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प्रबंधन के दावों पर भारी पड़ी जनता की होड़
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Fri, 11 Nov 2016 12:43 AM IST
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ग्राहकों की लाइन।
- फोटो : sonipat
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पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट बंद किए जाने के केंद्र सरकार के फैसले के बाद वीरवार को अव्यवस्था का आलम रहा। उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने के लिए बैंक प्रबंधन द्वारा लगाए गए अतिरिक्त काउंटर भी नाकाफी साबित हुए और जनता की होड़ प्रबंधन के दावों पर भारी पड़ी। सुबह से ही जिले के बैंकों के बाहर लगी लोगों की लंबी लाइन देर शाम तक लगी रही। बैंक अधिकारियों के मुताबिक, वीरवार को जिले की 304 शाखाओं में करीब 15 करोड़ रुपये के नोट एक्सचेंज किए गए।
वीरवार सुबह नौ बजे बैंकों के खुलते ही बैंक प्रबंधनों ने काउंटरों को संभाला। इसी प्रक्रिया में करीब आधे घंटे का समय निकल गया, जिससे भीड़ बढ़ गई। शहर के कई बैंकों में मनी एक्सचेंज कार्य करीब 12 बजे शुरू हुआ। इस पर कतार में लगे लोगों ने जमकर भड़ास निकाली। सुबह सवा 11 बजे तक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की मॉडल टाउन शाखा में मनी एक्सचेंज का काम शुरू नहीं हो पाया था। शाखा प्रबंधक सुरेश के मुताबिक, उस समय तक नोट लेकर आने वाली गाड़ी बैंक नहीं पहुंची थी।
बाहर के खातों में नहीं हुए पैसे जमा
कुछ बैंकों ने जिले से बाहर के खातों में पैसे जमा किए जाने से परहेज किया। इससे प्रवासी लोगों को काफी दिक्कतें हुईं। प्रवासी दीनबंधु ने बताया कि उसका बिहार के पीएनबी का एकाउंट है। वह मॉडल टाउन की पीएनबी शाखा में पैसे जमा करवाने गया, लेकिन पैसे जमा नहीं हुए। बिहार में परिवार को पैसों की जरूरत है, लेकिन अब समस्या हो गई है। बैंक प्रबंधन ने 24 नवंबर तक इंतजार करने का कहा है।
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लंबी कतार देख लोगों के फूले हाथ-पांव
अनाज मंडी के पास स्थित पीएनबी की मुख्य शाखा में सबसे लंबी लाइन लगी। यहां बैंक प्रबंधन ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया था। बैंक प्रबंधन हर 10 मिनट में ताला खोलकर केवल 10 से 20 लोगों को ही अंदर आने की अनुमति दे रहा था। इस तरीके के हालात कमोबेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला व एचडीएफसी में भी देखने को मिले।
हर बैंक में अलग था फार्मेट का डिजाइन
मनी एक्सचेंज के लिए चलाए गए फार्मेट का डिजाइन भी हर बैंक के द्वारा अलग-अलग रहा। कुछ बैंकों ने फार्मेट के शीर्ष में अपने बैंक का नाम डाला हुआ था तो कुछ बैंकों के द्वारा साधारण फार्मेट ही बनाया बनाया गया था। बैंक प्रबंधनों के द्वारा यह तरीका इसलिए अपनाया गया था कि लोग दूसरे बैंक से फार्मेट लेकर उनके बैंक में पहुंचकर भीड़ न बढ़ाएं।
फोटोकॉपी वालों के यहां भी रही भीड़
