{"_id":"6950386f4fb62ab8f002699e","slug":"patients-with-bone-eye-and-ear-throat-problems-did-not-receive-treatment-at-the-hospital-sonipat-news-c-197-1-snp1003-147376-2025-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonipat News: अस्पताल में हड्डी, नेत्र व कान-गले के रोगियों को नहीं मिला उपचार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonipat News: अस्पताल में हड्डी, नेत्र व कान-गले के रोगियों को नहीं मिला उपचार
Sun, 28 Dec 2025 01:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 28 Dec 2025 01:20 AM IST
विज्ञापन
फोटो 35: सोनीपत के जिला नागरिक अस्पताल में बंद हड्डी रोग विशेषज्ञ का कक्ष। संवाद
- फोटो : katra news
सोनीपत। सरकारी विभागों में साल 2025 के अंतिम दिनों में हर कर्मचारी व अधिकारी अपनी छुटि्टयां पूरी करने में लगे हैं। जिला नागरिक अस्पताल में शनिवार को तो हालात तब बिगड़ गए जब हड्डी, ईएनटी और नेत्र विभाग की ओपीडी सेवाएं ठप हो गई। इसके चलते करीबन 600 से अधिक मरीज बिना उपचार कराए वापस लौटने के लिए मजबूर हुए।
शनिवार को हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन दलाल व दो नेत्र विशेषज्ञ छुट्टी पर गए। वहीं, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप लाकड़ा ऑपरेशन थिएटर में व्यस्त रहे। तीनों विभागों में चिकित्सक न होने की वजह से ओपीडी बंद रही। अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सर्दी में कोई मरीज हड्डी की चोट से जूझ रहा था तो कोई आंखों की जांच कराने पहुंचा था।
अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति न होने की वजह से उन्हें बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। वहीं, कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
शनिवार को हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन दलाल व दो नेत्र विशेषज्ञ छुट्टी पर गए। वहीं, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप लाकड़ा ऑपरेशन थिएटर में व्यस्त रहे। तीनों विभागों में चिकित्सक न होने की वजह से ओपीडी बंद रही। अस्पताल में उपचार कराने पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सर्दी में कोई मरीज हड्डी की चोट से जूझ रहा था तो कोई आंखों की जांच कराने पहुंचा था।
विज्ञापन
अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति न होने की वजह से उन्हें बिना इलाज कराए वापस लौटना पड़ा। वहीं, कई मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पताल जाना पड़ा।
विज्ञापन