 रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान केएस सांगवान ने बताया कि जब से सेक्टर बसा है, तभी से समस्याओं की भरमार है। सेक्टर में लोगों को पानी देने के लिए विभाग द्वारा छह ट्यूबवेल लगाए हैं। इनमें से दो या तीन ट्यूबवैल अधिकतर खराब ही रहते हैं। बरसात के पानी निकासी के लिए पाइप लाइन दबा दी गई, लेकिन वह कूड़ा भरने से बंद हो चुकी है। सीवरों की सफाई साल में एक बार होती है। जिससे हर दूसरे दिन सड़कों पर पानी जमा होता है। हर साल ठेकेदार को बुलाकर सीवरों की सफाई करवानी पड़ती है। वहीं पार्कों के हालात भी बदतर हैं। पहले यह कार्य हुडा कार्यालय में जाते ही हो जाते थे, लेकिन निगम में जाने के बाद उनकी समस्या दूर नहीं होती है, बल्कि कार्यालय के चक्कर काटकर परेशानी झेलनी पड़ती है।
पार्कों की टूटी पड़ी हैं दीवारें
सेक्टर-14 रेजीडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के उप-प्रधान सुरेंद्र मदान ने कहा कि सेक्टर में करीब 24 पार्क हैं। इनमें से कई महीनों से अधिकतर पार्कों की दीवारें टूटी पड़ी हैं। इसके चलते इन पार्कों में पशु बैठे रहते हैं। वहीं ग्रिल भी रिपेयर नहीं हुई है। सेक्टर में सीवरों की मुख्य समस्या है। बारिश होते ही सड़कों पर लगभग दो फीट तक पानी जमा हो जाता है। इसका प्रशासन की तरफ कोई ध्यान नहीं है। इसके अलावा सेक्टर की मेन मार्केट में सड़के टूटी हुई हैं, जिनमें पानी जमा रहता है। इसके कारण आसपास के दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बजट की कमी के कारण नहीं दिया जा रहा निगम को पैसा
विभाग की ओर से तीन सेक्टर 12,14 व 15 को निगम को सौंपा जा चुका है। अब सेक्टर 13 व 23 निगम को सौंपने जा रहे हैं। सेक्टरों में हुडा के काफी प्लॉट खाली पड़े हैं, जिनकी कीमत ज्यादा होने के कारण बोली नहीं हो रही। इससे विभाग बजट की मार झेल रहा है। बजट न होने के कारण विभाग निगम को पैसे नहीं दे पा रहा है। सेक्टरों को विकास के कार्यों के लिए दो बार बैठक हो चुकी है। अंतिम बैठक जल्द ही होगी। इसके बाद सेक्टरों का विकास कार्य शुरू होंगे।
देवेंद्र मलिक, एसडीओ हुडा
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