बैंकों के पास स्थित फोटोस्टेट मशीन रखने वाले दुकानदारों के यहां भी भारी भीड़ रही। बैंकों के द्वारा नियम तय किया गया था कि हर कोई तब ही मनी एक्सचेंज करवा सकेेगी, जब वह फार्मेट के साथ अपनी आईडी प्रूफ की प्रति भी जमा करवाएगा। कुछ बैंकों में तो पैसे जमा करवाने के दौरान भी आईडी प्रूफ की प्रति अनिवार्य कर दी गई थी। इस कारण फोटो स्टेट की दुकानों पर भी भीड़ रही।
परिवहन सेवाओं के सामान्य रहे हालात
खुल्ले पैसों के लिए मची आपाधापी के चलते जहां बुधवार को काफी लोग ऐसे सामने आए थे कि जिन्हें टिकट ही नहीं मिल पाया था। वीरवार को परिवहन सेवाओं के दौरान हालात सामान्य नजर आए, लोग खुल्ले पैसे लेकर टिकट काउंटर पर पहुंच रहे थे। इससे रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर हालात कुछ हद तक ठीक रही।
लोगों की जुबानी में पहले दिन की परेशानी
1. मुकेश ने बताया कि वह ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स में चैक कैश करवाने लिए आया था लेकिन बैंक प्रबंधन ने उसे मना कर दिया। प्रबंधन का कहना है कि वह शाम के समय आए, इस समय केवल एक्सचेंज का कार्य किया जा रहा है।
2. बलवान का कहना है कि वे कैश एक्सचेंज के लिए सुबह करीब दस बजे लाइन में खड़े हुए थे लेकिन तीन घंटे के लंबे इंतजार के बाद उन्हें 4 हजार रुपये का कैश बदल कर दिया गया।
3. संजय मिश्रा ने बताया कि पैसे जमा करवाने के लिए बैंक में आया था लेकिन दो घंटे बाद जब उसका नंबर आया तो बैंक के द्वारा आईडी प्रूफ मांगा जा रहा है, जिसके चलते उसे अब वापस घर जाना पड़ेगा। अब तो वह कल ही बैंक में पैसे जमा करवाएगा।
4. गोविंद सिंह ने बताया कि देर शाम वह आईसीआईसीआई बैंक पैसे लेने के लिए पहुंचा था लेकिन लेनदेन बंद होने का हवाला देते हुए बैंक कर्मचारियों ने उसे पैसे नहीं दिए।
5. गिरीश अरोड़ा ने बताया कि देर शाम को करीब दो से तीन घंटे तक इंतजार के बाद उसे सेक्टर-14 के एचडीएफसी बैंक से खाली हाथ ही लौटना पड़ा। अब वह शुक्रवार को बैंक खुलने से पहले ही पहुंचेगा।
जिले भर की 304 ब्रांचों में करीब 15 करोड़ रुपये के नोट ग्राहकों के एक्सचेंज किए हैं। वीरवार को जिले भर के बैंकों में शांतिपूर्वक तरीके से लेन-देन का कार्य निपटाया गया। इसके लिए सभी बैंक कर्मचारी व जनता बधाई की पात्र हैं। आगे भी वह इसी तरह से जनता से सहयोग की उम्मीद करते हैं।
नरेंद्र शर्मा, एलडीएम, सोनीपत
उधार के सहारे व्यापार व परिवार
गोहाना। ब्याह शादी वाले घरों में इन दिनों काफी परेशानी हो रही है। क्लाथ हाउस कपड़ा आदि उधार दे रहे हैं, लेकिन अन्य सामान खरीदने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक हजार और 500 के नोट बंद करने की घोषणा के दूसरे दिन बैंकों में जहां भीड़ रही तो दुकानों पर ग्राहकों की कमी नजर आई। बैंकों में जहां अभी तक नहीं करेंसी न पहुंचने की अफवाहों का बाजार गर्म रहा तो रोजाना के प्रयोग में होने वाली चीजें खरीदने वाले उपभोक्ता कुछ खाली हाथ लौटते नजर आए तो कुछ ने उधार में सामान लिया। परेशानी तो उन परिवारों की अधिक बढ़ गई, जिनके घर में शादी आगामी चार पांच दिनों के बाद है। ऐसा ही वजीरपुरा का एक परिवार परेशान नजर आया।
एकाएक नोट बंद करना सरासर गलत : प्रो संपत सिंह
