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19 और बच्चे निकाले, चपरासी की गई नौकरी
अमर उजाला/ ब्यूरो, सोनीपत
Updated Wed, 18 May 2016 01:02 AM IST
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- फोटो : sonepat
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नियम 134-ए के तहत दाखिले की मांग 19 बच्चों और एक चपरासी पर भारी पड़ गई। अलग-अलग स्कूलों के इन 19 बच्चों को निकाल दिया गया। दूसरी ओर, चपरासी के पद पर काम कर रही महिला को भी इसीलिए नौकरी हटा दिया, क्योंकि उनके बच्चों का भी ड्रॉ में नाम आया था और वह दाखिला मांग रही थी। 19 बच्चों सहित यह महिला और अन्य अभिभावक मंगलवार को सुबह लेकर शाम तक एडीसी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे। पूरा दिन यही सूचना दी गई कि चंडीगढ़ में निजी स्कूल संचालकों और सरकार के बीच बैठक चल रही है। हालांकि, देर शाम एडीसी कार्यालय से सूचना दी गई कि निजी स्कूल संचालकों और सरकार के बीच बातचीत सफल हो गई है और बुधवार से उन बच्चों का दाखिला दिया जाएगा, जोकि लर्निंग लेवल टेस्ट में सफल रहे थे।
बता दें कि सोनीपत जिले के 6 हजार बच्चों में से 1753 बच्चे ने ही परीक्षा उत्तीर्ण की थी। पांच मई को आए इस टेस्ट के रिजल्ट के बाद से ही नियम को लेकर विवाद बना हुआ है। सप्ताह भर तक निजी स्कूल संचालकों ने विरोध जताते हुए स्कूल बंद रखे। वहीं, छात्र अभिभावक संघ और हरियाणा अभिभावक मंच के बैनर तले आंदोलन जारी रखा।
मंगलवार को अलग-अलग स्कूलों के 19 बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया था। ये वे बच्चे थे, जिन्होंने नियम 134-ए के तहत आवेदन कर रखा था। इसमें टीकाराम मॉडर्न स्कूल से आठ, ज्ञान गंगा मोंटेसरी स्कूल से चार, हिंदू विद्यापीठ से दो, सरस्वती स्कूल से तीन, एसके बाल विकास के दो बच्चे शामिल हैं। सभी बच्चे अपने अभिभावकों के साथ मंगलवार को छात्र अभिभावक संघ के बैनर तले एडीसी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए थे। धरना सुबह से लेकर शाम तक जारी रहा। शाम को एडीसी कार्यालय से आश्वासन के बाद ही अभिभावक उठे।
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बच्चों के अलावा टीकाराम मॉडर्न स्कूल में एक चपरासी को भी नौकरी से निकाल दिया गया। पीड़िता पिंकी ने बताया कि उसके बच्चों ने भी नियम 134-ए के तहत आवेदन किया था। रिजल्ट के बाद टीकाराम मॉडर्न स्कूल अलॉट हुआ था। पहले भी बच्चे वहीं पढ़ रहे थे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद स्कूल ने बच्चों को निकाल दिया। आरोप लगाया कि जब उसने इस मामले की शिकायत पुलिस को दी तो स्कूल संचालक ने उसे नौकरी से हटा दिया।
पुलिस भेजकर बिठाए चार बच्चे
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने बताया कि थाना सिविल लाइन प्रभारी अजायब सिंह को स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों को निकालने की शिकायत दी गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में पड़ने वाले स्कूल संचालकों के पास पुलिस कर्मी भेज कर बच्चे बिठाए। इसके तहत एसके बाल विकास स्कूल तथा ज्ञान गंगा स्कूल के दो-दो बच्चों को स्कूल में बिठवाया गया।
18 अप्रैल को रोका, 1 मई को टेस्ट, 5 को रिजल्ट
बता दें कि नियम 134-ए के तहत कुल 6518 विद्याथयों ने आवेदन किया था। इनका पहले 18 अप्रैल को ड्रा होना था। ऐन ड्रा के मौके पर ड्रा कैंसल कर दिया गया था और फिर 1 मई को लृनग लेवल टेस्ट का दिन निर्धारित किया गया था। टेस्ट में 5263 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे तथा 1255 विद्यार्थियों अनुपस्थित रहे थे। 5 मई को जब टेस्ट का रिजल्ट घोषित किया गया तो उसमें जिले के 1753 विद्यार्थी 55 प्रतिशत अंक लेकर परीक्षा में क्वालीफाई कर पाए थे। इनमें सबसे अधिक सोनीपत ब्लॉक से 1185 विद्यार्थी उतीर्ण हुए। गोहाना ब्लॉक से 240 विद्यार्थी, गन्नौर ब्लॉक से 95 विद्यार्थी, राई ब्लॉक से 70 विद्यार्थी, खरखौदा ब्लॉक से 64 विद्यार्थी, मुंडलाना ब्लॉक से 62 विद्यार्थी और कथूरा ब्लॉक से 37 विद्यार्थी शामिल थे। क्वालीफाई विद्याथयों में से 199 राजकीय स्कूलों में और 1554 प्राईवेट स्कूलों में पढ़ते थे।
18 वाला ड्रॉ रोका था, उसे माना जाए : संघ
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने कहा कि उनकी मांगें वही हैं, जिसमें 18 अप्रैल को आने वाले ड्रॉ को जारी किया जाए, नहीं तो सरकार दोबारा टेस्ट लें ताकि वंचित विद्यार्थी भी लाभ उठा सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो वे सरकार को वादा याद दिलवाने के लिए फिर से चंडीगढ़ की ओर रुख करेंगे।
