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मेरी बगिया : छत पर खिला खुशबू और हरियाली का संसार
Mon, 29 Dec 2025 01:59 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Mon, 29 Dec 2025 01:59 AM IST
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फोटो 46: जयकौर।
सोनीपत। शहर में कंक्रीट के जंगल के बीच यदि कहीं प्रकृति पूरे शबाब पर दिखाई देती है, तो वह है गोहाना रोड बाइपास स्थित जयकौर की बगिया। एक दशक से जयकौर ने अपने घर की छत और आंगन को हरियाली के लिए बगिया बना रखा है, जहां फूलों की खुशबू और पौधों की ताजगी से न केवल उनका घर, बल्कि आसपास का पूरा इलाका महक उठता है।
शादी के बाद गांव कुमासपुर से शहर में बसने आईं जयकौर ने अपने 300 वर्ग गज के घर को ही बगिया बना लिया। उन्होंने छत और आंगन में मिट्टी, गमलों और क्यारियों के सहारे ऐसा प्राकृतिक संसार रच दिया जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका है। बगिया में हार-सिंगार, वैजयंती, रजनीगंधा और मधुमालती जैसे सुगंधित फूल खिले रहते हैं।
इनकी महक सुबह-शाम वातावरण को आनंदमय बना देती है। फूलों के साथ-साथ जयकौर ने जड़ी-बूटियों और ऑक्सीजन देने वाले पौधों को भी विशेष स्थान दिया है। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय सहित अनेक औषधीय पौधे उनके परिवार के स्वास्थ्य का सहारा बने हुए हैं। मामूली बीमारियों में घर पर ही इन पौधों से उपचार हो जाता है। परिवार के लिए सब्जी भी उगा ली जाती हैं। हरियाली को संजोने में जयकौर किसी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करतीं।
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सूखे पत्ते, सब्जियों का कचरा और रसोई से निकलने वाला पानी उनकी देशी खाद की बुनियाद है। इसी प्राकृतिक खाद से पौधों को पोषण मिलता है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जाता है। उनकी पहल न केवल हरियाली बढ़ा रही है, बल्कि लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा भी दिखा रही है।
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शादी के बाद गांव कुमासपुर से शहर में बसने आईं जयकौर ने अपने 300 वर्ग गज के घर को ही बगिया बना लिया। उन्होंने छत और आंगन में मिट्टी, गमलों और क्यारियों के सहारे ऐसा प्राकृतिक संसार रच दिया जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुका है। बगिया में हार-सिंगार, वैजयंती, रजनीगंधा और मधुमालती जैसे सुगंधित फूल खिले रहते हैं।
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इनकी महक सुबह-शाम वातावरण को आनंदमय बना देती है। फूलों के साथ-साथ जयकौर ने जड़ी-बूटियों और ऑक्सीजन देने वाले पौधों को भी विशेष स्थान दिया है। तुलसी, एलोवेरा, गिलोय सहित अनेक औषधीय पौधे उनके परिवार के स्वास्थ्य का सहारा बने हुए हैं। मामूली बीमारियों में घर पर ही इन पौधों से उपचार हो जाता है। परिवार के लिए सब्जी भी उगा ली जाती हैं। हरियाली को संजोने में जयकौर किसी रासायनिक खाद का उपयोग नहीं करतीं।
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सूखे पत्ते, सब्जियों का कचरा और रसोई से निकलने वाला पानी उनकी देशी खाद की बुनियाद है। इसी प्राकृतिक खाद से पौधों को पोषण मिलता है और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जाता है। उनकी पहल न केवल हरियाली बढ़ा रही है, बल्कि लोगों को स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर जीवन की दिशा भी दिखा रही है।