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Sonipat News: रोडवेज के पास बसें दौड़ाने को टायर नहीं, 20 दिन से वर्कशॉप में खड़ी चार बसें
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फोटो - रोडवेज वर्कशॉप में बिना टायरों के खड़ी हुई बसें। संवाद
- फोटो : credit
गोहाना। बसों को रूटों पर दौड़ाने के लिए रोडवेज के पास टायर नहीं हैं। टायरों की कमी से रोडवेज के गोहाना सब-डिपो वर्कशॉप में बीते करीब 20 दिनों से चार बसें खड़ी हुई हैं। इससे रूटों पर बसों का संचालन प्रभावित हो रहा है। रूटों पर बसों की कमी से यात्रियों की परेशानी बढ़ गई है। उन्हें गंतव्य तक पहुंचने के लिए बसों का काफी देर तक इंतजार करना पड़ रहा है।
गोहाना सब-डिपो के बेड़े में 80 बसें शामिल हैं। इनमें से 35 बसें किलोमीटर स्कीम की शामिल हैं। अधिकारी इन बसों का 19 रूटों पर संचालन करवा रहा है। इनमें लोकल, दूसरे जिलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के रूट भी शामिल हैं। बसें के संचालन से रोडवेज को प्रतिदिन करीब सात लाख रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता है। बसों के लगातार संचालन व सड़कों की जर्जर हालत उनके टायरों को कमजोर कर देती है।
स्थिति यह है कि सब-डिपो की चार बसों का निर्धारित रूटों पर संचालन करने के लिए टायर ही नहीं हैं। इन बसों में पहले से लगे हुए टायर घिस चुके हैं। इन टायरों के साथ बसों को रूटों पर नहीं भेजा जा सकता है। वहीं ऐसा करने पर हादसा होने की संभावना बनी रहेगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने बसों के घिसे हुए पुराने टायरों को निकालकर बसों को वर्कशॉप में खड़ा करवा दिया है।
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इन रूटों पर पड़ रहा है असर
अधिकारियों के अनुसार वर्कशॉप में खड़ी बसों का संचालन लोकल रूटों पर करवाया जाता था। इनमें सोनीपत, रोहतक, पानीपत व जुलाना आदि रूट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इन बसों को यात्रियों की संख्या के आधार पर ग्रामीण रूटों पर भी भेज दिया जाता है। बसें वर्कशॉप में खड़ी होने से इन रूटों पर बसें के संचालन पर असर पड़ा है।
मुख्यालय से की है टायर उपलब्ध करवाने की मांग
सब-डिपो की चार बसों में टायर नहीं हैं। इन बसों को वर्कशॉप में खड़ा करवा दिया गया है। जिला मुख्यालय से टायर उपलब्ध करवाने की मांग की है। टायर मिलने के बाद बसों का संचालन निर्धारित रूटों पर शुरू करवा दिया जाएगा।
सतीश कुमार, डीआई, बस अड्डा, गोहाना।
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गोहाना सब-डिपो के बेड़े में 80 बसें शामिल हैं। इनमें से 35 बसें किलोमीटर स्कीम की शामिल हैं। अधिकारी इन बसों का 19 रूटों पर संचालन करवा रहा है। इनमें लोकल, दूसरे जिलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों के रूट भी शामिल हैं। बसें के संचालन से रोडवेज को प्रतिदिन करीब सात लाख रुपये तक का राजस्व प्राप्त होता है। बसों के लगातार संचालन व सड़कों की जर्जर हालत उनके टायरों को कमजोर कर देती है।
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स्थिति यह है कि सब-डिपो की चार बसों का निर्धारित रूटों पर संचालन करने के लिए टायर ही नहीं हैं। इन बसों में पहले से लगे हुए टायर घिस चुके हैं। इन टायरों के साथ बसों को रूटों पर नहीं भेजा जा सकता है। वहीं ऐसा करने पर हादसा होने की संभावना बनी रहेगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए अधिकारियों ने बसों के घिसे हुए पुराने टायरों को निकालकर बसों को वर्कशॉप में खड़ा करवा दिया है।
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इन रूटों पर पड़ रहा है असर
अधिकारियों के अनुसार वर्कशॉप में खड़ी बसों का संचालन लोकल रूटों पर करवाया जाता था। इनमें सोनीपत, रोहतक, पानीपत व जुलाना आदि रूट शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इन बसों को यात्रियों की संख्या के आधार पर ग्रामीण रूटों पर भी भेज दिया जाता है। बसें वर्कशॉप में खड़ी होने से इन रूटों पर बसें के संचालन पर असर पड़ा है।
मुख्यालय से की है टायर उपलब्ध करवाने की मांग
सब-डिपो की चार बसों में टायर नहीं हैं। इन बसों को वर्कशॉप में खड़ा करवा दिया गया है। जिला मुख्यालय से टायर उपलब्ध करवाने की मांग की है। टायर मिलने के बाद बसों का संचालन निर्धारित रूटों पर शुरू करवा दिया जाएगा।
सतीश कुमार, डीआई, बस अड्डा, गोहाना।