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Sonipat News: जल संरक्षण के लिए घटाया धान का रकबा
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फोटो :10: सोनीपत में उगाई गई धान की फसल। फाइल फोटो
सोनीपत। कृषि विभाग ने जल संरक्षण मुहिम को बढ़ाने की कवायद के तहत खरीफ सीजन में धान के बजाय कपास, बाजरा और गन्ने की फसलों के रकबे को बढ़ाने की पहल की है। इस बार खरीफ सीजन में धान की रोपाई व बिजाई का लक्ष्य 85 हजार हेक्टेयर रखा गया है। पहले धान का रकबा 90 हजार हेक्टेयर होता था। कृषि विभाग ने 12 हजार हेक्टेयर में गन्ना व 10 हजार हेक्टेयर भूमि में बाजरे उगाने का लक्ष्य रखा है।
रबी का सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है। सरसों के बाद अब गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है। दो सप्ताह के अंदर खेत खाली होने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई की प्रक्रिया शुरू होगी। खरीफ सीजन को लेकर मुख्यालय ने फसलों के रकबे का लक्ष्य जारी कर दिया गया है। जिसके आधार पर ही कृषि विभाग ने रणनीति तैयार कर ली है। इस बार में जिले में 85 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई व बिजाई की जाएगी। साथ ही गन्ने का रकबा 12 हजार हेक्टेयर तो बाजरे का 10 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। हरे चारे की फसलों में मुख्य तौर पर ज्वार और मक्का का रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। ज्वार करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि में उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
15 जून से पहले धान की रोपाई पर प्रतिबंध
जल संरक्षण के तहत कृषि विभाग ने 15 जून से पहले धान की रोपाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा करने वाले किसान की फसल को नष्ट किया जाएगा। साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। कृषि विभाग किसानों को धान की रोपाई के स्थान पर सीधी बिजाई करने के लिए भी प्रेरित करेगा। इसके लिए अनुदान राशि भी किसान को जारी की जाएगी।
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मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में बढ़ाई गई अनुदान राशि
भूजल को बचाने के लिए कृषि विभाग ने इस बार मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत किसान को दी जाने वाली अनुदान राशि को भी 7 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया है। योजना के तहत धान उत्पादक किसान को अन्य फसल उगानी होगी। साथ ही पोर्टल पर फसल पंजीकरण भी करवाना होगा।
रबी सीजन अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। खरीफ सीजन का लक्ष्य मिल गया है। इस बार 85 हजार हेक्टेयर भूमि में धान उगाने का लक्ष्य मिला है। किसानों को मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत विशेष तौर पर जागरूक किया जाएगा, ताकि धान के रकबे को घटाकर जल संरक्षण किया जा सके। -डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।
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रबी का सीजन अंतिम चरण में पहुंच गया है। सरसों के बाद अब गेहूं की कटाई भी शुरू हो गई है। दो सप्ताह के अंदर खेत खाली होने शुरू हो जाएंगे। इसके बाद खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई की प्रक्रिया शुरू होगी। खरीफ सीजन को लेकर मुख्यालय ने फसलों के रकबे का लक्ष्य जारी कर दिया गया है। जिसके आधार पर ही कृषि विभाग ने रणनीति तैयार कर ली है। इस बार में जिले में 85 हजार हेक्टेयर में धान की रोपाई व बिजाई की जाएगी। साथ ही गन्ने का रकबा 12 हजार हेक्टेयर तो बाजरे का 10 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। हरे चारे की फसलों में मुख्य तौर पर ज्वार और मक्का का रकबा बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। ज्वार करीब तीन हजार हेक्टेयर भूमि में उगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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15 जून से पहले धान की रोपाई पर प्रतिबंध
जल संरक्षण के तहत कृषि विभाग ने 15 जून से पहले धान की रोपाई नहीं करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा करने वाले किसान की फसल को नष्ट किया जाएगा। साथ ही जुर्माना भी लगाया जाएगा। कृषि विभाग किसानों को धान की रोपाई के स्थान पर सीधी बिजाई करने के लिए भी प्रेरित करेगा। इसके लिए अनुदान राशि भी किसान को जारी की जाएगी।
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मेरा पानी-मेरी विरासत योजना में बढ़ाई गई अनुदान राशि
भूजल को बचाने के लिए कृषि विभाग ने इस बार मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत किसान को दी जाने वाली अनुदान राशि को भी 7 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया है। योजना के तहत धान उत्पादक किसान को अन्य फसल उगानी होगी। साथ ही पोर्टल पर फसल पंजीकरण भी करवाना होगा।
रबी सीजन अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। खरीफ सीजन का लक्ष्य मिल गया है। इस बार 85 हजार हेक्टेयर भूमि में धान उगाने का लक्ष्य मिला है। किसानों को मेरा पानी-मेरी विरासत योजना के तहत विशेष तौर पर जागरूक किया जाएगा, ताकि धान के रकबे को घटाकर जल संरक्षण किया जा सके। -डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।