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रवि दहिया ने पिता से किया वादा निभाया, फाइनल में पहुंच पदक किया पक्का

Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:57 PM IST
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Ravi Dahiya kept the promise made to his father, confirmed the medal reaching the finals
ओलंपिक में पहलवान रवि दहिया की जीत पर पिता राकेश दहिया को कंधों पर उठाए ग्रामीण - फोटो : Sonipat
विष्णु कुमार
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सोनीपत। गांव नाहरी के पहलवान रवि दहिया ने पिता से किया वादा निभाते हुए ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन कर देश के लिए पदक पक्का कर लिया। रवि दहिया ने बुधवार को देशवासियों को झूमने का दोहरा अवसर प्रदान किया। रवि ने सुबह प्री क्वार्टर फाइनल में कोलंबिया के ऑस्कर एडुआर्डो डिग्रेरोस को 13-2 से व क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया के जियोर्जी वेलेंटिनोव वांगेलोव को 14-4 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
वहीं दोपहर बाद हुए सेमीफाइनल मुकाबले में कजाकिस्तान के पहलवान नुरीस्लाम सनायेव को हराकर फाइनल में जगह बनाई। सेमीफाइनल में पिछड़ने के बाद रवि ने जोरदार वापसी की और पदक पक्का किया। हार से बौखलाए कजाकिस्तान के पहलवान ने रवि की बाजू पर दांत से भी काट लिया था। रवि दहिया की जीत के साथ ही सभी खुशी से झूम उठे। (संवाद)
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परिजनों से किया था वादा, ऐसा खेल दिखाऊंगा कि सभी दंग रह जाएंगे
टोक्यो ओलंपिक में फ्री-स्टाइल कुश्ती के लिए 57 किलोग्राम भारवर्ग में गांव नाहरी किे रवि से देश को सफल प्रदर्शन की उम्मीद है। रवि ने ओलंपिक मैच से पहले परिजनों से वादा किया था कि ऐसा खेल दिखाऊंगा कि सभी दंग रह जाएंगे। रवि ने वादे को पूरा कर फाइनल तक का सफर तय किया। परिजनों को पूरी उम्मीद है कि रवि देश की झोली में स्वर्ण पदक जरूर डालेगा।
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जमीन पट्टे पर लेकर खेती करते हैं पिता राकेश दहिया
12 दिसंबर 1997 को सोनीपत जिले के नाहरी गांव में जन्मे रवि दहिया के पिता राकेश दहिया छोटी जोत के किसान हैं। वह पट्टे पर लेकर खेती करते हैं। वह स्वयं भी पहलवानी करते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति मजबूत न होने के कारण कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके। उन्होंने बेटे को अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकने का अवसर दिया है।
गांव में जमकर हुई आतिशबाजी, ढोल की थाप पर नाचे ग्रामीण
रवि दहिया के फाइनल में कदम रखते ही गांव में दिवाली सा माहौल रहा। ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जमकर आतिशबाजी की। सभी ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाते हुए बधाइयां दीं। ग्रामीणों ने कहा कि रवि दहिया पदक की आस पूरी करेगा, इसका पूरा विश्वास था। लाडले के फाइनल में पहुंचने का पूरे गांव ने जमकर जश्न मनाया।
महाबली सतपाल ने कहा था, यह लड़का बनेगा चैंपियन
राकेश दहिया बताते हैं कि छत्रसाल स्टेडियम में रवि की फुर्ती को देखकर उसके गुरु महाबली सतपाल ने उस पर खास ध्यान देना शुरू कर दिया था। जब रवि 14 साल का था तो महाबली सतपाल ने कह दिया था कि यह लड़का एक दिन चैंपियन बनकर देश का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकाएगा। रवि ने गुरु की बात को सत्य कर दिखाया है।

ऐसे बढ़ा रवि का सफर
नाहरी के मूल निवासी रवि को गांव के संत हंसराज पहलवानी के लिए लेकर गए। गांव में ही उन्होंने रवि को अखाड़े में कुश्ती के दांव-पेच सिखाने शुरू किए। कुश्ती में रवि का मन ऐसा रमा कि उसने कुश्ती के दांव-पेच सीखने के लिए पूरा जी-जान लगा दिया। कुश्ती के गुर सीखने के साथ ही वह खेत में काम कर रहे किसान पिता का हाथ भी बंटाते थे। कुश्ती के प्रति जुनून देख 10 वर्ष की आयु में ही रवि को छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया, जहां वे दिनप्रतिदिन निखरते चले गए। वर्ष 2017 में घुटने की चोट के कारण सीनियर नेशनल गेम्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भी उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा था। हालांकि कुछ समय उपरांत फिट होकर दोबारा अभ्यास शुरू कर दिया।
ये हैं रवि की उपलब्धियां
-वर्ष 2013 अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रजत पदक जीता।
-वर्ष 2014 में जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-वर्ष 2015 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-वर्ष 2017 में हुई सीनियर नेशनल गेम्स में शानदार प्रदर्शन कर सेमीफाइनल में पहुंचे, लेकिन चोट के कारण उन्हें बाहर होना पड़ा।
-वर्ष 2018 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता।
-वर्ष 2019 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।
-वर्ष 2019 व 2020 में लगातार दो बार एशियन चैंपियन रहे।
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