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धुंध चरम पर, 80 प्रतिशत सड़कों से संकेतक गायब, विभाग इस्टीमेट बनाने में ही व्यस्त
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
Updated Sat, 10 Dec 2016 12:44 AM IST
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संकेतक गायब
- फोटो : sonipat
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एक तरफ जहां धुंध गहराती जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जीटी रोड के साथ-साथ शहर की 80 प्रतिशत सड़कों पर संकेतक ही नहीं हैं। कहीं सफेद पट्टी तो कहीं रिफ्लेक्टर गायब हैं। जिम्मेदार पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की लापरवाही का आलम है कि एक तिहाई दिसंबर माह बीत चुका है, इसके बावजूद अधिकारी ट्रैफिक संकेतक लगाने के लिए इस्टीमेट ही बना रहे हैं। दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस एनएचआई और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की मंजूरी का इंतजार कर रही है। ऐसे में वाहन चालकों की धुंध में सड़कों पर सलामती उन्हीं के हाथों है क्योंकि रास्ता बताने वाले संकेतक कहीं दिखाई नहीं दे रहे।
सोनीपत जिले में नेशनल हाईवे की लंबाई 56 किलोमीटर, स्टेट हाईवे की लंबाई 57 किलोमीटर, मेजर डिस्ट्रिक रोड की लंबाई 41 किलोमीटर, अन्य डिस्ट्रिक रोड की लंबाई 1058 किलोमीटर है। वहीं, मार्केटिंग बोर्ड की ओर से बनाई गई सड़कों की करीब 200 किलोमीटर तक है। लोक निर्माण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल 1212 सड़कें हैं। इनमें से अधिकतर रोड पर सफेद पट्टी तक गायब है। कई सड़कों से सफेद पट्टी गायब हो चुकी है, लेकिन धुंध में वाहन चालकों को सुरक्षित चलाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम तक नहीं उठाया गया।
दुर्घटना से टूट चुके डिवाइडर, सुधारने वाला कोई नहीं
गन्नौर व मुरथल, सोनीपत शहर में रोहतक रोड फ्लाईओवर पर चढ़ते समय बने डिवाइडर दुर्घटना के कारण टूट चुके हैं, लेकिन उन्हें ठीक करने वाले कोई नहीं है। टूटे हुए डिवाइडरों में रिफ्लेक्टर न लगने के कारण धुंध के समय जीटी रोड पर वाहन कभी भी दुर्घटना ग्रस्त हो सकते हैं, लेकिन इस ओर संबंधित विभाग एनएचएआई व पीडब्ल्यूडी ध्यान नहीं दे रहा है।
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नेशनल व स्टेट हाईवे पर कई चौक पर नहीं अंडरपास
जीटी रोड के अलावा दूसरे नेशनल हाईवे व स्टेट के आस-पास बसे गांवों के ग्रामीणों ने इन हादसों से मुक्ति पाने के लिए प्रशासन से गांवों के सामने अंडरपास बनवाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जब तक अंडरपास नहीं बनते तब तक सड़क पार करने के लिए वैकल्पिक रास्तों का उचित प्रबंध किया जाए। नेशनल हाईवे नंबर-1 पर गांव पांची गुजरान, गढ़ी गुलामा, टेहा, बड़ी, पिपली खेड़ा, लड़सौली, भिगान, हसनपुर, कुराड़, कुमासपुर, राई, बीसवां मील के अन्य गांवों जीटी रोड के किनारे बसे हुए हैं। इन गांवों के ग्रामीणों को अक्सर शहर व एक दूसरे गांव मेें आने-जाने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है। इन गांवों के सामने कोई भी अंडरपास, ओवरब्रिज या फिर रेड लाइट नहीं लगी हुई है, जिस कारण लोगों द्वारा सड़क पार करना कभी-कभी जानलेवा साबित हो जाता है। जीटी रोड का लेन विस्तार होने के कारण वाहन बेफिक्र होकर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं। सड़क पार करते समय अक्सर लोग इन सरपट दौड़ते वाहनों की चपेट में आ जाते है।
गन्नौर क्षेत्र में एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं
दो दिन से मौसम करवट ले रहा है सुबह-शाम की धुंध ने जहां जीटी रोड पर यातायात के पहियों की चाल रोक दी है, वहीं सड़क हादसे भी बढ़ रहे हैं। कुछ तो मौसम और कुछ सड़क पर सिग्नलों का न होनी भी सड़क हादसों को न्यौता दिया रहा है, जिसमें कुछ प्रमुख चौराहे हैं जिन पर सिग्नल तक नहीं है। इनमें कुंडली बार्डर से गांव रसोई, पीतमपुरा, राई, कमासपुर व भिगान चौक हैं जिन में सिग्नल न होने के चलते काफी दुर्घटनाएं होती हैं और कई अनमोल जानें भी चली जाती हैं। जरूरत है कि इन चौराहों पर सिग्नल हो तो यातायात को काफी सुचारू रूप से चलाने में सहायता मिल सकती है।
