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बेटी के सुरक्षित घर लौटने पर गले लगाकर भावुक हुई मां
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हवाई अड्डे पर बेटी को गले लगाती मां।
- फोटो : Sonipat
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गन्नौर। गन्नौर शहर की बेटी के सकुशल घर पहुंचने पर परिजनों के चेहरे पर रौनक लौट आई है। पिता रमेश ने बताया कि उसकी बेटी स्वाति 2018 में यूक्रेन के खारकीव शहर में मेडिकल की पढ़ाई करने गई है। वह अभी चतुर्थ वर्ष में है। यूक्रेन में युद्ध शुरू होने के बाद से वह साथियों के साथ बंकर में रह रही थी। जहां उनके पास खाने की कोई सुविधा नहीं थी।
बेटी ने बताया कि किसी तरह वह 26 फरवरी को अपने फ्लैट में गई और खाना बनाकर खाया और वापस बंकर में आ गई। उसके बाद 28 फरवरी को वह वापस फ्लैट में आई और अपना सामान लेकर 1 मार्च को मेट्रो स्टेशन खारकीव पहुंची। वहां से लिविव के लिए निकल गए, लेकिन मेट्रो स्टेशन पर यूक्रेन पुलिस द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। यूक्रेन पुलिस केवल यूक्रेनी नागरिकों को ही वहां से निकाल रही थी। वह किसी तरह एक रेलवे के अधिकारी तक पहुंची और उससे बात की। उस अधिकारी ने उनसे 100 डॉलर लेकर उनको मेट्रो से जाने दिया। वह मेट्रो में 24 घंटे खड़े होकर लिविव शहर पहुंचे और वहां से टैक्सी कर पोलैंड बार्डर तक पहुंचे।
स्वाति बोली- धमाके के साथ हिल गई थी पूरी इमारत, टूट गए थे शीशे
स्वाति ने बताया कि 28 फरवरी को उनकी इमारत के पास धमाका हुआ था। जिस कारण उनकी इमारत हिल गई और शीशे टूट गए। वह बुरी तरह सहम गए थे। जिसके बाद उनके एक पड़ोसी ने उनकी मदद की और टैक्सी से खारकीव मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाया। स्वाति ने बताया कि भारतीय दूतावास द्वारा उनकी कोई सहायता नहीं की गई और न ही उनसे संपर्क किया गया। वह 80 बच्चों के साथ अपने पैसे खर्च कर किसी तरह पोलैंड तक पहुंची। 2 फरवरी की रात को 10:30 बजे उनकी फ्लाइट थी और वीरवार को एक बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पहुंची। वह परिवार वालों से मिलकर बहुत खुश है।
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मां मनीषा की आंखों से छलके आंसू
बेटी के घर पहुंचने पर मां मनीषा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि बेटी के सुरक्षित घर पहुंचने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। वह आज अपनी बेटी के पसंद का खाना बनाकर उसको खिलाएगी। वह सभी बच्चों के सुरक्षित घर पहुंचने की भगवान से दुआएं करेगी। बेटी के घर पहुंचने पर परिजनों ने ढोल नगाड़ों से स्वागत किया।
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बेटी ने बताया कि किसी तरह वह 26 फरवरी को अपने फ्लैट में गई और खाना बनाकर खाया और वापस बंकर में आ गई। उसके बाद 28 फरवरी को वह वापस फ्लैट में आई और अपना सामान लेकर 1 मार्च को मेट्रो स्टेशन खारकीव पहुंची। वहां से लिविव के लिए निकल गए, लेकिन मेट्रो स्टेशन पर यूक्रेन पुलिस द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। यूक्रेन पुलिस केवल यूक्रेनी नागरिकों को ही वहां से निकाल रही थी। वह किसी तरह एक रेलवे के अधिकारी तक पहुंची और उससे बात की। उस अधिकारी ने उनसे 100 डॉलर लेकर उनको मेट्रो से जाने दिया। वह मेट्रो में 24 घंटे खड़े होकर लिविव शहर पहुंचे और वहां से टैक्सी कर पोलैंड बार्डर तक पहुंचे।
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स्वाति बोली- धमाके के साथ हिल गई थी पूरी इमारत, टूट गए थे शीशे
स्वाति ने बताया कि 28 फरवरी को उनकी इमारत के पास धमाका हुआ था। जिस कारण उनकी इमारत हिल गई और शीशे टूट गए। वह बुरी तरह सहम गए थे। जिसके बाद उनके एक पड़ोसी ने उनकी मदद की और टैक्सी से खारकीव मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाया। स्वाति ने बताया कि भारतीय दूतावास द्वारा उनकी कोई सहायता नहीं की गई और न ही उनसे संपर्क किया गया। वह 80 बच्चों के साथ अपने पैसे खर्च कर किसी तरह पोलैंड तक पहुंची। 2 फरवरी की रात को 10:30 बजे उनकी फ्लाइट थी और वीरवार को एक बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पहुंची। वह परिवार वालों से मिलकर बहुत खुश है।
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मां मनीषा की आंखों से छलके आंसू
बेटी के घर पहुंचने पर मां मनीषा की आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने बताया कि बेटी के सुरक्षित घर पहुंचने पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। वह आज अपनी बेटी के पसंद का खाना बनाकर उसको खिलाएगी। वह सभी बच्चों के सुरक्षित घर पहुंचने की भगवान से दुआएं करेगी। बेटी के घर पहुंचने पर परिजनों ने ढोल नगाड़ों से स्वागत किया।