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Sonipat News: बंदरों के आतंक से सोनीपत-गोहाना के लोग परेशान, प्रशासन का प्रयास नाकाफी

Tue, 06 Jan 2026 01:54 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Tue, 06 Jan 2026 01:54 AM IST
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Monkey menace troubles residents of Sonipat and Gohana, administration's efforts fall short
गोहाना के मुगलपुरा इलाके में एक गली में बंदरों का झुंड। स्रोत: संवाद
सोनीपत/गोहाना। जिले में बंदरों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। शायद ही कोई दिन हो जब कहीं न कहीं किसी को बंदर न काट रहा हो। रविवार को सोनीपत के राजेंद्र नगर में 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला चांद रानी को बंदर ने काट लिया। परिजनों ने उनको एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाया। फिलहाल महिला का उपचार चल रहा है।
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इसी के साथ गोहाना तहसील मुख्यालय के लोग भी बंदरों से परेशान हैं। दूसरी तरफ लावारिस पशुओं से निजात दिलाने में प्रशासन का प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।
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बालकनी पर लगवाए लोहे के जाल
सोनीपत के राजेंद्र नगर के लोगों की माने तो सिर्फ यहीं नहीं बल्कि शहर की अधिकांश कॉलोनियों में बंदर 15-20 के झुंड में खुलेआम घूमते रहते हैं। लोग छत पर कपड़े सुखाने या बच्चों को बाहर खेलने भेजने से डरने लगे हैं। कई परिवारों ने अपनी बालकनी और छतों पर लोहे के जाल तक लगवा लिए हैं।
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आंकड़ों के अनुसार, हर महीने बंदरों के काटने से घायल 3 से 4 लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। लोगों का आरोप है कि नगर निगम को कई बार शिकायत दी जा चुकी है मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। अधिकारी केवल अभियान चलाने का आश्वासन देकर जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं।
दूसरी ओर नगर निगम का दावा है कि नवंबर 2025 से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत अब तक 200 से अधिक बंदर पकड़े जा चुके हैं। हालांकि, इसके बावजूद शहर में ढाई से तीन हजार बंदर अभी भी बताए जा रहे हैं।
गोहाना में सात बार लगाया टेंडर मगर नहीं मिली एजेंसी
उधर, गोहाना में बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद सात बार टेंडर लगा चुकी है लेकिन कोई भी एजेंसी इस काम के लिए आगे नहीं आई है। नतीजा शहर में बंदर आतंक का पर्याय बनते जा रहे हैं। रोजाना 3 से 4 लोग बंदरों के काटने से घायल हो रहे हैं।
बता दें कि गोहाना में लगभग एक साल से बंदर पकड़ने का काम पूरी तरह बंद है। इसके चलते बाजारों, रिहायशी इलाकों और सरकारी संस्थानों के आसपास बंदरों का उत्पात बढ़ता जा रहा है। विष्णु नगर निवासी सुरेंद्र, ओमवीर, महिपाल और रविंद्र का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चे डरे हुए रहते हैं। दुकानदारों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसलिए विकट हो रही है समस्या
वन्य जीव विभाग की तरफ से यमुनानगर जिले के कलेसर स्थित जंगल में बंदरों के छोड़ने पर रोक लगा देने से स्थिति और गंभीर हो गई है। इसके बाद नगर परिषद के पास बंदरों को छोड़ने के लिए कोई वैकल्पिक स्थान नहीं बचा।
इस बीच नगर परिषद अब एक बार फिर नया टेंडर लगाने की तैयारी कर रही है। इस बार करीब 1 हजार बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि उच्चस्तर पर वन्य जीव विभाग से बातचीत कर बंदरों को छोड़ने के लिए वैकल्पिक स्थान तलाशने की कोशिश की जाएगी।
बंदरों को पकड़ने के लिए निगम की तरफ से अभियान जारी है। जल्द ही शहर के लोगों को परेशानी से निजात दिलाई जाएगी। - साहब सिंह, मुख्य सफाई निरीक्षक, नगर निगम, सोनीपत।

बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद की तरफ से कई बार टेंडर जारी किया गया है। एक बार एक एजेंसी ने इस काम को करने की हामी भरी थी लेकिन बाद में न जाने क्याें हाथ पीछे खींच लिए। जल्द ही नए सिरे से टेंडर लगाया जाएगा। जैसे ही कोई एजेंसी इसके लिए तैयार होती है तुरंत काम दे दिया जाएगा। - सुंदर शर्मा, सचिव, नगर परिषद, गोहाना।

गोहाना के मुगलपुरा इलाके में एक गली में बंदरों का झुंड। स्रोत: संवाद

गोहाना के मुगलपुरा इलाके में एक गली में बंदरों का झुंड। स्रोत: संवाद

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