चौराहों व कटों पर हो पुलिस कर्मी की तैनाती
दातौली निवासी मनीराम नंबरदार कहा कि जीटी रोड पर बने चौराहों व कटों पर पुलिस कर्मी तैनात किए जाने चाहिए ताकि लोगों को सड़क पार करते समय सहायता मिल सके। इसके साथ ही रोड पर बने सभी अवैध कटों को बंद कर देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर अवैध कटों से सड़क पार करते समय जान जोखिम में रहती है।
हाईवे पर बनाए जाएं अंडरपास
गांव पिपली खेड़ा के पूर्व सरपंच रणधीर सिंह मलिक ने कहा कि उनका गांव जीटी रोड के नजदीक बसा है। उनके गांव से होकर ही रामनगर, उमेदगढ़, पबनेरा व ग्यासपुर आदि गांवों के ग्रामीण को आना जाना पड़ता है, लेकिन सड़क पर कोई भी अंडरपास या फिर वैकल्पिक रास्ता नहीं होने जान का खतरा बना रहता है।
वाहन चलाना मुश्किल
वाहन चालक कृपाल सिंह का कहना है कि गांव थाना कलां का रहने वाला हूं। जीप के माध्यम से खरखौदा से सोनीपत तक सवारियां लाता है। सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग व सफेद पट्टी न होने से धुंध के दौरान गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है। जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जल्द शुरू होगी संकेतक लगाने की प्रक्रिया
यातायात थाना प्रभारी प्रवीन कुमार ने बताया कि उन्होंने इन चौराहे पर संकेतक लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को लिखित में प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही उनकी तरफ से कोई जवाब आता है तो सिग्नल व संकेतक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
तैयार किया जा रहा इस्टीमेट
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन विकास रंगा ने बताया कि जिले में 1212 सड़के हैं, जिन पर सर्वे कर विभाग की ओर से इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इसके बाद जेब्रा क्रॉसिंग व सफेद पट्टी बनाई जाएगी। हादसों को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। धीरे-धीरे सभी सड़कों को पूरा कर लिया जाएगा।
ये हैं डेंजर प्वाइंट
नेशनल हाईवे 1 पर जांटी मोड़, नाथुपुर मोड़, बढ़खालसा मोड़, बीसवामील चौक, राई के पास चौक, दावत राईस मिल के पास, सेक्टर-7 के अलावा खरखौदा रोड पर कंवाली मोड़, हरसाना मोड़, रोहट नहर, गोहाना में गोहाना-रोहतक बाईपास, पानीपत बाईपास, खानपुर मोड़, बरोदा मोड़ चौक, सफीदों मोड़, जींद-महम बाईपास, सोनीपत टी प्वाइंट, बड़वासनी नहर के पास आदि डेंजर प्वाइंट है।
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सोनीपत जिले में नेशनल हाईवे की लंबाई 56 किलोमीटर, स्टेट हाईवे की लंबाई 57 किलोमीटर, मेजर डिस्ट्रिक रोड की लंबाई 41 किलोमीटर, अन्य डिस्ट्रिक रोड की लंबाई 1058 किलोमीटर है। वहीं, मार्केटिंग बोर्ड की ओर से बनाई गई सड़कों की करीब 200 किलोमीटर तक है। लोक निर्माण विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले की कुल 1212 सड़कें हैं। इनमें से अधिकतर रोड पर सफेद पट्टी तक गायब है। कई सड़कों से सफेद पट्टी गायब हो चुकी है, लेकिन धुंध में वाहन चालकों को सुरक्षित चलाने के लिए प्रशासन की ओर से कोई कदम तक नहीं उठाया गया।
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दुर्घटना से टूट चुके डिवाइडर, सुधारने वाला कोई नहीं
गन्नौर व मुरथल, सोनीपत शहर में रोहतक रोड फ्लाईओवर पर चढ़ते समय बने डिवाइडर दुर्घटना के कारण टूट चुके हैं, लेकिन उन्हें ठीक करने वाले कोई नहीं है। टूटे हुए डिवाइडरों में रिफ्लेक्टर न लगने के कारण धुंध के समय जीटी रोड पर वाहन कभी भी दुर्घटना ग्रस्त हो सकते हैं, लेकिन इस ओर संबंधित विभाग एनएचएआई व पीडब्ल्यूडी ध्यान नहीं दे रहा है।
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नेशनल व स्टेट हाईवे पर कई चौक पर नहीं अंडरपास
