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निजामपुर माजरा में कोठड़ा गिरने से छह की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
Updated Mon, 13 Jul 2015 12:48 AM IST
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आसमान से बरस रही राहत रविवार दोपहर बाद खरखौदा के गांव निजामपुर में आफत बनकर टूटी। बारिश से खेत में बना दो मंजिला एक कोठड़ा गिर गया।
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मलबे में दबने से पांच मजदूरों सहित छह लोगों की मौत हो गई और गंभीर रूप से घायल है, जिसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
निजामपुर निवासी संदीप के खेतों में बने दो मंजिला कोठड़े में बंजरिया, जिला पीलीभीत(उत्तर प्रदेश) के रहने वाले अमित और देवशरण, रोहित और सूरज सगे भाइयों के अलावा अशोक और महेश आराम कर रहे थे।
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दोपहर लगभग 2.30 बजे कोठड़े में निजामपुर का किसान बलबीर पहुंचा। बलबीर मजदूरों के साथ धान रोपाई के बारे में बातचीत ही कर रहा था कि अचानक कोठड़े के ऊपरी मंजिल की छत गिर गई।
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इससे सभी मलबे में दब गए। ग्रामीणों को सूचना मिली तो वे मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद सभी को बाहर निकाला। कम घायल सूरज को पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
जबकि अन्य को रोहतक पीजीआई ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले सभी मजदूर धान लगाने गांव आए थे।
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बलबीर को क्या पता था कि जिन मजदूरों को अपने खेतों में धान लगवाने के लिए बुलाने जा रहा है। उन्हीं मजदूरों के साथ कोठड़े पर मौत उसका रास्ता देख रही है।
अभी बलबीर को मुश्किल से 15 मिनट ही हुए थे कि कोठड़ा भरभरा के गिर गया। अगर बलबीर थोड़ी देरी से पहुंचता तो शायद उसकी तो जान बच सकती थी।
गांव निजामपुर माजरा में हुए हादसे के बाद से बलबीर का पूरा परिवार शोक में डूबा हुआ है। गांव में मातम पसरा है। तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया।
ऐसे में क्या होगा इन बच्चों को भविष्य, कैसे घर चलेगा। ये सारी सोच लोगों को थी, वहीं बलबीर के परिजनों को बस इतना पता था कि उनका बलबीर अब नहीं रहा।
40 साल के बलबीर की मौत के बाद से उसकी दो बेटियां और एक बेटे का भी रो-रोकर बुरा हाल है। बलबीर की मौत का समाचार सुनने के बाद देर शाम ही दूर-दराज से रिश्तेदार भी घर पर इकट्ठा होने लगे हैं।
काश मिल जाता थोड़ा समय
ग्रामीणों ने बताया कि जिस समय चौबारे की छत गिरी, उस समय पास में ही कुछ ग्रामीण मौजूद थे। जैसे ही ऊपर वाले चौबारे की छत गिरी, उसी समय ग्रामीणों ने कोठड़े की तरफ दौड़ लगा दी थी। लेकिन इससे पहले कि कोठड़े में बैठे बलबीर और अन्य मजदूर संभल पाते, दूसरी छत भी गिर गई। अगर ग्रामीणों को 5 मिनट भी मिल जाते तो स्थिति कुछ और हो सकती थी।
मजदूरों के परिजन भी पहुंचे थे एक बार
बताया जा रहा है कि जिन पांच मजदूरों की इस हादसे में मौत हुई है। उनके परिजन भी एक बार गांव में पहुंचे थे। हालांकि सभी लोग तो रोहतक पीजीआई में ही थी, लेकिन उनमें से चार-पांच लोग गांव में आकर मौके पर पहुंचे थे। ये लोग फरमाणा स्थित निजी अस्पताल में दाखिल घायल सूरज के पास भी गए थे।