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Sonipat News: रेलवे ने खोलकर छोड़ी खिलाड़ी, नहीं मिलती टिकट
Mon, 01 Apr 2024 07:17 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 01 Apr 2024 07:17 AM IST
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सोनीपत। रेलवे ने भले ही सोनीपत से जींद के लिए ट्रेन चलाकर सफर आसान कर दिया हो, लेकिन स्टेशनों पर टिकट नहीं मिलने से यात्रियों की परेशानी बढ़ी हुई है। जबकि सोनीपत से गोहाना तक रोजाना 600 से अधिक यात्री आवागमन करते हैं। इसमें करीब 25 फीसदी यात्री मासिक पास लेकर चलते हैं। हालात यह है कि ट्रेन में बेटिकट यात्रा करने वाले यात्रियों को सोनीपत स्टेशन पर पकड़े जाने का डर सताता रहता है। कई बार बिना टिकट पकड़े जाने पर जुर्माना तक अदा करना पड़ता है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल व तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने सोनीपत-जींद रेललाइन पर ट्रेन का संचालन शुरू किया था। आठ साल से सोनीपत-जींद रेलमार्ग पर ट्रेन की सिटी तो बज रही है, लेकिन सफर करने वाले यात्रियों को बीच के अधिकतर स्टेशनों पर टिकट मिलने की सुविधा आज तक शुरू नहीं हो सकी है। इससे न सिर्फ रेलवे के राजस्व को नुकसान हो रहा है, वहीं यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री बगैर टिकट यात्रा करने को बाध्य है।
इन स्टेशनों पर नहीं टिकट की व्यवस्था
सोनीपत-जींद रेल लाइन पर खंदराई, बुटाना, रभड़ा, लाठ, बड़वासनी व स्टेशनों पर टिकट खिड़की है, लेकिन कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं कर रखा है। खंदराई व बुटाना स्टेशन से चढऩे वाले यात्रियों का कहना है कि वह कई बार गोहाना से टिकट लेने का प्रयास करते हैं, लेकिन दो मिनट का ठहराव होने के कारण कई बार ट्रेन निकल जाती है।
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चार ट्रेनों का होता है संचालन
सोनीपत-जींद रेलवे लाइन पर सप्ताह में तीन दिन फरक्का एक्सप्रेस और छह दिन तीन पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है। पैसेंजर ट्रेन हर स्टेशनों पर 2 मिनट तक रुकती है। जींद के पांडू पिंडारा जंक्शन के बाद गोहाना स्टेशन से पहले टिकट की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते रेलवे विभाग को भी काफी घाटा हो रहा है।
टूटी जालियां, खाली पड़ी खिड़कियां
कई स्टेशनों पर हालत इतनी खस्ता है कि खाली पड़ी खिड़कियां की जालियां तक टूट गई हैं। कहीं पर खिड़कियों को पत्थर और गत्ते लगाकर पूरी तरीके से बंद किया हुआ है। स्टेशनों पर केवल देखने मात्र के लिए टिकट खिड़की बनाई गई है। वहां ना तो कोई कर्मचारी मौजूद हैं और ना ही टिकट की कोई व्यवस्था है। खिड़कियों पर धूल, मिट्टी और जंग के अलावा कुछ नहीं है।
यात्रियों को पकड़े जाने का रहता है डर
स्टेशनों पर टिकट न मिलने के कारण से यात्रियों को पकड़े जाने का डर लगातार बना रहता है। गोहाना से सोनीपत के बीच स्टेशनों पर टिकट नहीं मिलती। सोनीपत स्टेशन पर टिकट ना होने की वजह से टिकट चेकर को कई गुणा अधिक जुर्माना देना पड़ता है। स्टेशन पर टिकट की सुविधा नहीं होने की बात कहने के बावजूद टिकट चेकर सुनवाई नहीं करते।
सोनीपत-जींद रेलवे लाइन पर कई स्टेशनों पर टिकट नहीं मिलने का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द ही टिकटों की व्यवस्था करवाई जाएगी।
- प्रेम शंकर झा, कार्यकारी सलाहकार, डीआरएम, दिल्ली मंडल
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वर्ष 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल व तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने सोनीपत-जींद रेललाइन पर ट्रेन का संचालन शुरू किया था। आठ साल से सोनीपत-जींद रेलमार्ग पर ट्रेन की सिटी तो बज रही है, लेकिन सफर करने वाले यात्रियों को बीच के अधिकतर स्टेशनों पर टिकट मिलने की सुविधा आज तक शुरू नहीं हो सकी है। इससे न सिर्फ रेलवे के राजस्व को नुकसान हो रहा है, वहीं यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्री बगैर टिकट यात्रा करने को बाध्य है।
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इन स्टेशनों पर नहीं टिकट की व्यवस्था
सोनीपत-जींद रेल लाइन पर खंदराई, बुटाना, रभड़ा, लाठ, बड़वासनी व स्टेशनों पर टिकट खिड़की है, लेकिन कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं कर रखा है। खंदराई व बुटाना स्टेशन से चढऩे वाले यात्रियों का कहना है कि वह कई बार गोहाना से टिकट लेने का प्रयास करते हैं, लेकिन दो मिनट का ठहराव होने के कारण कई बार ट्रेन निकल जाती है।
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चार ट्रेनों का होता है संचालन
सोनीपत-जींद रेलवे लाइन पर सप्ताह में तीन दिन फरक्का एक्सप्रेस और छह दिन तीन पैसेंजर ट्रेनों का संचालन होता है। पैसेंजर ट्रेन हर स्टेशनों पर 2 मिनट तक रुकती है। जींद के पांडू पिंडारा जंक्शन के बाद गोहाना स्टेशन से पहले टिकट की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके चलते रेलवे विभाग को भी काफी घाटा हो रहा है।
टूटी जालियां, खाली पड़ी खिड़कियां
कई स्टेशनों पर हालत इतनी खस्ता है कि खाली पड़ी खिड़कियां की जालियां तक टूट गई हैं। कहीं पर खिड़कियों को पत्थर और गत्ते लगाकर पूरी तरीके से बंद किया हुआ है। स्टेशनों पर केवल देखने मात्र के लिए टिकट खिड़की बनाई गई है। वहां ना तो कोई कर्मचारी मौजूद हैं और ना ही टिकट की कोई व्यवस्था है। खिड़कियों पर धूल, मिट्टी और जंग के अलावा कुछ नहीं है।
यात्रियों को पकड़े जाने का रहता है डर
स्टेशनों पर टिकट न मिलने के कारण से यात्रियों को पकड़े जाने का डर लगातार बना रहता है। गोहाना से सोनीपत के बीच स्टेशनों पर टिकट नहीं मिलती। सोनीपत स्टेशन पर टिकट ना होने की वजह से टिकट चेकर को कई गुणा अधिक जुर्माना देना पड़ता है। स्टेशन पर टिकट की सुविधा नहीं होने की बात कहने के बावजूद टिकट चेकर सुनवाई नहीं करते।
सोनीपत-जींद रेलवे लाइन पर कई स्टेशनों पर टिकट नहीं मिलने का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में जल्द ही टिकटों की व्यवस्था करवाई जाएगी।
- प्रेम शंकर झा, कार्यकारी सलाहकार, डीआरएम, दिल्ली मंडल