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संस्कार, प्रेम और त्याग की जीवंत प्रतिमा होती है मां : लक्ष्मी
Sun, 10 May 2026 08:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Sun, 10 May 2026 08:19 PM IST
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फोटो : सोनीपत के कुंडली स्थित ब्रह्माकुमारीज राजयोग केंद्र में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम के
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। मातृ दिवस पर ब्रह्मकुमारीज राजयोग केंद्र, टीडीआई सिटी, किंग्सबरी कुंडली में मां सुखी परिवार की आधारशिला विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कवयित्री एवं ज्योतिषविद लक्ष्मी श्रीवास्तव ने कहा कि मां केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं बल्कि संस्कार, प्रेम, त्याग और सहनशीलता की जीवंत प्रतिमा होती है।
उन्होंने कहा कि मां अपने सकारात्मक विचारों और संस्कारों से पूरे परिवार को सुख, शांति एवं एकता के सूत्र में बांधे रखती है। सेवा केंद्र संचालिका बीके गीता ने आध्यात्मिक सशक्तीकरण एवं राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से माताओं को मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के उपाय बताए।
उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण वातावरण में मां यदि स्वयं आंतरिक रूप से शक्तिशाली बनेगी तो वह पूरे परिवार को भी खुशहाल और संस्कारित बना सकेगी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीतों एवं अनुभवों के माध्यम से मातृत्व के महत्व को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। सभी ने परिवारों में प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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सोनीपत। मातृ दिवस पर ब्रह्मकुमारीज राजयोग केंद्र, टीडीआई सिटी, किंग्सबरी कुंडली में मां सुखी परिवार की आधारशिला विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कवयित्री एवं ज्योतिषविद लक्ष्मी श्रीवास्तव ने कहा कि मां केवल परिवार की संरक्षक ही नहीं बल्कि संस्कार, प्रेम, त्याग और सहनशीलता की जीवंत प्रतिमा होती है।
उन्होंने कहा कि मां अपने सकारात्मक विचारों और संस्कारों से पूरे परिवार को सुख, शांति एवं एकता के सूत्र में बांधे रखती है। सेवा केंद्र संचालिका बीके गीता ने आध्यात्मिक सशक्तीकरण एवं राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से माताओं को मानसिक शांति, आत्मबल एवं सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के उपाय बताए।
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उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण वातावरण में मां यदि स्वयं आंतरिक रूप से शक्तिशाली बनेगी तो वह पूरे परिवार को भी खुशहाल और संस्कारित बना सकेगी। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, गीतों एवं अनुभवों के माध्यम से मातृत्व के महत्व को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया। सभी ने परिवारों में प्रेम, सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
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