राई। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा एकाएक बड़े व पुराने नोट बंद कर नए प्रचलन में लाना सरासर गलत है। प्रो. संपत गांव खेवड़ा में एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आए हुए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस तरह से यकायक मुद्रा को बंद करना आम आदमी पर कुठाराधात है। उन्होंने कहा कि एक हजार की जगह दो हजार का नोट आने से कालाबाजारी खत्म होने की बजाय बढ़ेगी।
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वीरवार सुबह नौ बजे बैंकों के खुलते ही बैंक प्रबंधनों ने काउंटरों को संभाला। इसी प्रक्रिया में करीब आधे घंटे का समय निकल गया, जिससे भीड़ बढ़ गई। शहर के कई बैंकों में मनी एक्सचेंज कार्य करीब 12 बजे शुरू हुआ। इस पर कतार में लगे लोगों ने जमकर भड़ास निकाली। सुबह सवा 11 बजे तक स्टेट बैंक ऑफ पटियाला की मॉडल टाउन शाखा में मनी एक्सचेंज का काम शुरू नहीं हो पाया था। शाखा प्रबंधक सुरेश के मुताबिक, उस समय तक नोट लेकर आने वाली गाड़ी बैंक नहीं पहुंची थी।
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कुछ बैंकों ने जिले से बाहर के खातों में पैसे जमा किए जाने से परहेज किया। इससे प्रवासी लोगों को काफी दिक्कतें हुईं। प्रवासी दीनबंधु ने बताया कि उसका बिहार के पीएनबी का एकाउंट है। वह मॉडल टाउन की पीएनबी शाखा में पैसे जमा करवाने गया, लेकिन पैसे जमा नहीं हुए। बिहार में परिवार को पैसों की जरूरत है, लेकिन अब समस्या हो गई है। बैंक प्रबंधन ने 24 नवंबर तक इंतजार करने का कहा है।
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लंबी कतार देख लोगों के फूले हाथ-पांव
अनाज मंडी के पास स्थित पीएनबी की मुख्य शाखा में सबसे लंबी लाइन लगी। यहां बैंक प्रबंधन ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया था। बैंक प्रबंधन हर 10 मिनट में ताला खोलकर केवल 10 से 20 लोगों को ही अंदर आने की अनुमति दे रहा था। इस तरीके के हालात कमोबेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला व एचडीएफसी में भी देखने को मिले।
हर बैंक में अलग था फार्मेट का डिजाइन
मनी एक्सचेंज के लिए चलाए गए फार्मेट का डिजाइन भी हर बैंक के द्वारा अलग-अलग रहा। कुछ बैंकों ने फार्मेट के शीर्ष में अपने बैंक का नाम डाला हुआ था तो कुछ बैंकों के द्वारा साधारण फार्मेट ही बनाया बनाया गया था। बैंक प्रबंधनों के द्वारा यह तरीका इसलिए अपनाया गया था कि लोग दूसरे बैंक से फार्मेट लेकर उनके बैंक में पहुंचकर भीड़ न बढ़ाएं।
फोटोकॉपी वालों के यहां भी रही भीड़
बैंकों के पास स्थित फोटोस्टेट मशीन रखने वाले दुकानदारों के यहां भी भारी भीड़ रही। बैंकों के द्वारा नियम तय किया गया था कि हर कोई तब ही मनी एक्सचेंज करवा सकेेगी, जब वह फार्मेट के साथ अपनी आईडी प्रूफ की प्रति भी जमा करवाएगा। कुछ बैंकों में तो पैसे जमा करवाने के दौरान भी आईडी प्रूफ की प्रति अनिवार्य कर दी गई थी। इस कारण फोटो स्टेट की दुकानों पर भी भीड़ रही।
परिवहन सेवाओं के सामान्य रहे हालात