जीटी रोड के अलावा दूसरे नेशनल हाईवे व स्टेट के आस-पास बसे गांवों के ग्रामीणों ने इन हादसों से मुक्ति पाने के लिए प्रशासन से गांवों के सामने अंडरपास बनवाने की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि जब तक अंडरपास नहीं बनते तब तक सड़क पार करने के लिए वैकल्पिक रास्तों का उचित प्रबंध किया जाए। नेशनल हाईवे नंबर-1 पर गांव पांची गुजरान, गढ़ी गुलामा, टेहा, बड़ी, पिपली खेड़ा, लड़सौली, भिगान, हसनपुर, कुराड़, कुमासपुर, राई, बीसवां मील के अन्य गांवों जीटी रोड के किनारे बसे हुए हैं। इन गांवों के ग्रामीणों को अक्सर शहर व एक दूसरे गांव मेें आने-जाने के लिए सड़क पार करनी पड़ती है। इन गांवों के सामने कोई भी अंडरपास, ओवरब्रिज या फिर रेड लाइट नहीं लगी हुई है, जिस कारण लोगों द्वारा सड़क पार करना कभी-कभी जानलेवा साबित हो जाता है। जीटी रोड का लेन विस्तार होने के कारण वाहन बेफिक्र होकर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं। सड़क पार करते समय अक्सर लोग इन सरपट दौड़ते वाहनों की चपेट में आ जाते है।
गन्नौर क्षेत्र में एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं
दो दिन से मौसम करवट ले रहा है सुबह-शाम की धुंध ने जहां जीटी रोड पर यातायात के पहियों की चाल रोक दी है, वहीं सड़क हादसे भी बढ़ रहे हैं। कुछ तो मौसम और कुछ सड़क पर सिग्नलों का न होनी भी सड़क हादसों को न्यौता दिया रहा है, जिसमें कुछ प्रमुख चौराहे हैं जिन पर सिग्नल तक नहीं है। इनमें कुंडली बार्डर से गांव रसोई, पीतमपुरा, राई, कमासपुर व भिगान चौक हैं जिन में सिग्नल न होने के चलते काफी दुर्घटनाएं होती हैं और कई अनमोल जानें भी चली जाती हैं। जरूरत है कि इन चौराहों पर सिग्नल हो तो यातायात को काफी सुचारू रूप से चलाने में सहायता मिल सकती है।
चौराहों व कटों पर हो पुलिस कर्मी की तैनाती
दातौली निवासी मनीराम नंबरदार कहा कि जीटी रोड पर बने चौराहों व कटों पर पुलिस कर्मी तैनात किए जाने चाहिए ताकि लोगों को सड़क पार करते समय सहायता मिल सके। इसके साथ ही रोड पर बने सभी अवैध कटों को बंद कर देना चाहिए क्योंकि आमतौर पर अवैध कटों से सड़क पार करते समय जान जोखिम में रहती है।
हाईवे पर बनाए जाएं अंडरपास
गांव पिपली खेड़ा के पूर्व सरपंच रणधीर सिंह मलिक ने कहा कि उनका गांव जीटी रोड के नजदीक बसा है। उनके गांव से होकर ही रामनगर, उमेदगढ़, पबनेरा व ग्यासपुर आदि गांवों के ग्रामीण को आना जाना पड़ता है, लेकिन सड़क पर कोई भी अंडरपास या फिर वैकल्पिक रास्ता नहीं होने जान का खतरा बना रहता है।
वाहन चलाना मुश्किल
वाहन चालक कृपाल सिंह का कहना है कि गांव थाना कलां का रहने वाला हूं। जीप के माध्यम से खरखौदा से सोनीपत तक सवारियां लाता है। सड़कों पर जेब्रा क्रॉसिंग व सफेद पट्टी न होने से धुंध के दौरान गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है। जिससे भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
जल्द शुरू होगी संकेतक लगाने की प्रक्रिया
यातायात थाना प्रभारी प्रवीन कुमार ने बताया कि उन्होंने इन चौराहे पर संकेतक लगाने के लिए एनएचएआई के अधिकारियों को लिखित में प्रस्ताव भेजा हुआ है। जैसे ही उनकी तरफ से कोई जवाब आता है तो सिग्नल व संकेतक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
तैयार किया जा रहा इस्टीमेट
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन विकास रंगा ने बताया कि जिले में 1212 सड़के हैं, जिन पर सर्वे कर विभाग की ओर से इस्टीमेट तैयार किया जा रहा है। इसके बाद जेब्रा क्रॉसिंग व सफेद पट्टी बनाई जाएगी। हादसों को रोकने के लिए ऐसा किया जा रहा है। धीरे-धीरे सभी सड़कों को पूरा कर लिया जाएगा।
ये हैं डेंजर प्वाइंट
नेशनल हाईवे 1 पर जांटी मोड़, नाथुपुर मोड़, बढ़खालसा मोड़, बीसवामील चौक, राई के पास चौक, दावत राईस मिल के पास, सेक्टर-7 के अलावा खरखौदा रोड पर कंवाली मोड़, हरसाना मोड़, रोहट नहर, गोहाना में गोहाना-रोहतक बाईपास, पानीपत बाईपास, खानपुर मोड़, बरोदा मोड़ चौक, सफीदों मोड़, जींद-महम बाईपास, सोनीपत टी प्वाइंट, बड़वासनी नहर के पास आदि डेंजर प्वाइंट है।