पहले इन्हें दिलवाएंगे दाखिले, फिर दूसरों के लिए आंदोलन : मंच
हरियाणा अभिभावक मंच के सचिव राजीव वर्मा ने बताया कि सरकार पहले तो इन बच्चों का दाखिला करे। उसके बाद जो वंचित रह गए हैं, उनके लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। हमारी मांग है कि 18 अप्रैल वाले ड्रॉ को ही मान्य करते हुए लर्निंग लेवल टेस्ट को रद्द किया जाए और सभी बच्चों को नियम 134-ए का फायदा मिलना चाहिए।
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बता दें कि सोनीपत जिले के 6 हजार बच्चों में से 1753 बच्चे ने ही परीक्षा उत्तीर्ण की थी। पांच मई को आए इस टेस्ट के रिजल्ट के बाद से ही नियम को लेकर विवाद बना हुआ है। सप्ताह भर तक निजी स्कूल संचालकों ने विरोध जताते हुए स्कूल बंद रखे। वहीं, छात्र अभिभावक संघ और हरियाणा अभिभावक मंच के बैनर तले आंदोलन जारी रखा।
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मंगलवार को अलग-अलग स्कूलों के 19 बच्चों को स्कूल से निकाल दिया गया था। ये वे बच्चे थे, जिन्होंने नियम 134-ए के तहत आवेदन कर रखा था। इसमें टीकाराम मॉडर्न स्कूल से आठ, ज्ञान गंगा मोंटेसरी स्कूल से चार, हिंदू विद्यापीठ से दो, सरस्वती स्कूल से तीन, एसके बाल विकास के दो बच्चे शामिल हैं। सभी बच्चे अपने अभिभावकों के साथ मंगलवार को छात्र अभिभावक संघ के बैनर तले एडीसी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए थे। धरना सुबह से लेकर शाम तक जारी रहा। शाम को एडीसी कार्यालय से आश्वासन के बाद ही अभिभावक उठे।
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बच्चों के अलावा टीकाराम मॉडर्न स्कूल में एक चपरासी को भी नौकरी से निकाल दिया गया। पीड़िता पिंकी ने बताया कि उसके बच्चों ने भी नियम 134-ए के तहत आवेदन किया था। रिजल्ट के बाद टीकाराम मॉडर्न स्कूल अलॉट हुआ था। पहले भी बच्चे वहीं पढ़ रहे थे। लेकिन रिजल्ट आने के बाद स्कूल ने बच्चों को निकाल दिया। आरोप लगाया कि जब उसने इस मामले की शिकायत पुलिस को दी तो स्कूल संचालक ने उसे नौकरी से हटा दिया।
पुलिस भेजकर बिठाए चार बच्चे
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने बताया कि थाना सिविल लाइन प्रभारी अजायब सिंह को स्कूल संचालकों द्वारा बच्चों को निकालने की शिकायत दी गई थी। इसके बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में पड़ने वाले स्कूल संचालकों के पास पुलिस कर्मी भेज कर बच्चे बिठाए। इसके तहत एसके बाल विकास स्कूल तथा ज्ञान गंगा स्कूल के दो-दो बच्चों को स्कूल में बिठवाया गया।
18 अप्रैल को रोका, 1 मई को टेस्ट, 5 को रिजल्ट
बता दें कि नियम 134-ए के तहत कुल 6518 विद्याथयों ने आवेदन किया था। इनका पहले 18 अप्रैल को ड्रा होना था। ऐन ड्रा के मौके पर ड्रा कैंसल कर दिया गया था और फिर 1 मई को लृनग लेवल टेस्ट का दिन निर्धारित किया गया था। टेस्ट में 5263 विद्यार्थी परीक्षा में बैठे तथा 1255 विद्यार्थियों अनुपस्थित रहे थे। 5 मई को जब टेस्ट का रिजल्ट घोषित किया गया तो उसमें जिले के 1753 विद्यार्थी 55 प्रतिशत अंक लेकर परीक्षा में क्वालीफाई कर पाए थे। इनमें सबसे अधिक सोनीपत ब्लॉक से 1185 विद्यार्थी उतीर्ण हुए। गोहाना ब्लॉक से 240 विद्यार्थी, गन्नौर ब्लॉक से 95 विद्यार्थी, राई ब्लॉक से 70 विद्यार्थी, खरखौदा ब्लॉक से 64 विद्यार्थी, मुंडलाना ब्लॉक से 62 विद्यार्थी और कथूरा ब्लॉक से 37 विद्यार्थी शामिल थे। क्वालीफाई विद्याथयों में से 199 राजकीय स्कूलों में और 1554 प्राईवेट स्कूलों में पढ़ते थे।
18 वाला ड्रॉ रोका था, उसे माना जाए : संघ
छात्र अभिभावक संघ के संयोजक विमल किशोर ने कहा कि उनकी मांगें वही हैं, जिसमें 18 अप्रैल को आने वाले ड्रॉ को जारी किया जाए, नहीं तो सरकार दोबारा टेस्ट लें ताकि वंचित विद्यार्थी भी लाभ उठा सकें। अगर ऐसा नहीं होता तो वे सरकार को वादा याद दिलवाने के लिए फिर से चंडीगढ़ की ओर रुख करेंगे।
पहले इन्हें दिलवाएंगे दाखिले, फिर दूसरों के लिए आंदोलन : मंच
हरियाणा अभिभावक मंच के सचिव राजीव वर्मा ने बताया कि सरकार पहले तो इन बच्चों का दाखिला करे। उसके बाद जो वंचित रह गए हैं, उनके लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। हमारी मांग है कि 18 अप्रैल वाले ड्रॉ को ही मान्य करते हुए लर्निंग लेवल टेस्ट को रद्द किया जाए और सभी बच्चों को नियम 134-ए का फायदा मिलना चाहिए।