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Sonipat News: पापमोचिनी एकादशी आज, दान करने से नष्ट होंगे पाप
Thu, 04 Apr 2024 10:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Thu, 04 Apr 2024 10:29 PM IST
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सोनीपत। चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पापमोचिनी एकादशी का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार पापमोचिनी एकादशी नववर्ष की पहली एकादशी है। चैत्र माह को लेकर मान्यता है कि इस महीने में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इस माह को साल का पहला महीना माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पापमोचिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने, ब्राह्मणों, दीन-हीन, असहाय लोगों को दान करने से सभी पाप नष्ट होते हैं और साधक को सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि धरती पर जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कोई न कोई पाप कर बैठता है। इसका फल उसे इसी जन्म में या अगले जन्म में अवश्य मिलता है। ऐसे में इन पापों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए पापमोचिनी एकादशी के दिन व्रत रखना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। पापमोचिनी एकादशी पर व्रत रखने व भगवान की उपासना करने से सभी कष्टों और दुखों का नाश होता है। अनजाने में हुई गलतियों से भी छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही साधक को सहस्त्र गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
ऐसे रखें उपवास
आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पापमोचिनी एकादशी का संपूर्ण फल प्राप्त करने के लिए साधक को निर्जला उपवास रखना चाहिए। यदि साधक निर्जला उपवास नहीं रख सकते तो वह फलाहारी या जलीय व्रत रख सकते हैं। उपवास रखने से पहले दशमी तिथि के दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें। एक दिन पहले चावल का सेवन न करें। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना विधि विधान से करें व विष्णु चालीसा का पाठ करें। इससे साधक की मनचाही मनोकामना पूरी होती है और जीवन की समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
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यह रहेगा मुहूर्त
पापमोचिनी एकादशी का शुभारंभ : 4 अप्रैल शाम 4:16 बजे से
पापमोचिनी एकादशी का समापन : 5 अप्रैल दोपहर 1 बजे (उदया तिथि के अनुसार पापमोचिनी एकादशी का व्रत 5 अप्रैल को ही रखा जाएगा)
इन चीजों का करें दान
अन्न व भोजन दान : सनातन परंपरा में अन्न और भोजन का दान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए एकादशी पर दीन-हीन, असहाय लोगों को अन्न का दान करना चाहिए। इस तरह के दान करने से साधक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है।
वस्त्र और शिक्षा दान : एकादशी के दिन वस्त्र और शिक्षा दान को भी बेहद कल्याणकारी माना जाता है। निर्धन लोगों को वस्त्र का दान करें, साथ ही निर्धन बच्चों को शिक्षा से संबंधित सामग्री जैसे- कॉपी, किताब, पेंसिल, पेन, स्कूली बैग वितरित करें। यदि आप सक्षम हैं तो इस दिन किसी निर्धन बच्चे को शिक्षित करने के लिए संकल्प लें।
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आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि धरती पर जन्म लेने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कोई न कोई पाप कर बैठता है। इसका फल उसे इसी जन्म में या अगले जन्म में अवश्य मिलता है। ऐसे में इन पापों के दुष्प्रभाव से बचने के लिए पापमोचिनी एकादशी के दिन व्रत रखना चाहिए। साथ ही भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए। पापमोचिनी एकादशी पर व्रत रखने व भगवान की उपासना करने से सभी कष्टों और दुखों का नाश होता है। अनजाने में हुई गलतियों से भी छुटकारा मिलता है। इसके साथ ही साधक को सहस्त्र गोदान के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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ऐसे रखें उपवास
आचार्य मनमोहन मिश्रा ने बताया कि पापमोचिनी एकादशी का संपूर्ण फल प्राप्त करने के लिए साधक को निर्जला उपवास रखना चाहिए। यदि साधक निर्जला उपवास नहीं रख सकते तो वह फलाहारी या जलीय व्रत रख सकते हैं। उपवास रखने से पहले दशमी तिथि के दिन सात्विक आहार ही ग्रहण करें। एक दिन पहले चावल का सेवन न करें। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की उपासना विधि विधान से करें व विष्णु चालीसा का पाठ करें। इससे साधक की मनचाही मनोकामना पूरी होती है और जीवन की समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
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यह रहेगा मुहूर्त
पापमोचिनी एकादशी का शुभारंभ : 4 अप्रैल शाम 4:16 बजे से
पापमोचिनी एकादशी का समापन : 5 अप्रैल दोपहर 1 बजे (उदया तिथि के अनुसार पापमोचिनी एकादशी का व्रत 5 अप्रैल को ही रखा जाएगा)
इन चीजों का करें दान
अन्न व भोजन दान : सनातन परंपरा में अन्न और भोजन का दान सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसलिए एकादशी पर दीन-हीन, असहाय लोगों को अन्न का दान करना चाहिए। इस तरह के दान करने से साधक को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है, साथ ही व्यक्ति कल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ जाता है।
वस्त्र और शिक्षा दान : एकादशी के दिन वस्त्र और शिक्षा दान को भी बेहद कल्याणकारी माना जाता है। निर्धन लोगों को वस्त्र का दान करें, साथ ही निर्धन बच्चों को शिक्षा से संबंधित सामग्री जैसे- कॉपी, किताब, पेंसिल, पेन, स्कूली बैग वितरित करें। यदि आप सक्षम हैं तो इस दिन किसी निर्धन बच्चे को शिक्षित करने के लिए संकल्प लें।