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सरकार! 10 लाख से ज्यादा ग्रांट खर्च करने का दिया जाए अधिकार

Sun, 03 Jul 2016 12:50 AM IST
Sonipat
Sonipat Updated Sun, 03 Jul 2016 12:50 AM IST
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प्रदेश में पहली बार चौधर में आई युवा और पढ़-लिखी सरकार विकास कार्यों को लेकर चौराहे पर आकर खड़ी हो गई है। शनिवार को जिले की 306 पंचायतों के सरपंच जिला परिषद भवन में एकत्रित हुए और सांसद व प्रशासन से 10 लाख रुपये से ऊपर की ग्रांट खर्च की अनुमति मांगी। - फोटो : amar ujala
प्रदेश में पहली बार चौधर में आई युवा और पढ़-लिखी सरकार विकास कार्यों को लेकर चौराहे पर आकर खड़ी हो गई है। शनिवार को जिले की 306 पंचायतों के सरपंच जिला परिषद भवन में एकत्रित हुए और सांसद रमेश कौशिक व प्रशासन से 10 लाख रुपये से ऊपर की ग्रांट खर्च करने की अनुमति मांगी। सांसद ने मौखिक आश्वासन दिया, लेकिन सरपंच लिखित नियम नहीं बनने तक जोखिम उठाने को तैयार नहीं हुए। हालांकि, डीसी केएम पांडुरंग ने आश्वासन दिया कि पंचायतें अपना 10 लाख के ऊपर के विकास कार्यों को भी एस्टिमेट बनाकर भेजें। अधिकारी तुरंत योजना बनाकर काम शुरू करवा देंगे।
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प्रदेश सरकार की पहल पर गांवों में पहली बार पढ़ी-लिखी सरकार आई है। नियमों के तहत पंचायत 10 लाख तक के विकास कार्य करवा सकती है। इससे ऊपर के विकास कार्य के लिए राशि जारी करने का अधिकारी पंचायती राज विभाग के एक्सईएन के पास है। उसकी अनुमति से ही ग्रांट खर्च हो सकती है। पंचायतों के खातों में पैसे तो हैं, लेकिन बड़े कार्य शुरू नहीं हो पा रहे। इसी के चलते शनिवार को जिला परिषद हॉल में 306 पंचायतों के प्रतिनिधि एकत्रित हुए, जिसमें सांसद रमेश कौशिक, डीसी केएम पांडुरंग और एडीसी शिव प्रसाद शर्मा, एसडीएम निशांत यादव, जिला परिषद के उपाध्यक्ष बिजेंद्र मलिक ने शिरकत की। पंचायत प्रतिनिधियों के सामने एक-एक कर सांसद व अधिकारियों के सामने समस्याएं रखीं और डीसी को मांग पत्र सौंपा।
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जेसीबी से तालाबों की बाउंड्री वॉल ऊंची करवाने की मांग
सरपंचों ने सांसद को बताया कि बारिश का मौसम आ गया है। तालाबों का पानी घरों में घुस सकता है। ऐसे में पंचायतें तालाब की बाउंड्री ऊंची करवाना चाहती है। मनरेगा के तहत इस मौसम में मजदूर लगाकर काम संभव नहीं है। इसलिए जेसीबी से काम करवाने की लिखित अनुमति दी जाए। सरपंचों ने बताया कि सांसद ने समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
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सीमेंट मिली, ग्रांट का इंतजार
पंचायत प्रतिनिधियों ने सांसद को बताया कि सीमेंट की कमी से विकास कार्य रुके हुए हैं। नियमों के तहत पंचायत सीमेंट पर 250 रुपये प्रति बैग खर्च कर सकती है, जबकि मार्केट में अब सीमेंट 320 रुपये प्रति बैग मिल रही है। हालांकि, देर शाम तक 500 बैग सीमेंट सोनीपत पहुंच गई, जिसे पंचायतों को वितरित किया जाएगा।

चारदीवारी से बाहर नहीं आ रही महिला सरपंच
जिला परिषद हॉल में 306 पंचायतों के सरपंच एकत्रित हुए, लेकिन महिला सरपंचों की संख्या 10 से 15 ही रही, जबकि जिले में 40 प्रतिशत के करीब महिला सरपंच हैं। इससे साफ है कि अब भी गांवों में महिलाएं नाममात्र की सरपंच हैं, उनके परिवार के सदस्य ही चौधर चला रहे हैं।

ये बोले सांसद
सांसद रमेश कौशिक ने कहा कि सरपंचों द्वारा रखे गए मांगपत्र पर उन्होंने बिजली निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सरपंचों से बात कर जिन गांवों में बिजली की कोई समस्या है उसका तुरंत समाधान किया जाए। जिन गांवों में सफाई कर्मचारियों के पद खाली हैं, उन गांवों के सरपंच अपनी सूची उपायुक्त को सौंपें ताकि नई नियुक्तियां की जा सकें। पेयजल, गंदे पानी की निकासी और बिजली की मांगों पर सांसद ने कहा कि यह तीनों चीजें सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं पर हैं और इन्हें दूर करने के लिए कार्य किए जा रहे हैं।

ये रखीं मांगें
किसी भी विकास कार्य के लिए ग्रांट मिलती है तो उसको खर्च करने का अधिकार सरपंच के पास होना चाहिए।
माइनिंग की स्वीकृति देने में सरपंच की स्वीकृति भी जरूरी हो, इसकी एक प्रति सरपंच को भेजी जाए जिसमें किला नंबर दर्ज होना चाहिए।
जिन स्ट्रीट लाइट के तार हटाए गए हैं, इनके बिल का खर्चा गांव के समस्त मीटरों पर डाला जाए

ब्लॉक में स्थायी बीडीपीओ, एसडीओ और अन्य अधिकारियों की नियुक्ति की जाए।
पेंशन समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
बैकों में प्रधानमंत्री द्वारा चलाई गई मुद्रा स्कीम का सही प्रयोग नहीं हो रहा है। बैंक मैनेजर गांवो में जाकर इसका प्रचार करें व पंचायत के सहयोग से मीटिंग करें।

पंचायत समिति की तरफ से गांवों मेें सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए।
तालाब की सफाई व खुदाई मशीन से करवाई जाए
नए राशन कार्ड बनाए जाएं, मकान और शौचालय को दोबारा सर्वे करवाए जाए।

10 लाख की ग्रांट खर्च करने का सरपंचों के पास है। इससे ऊपर के खर्च के लिए अधिकारियों के अनुमति की आवश्यकता होती है। इसके अलावा अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी गांवों में एचआरडीएफ स्कीम के माध्यम से 25 से 30 लाख रुपये तक के प्रस्ताव तैयार करें। इन प्रस्तावों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष रखकर मंजूरी दिलवाई जाएगी।

रमेश कौशिक, सांसद

सरपंच गांवों की सरकार हैं। इस बार पंचायतों का प्रतिनिधित्व युवा व पढ़े-लिखे युवक कर रहे हैं। सरपंच गांवों के विकास का खाका तैयार करें और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से काम को आगे बढ़ाएं। प्रशासन पूरी तरह विकास कार्यों के लिए तत्पर है।  
केएम पांडुरंग, डीसी
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