खुल्ले पैसों के लिए मची आपाधापी के चलते जहां बुधवार को काफी लोग ऐसे सामने आए थे कि जिन्हें टिकट ही नहीं मिल पाया था। वीरवार को परिवहन सेवाओं के दौरान हालात सामान्य नजर आए, लोग खुल्ले पैसे लेकर टिकट काउंटर पर पहुंच रहे थे। इससे रेलवे स्टेशन व बस स्टैंड पर हालात कुछ हद तक ठीक रही।
लोगों की जुबानी में पहले दिन की परेशानी
1. मुकेश ने बताया कि वह ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स में चैक कैश करवाने लिए आया था लेकिन बैंक प्रबंधन ने उसे मना कर दिया। प्रबंधन का कहना है कि वह शाम के समय आए, इस समय केवल एक्सचेंज का कार्य किया जा रहा है।
2. बलवान का कहना है कि वे कैश एक्सचेंज के लिए सुबह करीब दस बजे लाइन में खड़े हुए थे लेकिन तीन घंटे के लंबे इंतजार के बाद उन्हें 4 हजार रुपये का कैश बदल कर दिया गया।
3. संजय मिश्रा ने बताया कि पैसे जमा करवाने के लिए बैंक में आया था लेकिन दो घंटे बाद जब उसका नंबर आया तो बैंक के द्वारा आईडी प्रूफ मांगा जा रहा है, जिसके चलते उसे अब वापस घर जाना पड़ेगा। अब तो वह कल ही बैंक में पैसे जमा करवाएगा।
4. गोविंद सिंह ने बताया कि देर शाम वह आईसीआईसीआई बैंक पैसे लेने के लिए पहुंचा था लेकिन लेनदेन बंद होने का हवाला देते हुए बैंक कर्मचारियों ने उसे पैसे नहीं दिए।
5. गिरीश अरोड़ा ने बताया कि देर शाम को करीब दो से तीन घंटे तक इंतजार के बाद उसे सेक्टर-14 के एचडीएफसी बैंक से खाली हाथ ही लौटना पड़ा। अब वह शुक्रवार को बैंक खुलने से पहले ही पहुंचेगा।
जिले भर की 304 ब्रांचों में करीब 15 करोड़ रुपये के नोट ग्राहकों के एक्सचेंज किए हैं। वीरवार को जिले भर के बैंकों में शांतिपूर्वक तरीके से लेन-देन का कार्य निपटाया गया। इसके लिए सभी बैंक कर्मचारी व जनता बधाई की पात्र हैं। आगे भी वह इसी तरह से जनता से सहयोग की उम्मीद करते हैं।
नरेंद्र शर्मा, एलडीएम, सोनीपत
उधार के सहारे व्यापार व परिवार
गोहाना। ब्याह शादी वाले घरों में इन दिनों काफी परेशानी हो रही है। क्लाथ हाउस कपड़ा आदि उधार दे रहे हैं, लेकिन अन्य सामान खरीदने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। एक हजार और 500 के नोट बंद करने की घोषणा के दूसरे दिन बैंकों में जहां भीड़ रही तो दुकानों पर ग्राहकों की कमी नजर आई। बैंकों में जहां अभी तक नहीं करेंसी न पहुंचने की अफवाहों का बाजार गर्म रहा तो रोजाना के प्रयोग में होने वाली चीजें खरीदने वाले उपभोक्ता कुछ खाली हाथ लौटते नजर आए तो कुछ ने उधार में सामान लिया। परेशानी तो उन परिवारों की अधिक बढ़ गई, जिनके घर में शादी आगामी चार पांच दिनों के बाद है। ऐसा ही वजीरपुरा का एक परिवार परेशान नजर आया।
एकाएक नोट बंद करना सरासर गलत : प्रो संपत सिंह
राई। कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रो. संपत सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा एकाएक बड़े व पुराने नोट बंद कर नए प्रचलन में लाना सरासर गलत है। प्रो. संपत गांव खेवड़ा में एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आए हुए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि इस तरह से यकायक मुद्रा को बंद करना आम आदमी पर कुठाराधात है। उन्होंने कहा कि एक हजार की जगह दो हजार का नोट आने से कालाबाजारी खत्म होने की बजाय बढ़ेगी।