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Sonipat News: जाट बहुल सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले में एससी मतदाता रहेंगे निर्णायक

Wed, 02 Oct 2024 04:57 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2024 04:57 AM IST
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SC voters will be decisive in the triangular contest on Jat dominated seats
संदीप कुमार
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गोहाना (सोनीपत)। इस विधानसभा सीट के समीकरण टिकट वितरण के बाद पूरी तरह से बदल गए हैं। डॉ. कपूर सिंह नरवाल को टिकट नहीं मिलने के बाद वह निर्दलीय ही मैदान में कूद गए हैं। ऐसे में इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां कांग्रेस ने निवर्तमान विधायक इंदुराज नरवाल को मैदान में उतारा है तो टिकट नहीं दिए जाने पर निर्दलीय के रूप में डॉ. कपूर सिंह नरवाल ने ताल ठोक दी है। भाजपा ने इस बार ओलंपियन योगेश्वर दत्त की जगह पूर्व सांसद किशन सिंह सांगवान के बेटे पर दांव खेला है।
बरोदा विधानसभा सीट जाट बहुल है। यहां करीब 53 फीसदी जाट मतदाता हैं। वहीं एससी वोटर 17 फीसदी से अधिक हैं। ओबीसी मतदाता करीब 14 फीसदी हैं, साथ ही 12 फीसदी ब्राह्मण मतदाता भी जीत-हार के फैसले को प्रभावित करते हैं।
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हरियाणा गठन के बाद बरोदा विधानसभा सीट पर पहली बार वर्ष 1967 में चुनाव हुए थे। तब यह सीट आरक्षित थी। वर्ष 2009 तक सीट पर दस बार चुनाव हुए। वर्ष 2009 में यह सामान्य सीट बन गई थी। इसके बाद से यहां पर कांग्रेस ही काबिज है। वर्ष 2009 के चुनाव में श्रीकृष्ण हुड्डा ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। वह इस सीट पर लगातार तीन बार विधायक बने। वर्ष 2014 और फिर 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। वर्ष 2020 में श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन के बाद यहां पर उपचुनाव कराए गए, जिसमें कांग्रेस की तरफ से इंदुराज नरवाल और भाजपा की तरफ योगेश्वर दत्त ने चुनाव लड़ा। चुनाव में इंदुराज नरवाल ने जीत दर्ज की थी। संवाद
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बरोदा सीट पर रहा कांग्रेस का दबदबा

बरोदा विधानसभा सीट कांग्रेस का दबदबा रहा है। बरोदा सीट पर अब 14 बार चुनाव हुए हैं। छह बार कांग्रेस के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है। दो-दो बार इनेलो, समता पार्टी व लोकदल, एक-एक बार हरियाणा पार्टी व समता पार्टी ने जीत दर्ज की है। बरोदा हलका में अब भाजपा का खाता नहीं खुला है और न ही कोई निर्दलीय जीत दर्ज कर सका है।




उद्योग व शिक्षा के बेहतर प्रबंध नहीं होना बड़े मुद्दे

बरोदा विधानसभा क्षेत्र में कोई बड़ा उद्योग नहीं है। ऐसे में यहां रोजगार के साधन कम हैं। ऐसे में लोग उद्योग स्थापित करने की मांग करते रहें हैं। वहीं बरोदा में शिक्षा का कोई उचित प्रबंध नहीं है। उच्च शिक्षण केंद्र नहीं होने से छात्राओं को दिक्कत आती है। लोग लगातार क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थान की मांग करते रहे हैं।
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