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Sonipat News: एससी समाज ने जुलूस निकालकर उठाई न्यायिक जांच की मांग
Mon, 13 Oct 2025 10:53 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 13 Oct 2025 10:53 PM IST
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फोटो 01: सोनीपत बस अड्डे के पास आंबेडकर पार्क में एकत्रित होकर प्रदर्शन करते एससी समाज के लोग।
सोनीपत। एडीजीपी वाई पूरण कुमार आत्महत्या मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर समस्त अनुसूचित जाति समाज के बैनर तले जिले के एससी समाज के लोग सड़क पर उतरे और रोष जताया। लोग बस अड्डे से विरोध प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे।
उन्होंने नगराधीश डॉ. अनमोल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर एडीजीपी आत्महत्या के मामले की न्यायिक जांच करने की मांग की। अधिवक्ता नकीन मेहरा ने कहा कि एडीजीपी ने अपने सुसाइड नोट में उल्लेख किया था कि उन्हें उनकी जाति के कारण बार-बार अपमानित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है।
उनका कहना था कि यह आत्महत्या सिर्फ व्यक्तिगत क्षति नहीं बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई तक फैले जातिवादी भेदभाव और उत्पीड़न की ज्वलंत मिसाल है। हवासिंह बोहत, सत्यबीर निर्माण, नरेंद्र, सत्यवान भाटिया ने मांग की कि आरोपी अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
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इस प्रकरण में एससी-एसटी एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। उच्चतम न्यायालय या राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने के मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और आरोपियों पर कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन एक अधिकारी की आत्महत्या तक सीमित नहीं बल्कि संविधान की आत्मा समानता, न्याय और गरिमा की रक्षा का संघर्ष है।
उन्होंने कहा कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर सामाजिक व प्रशासनिक परिणाम होंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
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उन्होंने नगराधीश डॉ. अनमोल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर एडीजीपी आत्महत्या के मामले की न्यायिक जांच करने की मांग की। अधिवक्ता नकीन मेहरा ने कहा कि एडीजीपी ने अपने सुसाइड नोट में उल्लेख किया था कि उन्हें उनकी जाति के कारण बार-बार अपमानित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने मानसिक रूप से प्रताड़ित किया है।
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उनका कहना था कि यह आत्महत्या सिर्फ व्यक्तिगत क्षति नहीं बल्कि भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में गहराई तक फैले जातिवादी भेदभाव और उत्पीड़न की ज्वलंत मिसाल है। हवासिंह बोहत, सत्यबीर निर्माण, नरेंद्र, सत्यवान भाटिया ने मांग की कि आरोपी अधिकारियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।
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इस प्रकरण में एससी-एसटी एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। उच्चतम न्यायालय या राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की निगरानी में निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
सीजेआई बीआर गवई पर जूता फेंकने के मामले की उच्चस्तरीय जांच हो और आरोपियों पर कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन एक अधिकारी की आत्महत्या तक सीमित नहीं बल्कि संविधान की आत्मा समानता, न्याय और गरिमा की रक्षा का संघर्ष है।
उन्होंने कहा कि अगर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर सामाजिक व प्रशासनिक परिणाम होंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।