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Sonipat News: आईएमटी के पास प्रतिबंधित कार्बन प्रोसेसिंग से लोग परेशान
Wed, 26 Jun 2024 10:26 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 26 Jun 2024 10:26 PM IST
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सोनीपत के खरखौदा में आईएमटी के पास इकाई के बाहर फैला प्रतिबंधित कॉर्बन। संवाद
खरखौदा। आईएमटी के पास स्थित एक प्लाॅट में प्रतिबंधित कार्बन की प्रोसेसिंग की जा रही है, जिससे आसपास क्षेत्र में रहने वाले लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का आरोप है कि कार्बन के कण उनके घरों व प्लाॅट में उड़कर पहुंच रहे हैं। इससे उनके स्वास्थ्य व स्वच्छता संबंधी समस्याएं उत्पन्न होने लगी है। ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि वह जल्द मामले को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराएंगे।
अमन, उमेद, रोहित व अंकित ने कहा कि यहां काफी समय से स्थानीय स्तर पर एक इकाई लगी हुई है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि इस प्रतिबंधित कार्बन प्रोसेसिंग के कण उड़कर उनके प्लॉट व घरों तक में पहुंच रहे हैं। कार्बन की प्रोसेसिंग से उत्पन्न होने वाले धुएं व कणों से न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण भी दूषित हो रहा है। छोटे-छोटे कण जमा होने से आसपास के लोगों को सांस लेने में दिक्कत व अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। आसपास के पेड़-पौधों पर भी कार्बन की परत जम रही है। इससे वनस्पति जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित कार्बन को रखने व प्रोसेस करने के लिए न केवल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है, बल्कि इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणीय मंजूरी भी जरूरी है। इतना ही नहीं, इसके लिए फायर सेफ्टी व सुरक्षा की भी मंजूरी ली जाती है। साथ ही वायु व जल प्रदूषण न हो, इसका भी इकाई लगाने वाले को ध्यान रखना होता है।
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वर्जन -
हमारे पास इस प्रकार की अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है, जल्द इसकी जांच की जाएगी। अगर कार्बन संबंधित इकाई में प्रोसेसिंग का कार्य किया जा रहा है तो वह किस स्तर का है, इसका भी जल्द पता लगाया जाएगा।
अमित दहिया, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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अमन, उमेद, रोहित व अंकित ने कहा कि यहां काफी समय से स्थानीय स्तर पर एक इकाई लगी हुई है, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों का आरोप है कि इस प्रतिबंधित कार्बन प्रोसेसिंग के कण उड़कर उनके प्लॉट व घरों तक में पहुंच रहे हैं। कार्बन की प्रोसेसिंग से उत्पन्न होने वाले धुएं व कणों से न केवल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ रहा है, बल्कि पर्यावरण भी दूषित हो रहा है। छोटे-छोटे कण जमा होने से आसपास के लोगों को सांस लेने में दिक्कत व अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। आसपास के पेड़-पौधों पर भी कार्बन की परत जम रही है। इससे वनस्पति जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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लोगों का कहना है कि प्रतिबंधित कार्बन को रखने व प्रोसेस करने के लिए न केवल केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है, बल्कि इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ पर्यावरणीय मंजूरी भी जरूरी है। इतना ही नहीं, इसके लिए फायर सेफ्टी व सुरक्षा की भी मंजूरी ली जाती है। साथ ही वायु व जल प्रदूषण न हो, इसका भी इकाई लगाने वाले को ध्यान रखना होता है।
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हमारे पास इस प्रकार की अभी तक कोई शिकायत नहीं आई है, जल्द इसकी जांच की जाएगी। अगर कार्बन संबंधित इकाई में प्रोसेसिंग का कार्य किया जा रहा है तो वह किस स्तर का है, इसका भी जल्द पता लगाया जाएगा।
अमित दहिया, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड