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Haryana: सोनीपत के अखाड़े से निकली मीनाक्षी ने किया बड़ा उलटफेर, विनेश को हराकर एशियाई चैंपियनशिप से किया बाहर
Sat, 30 May 2026 09:36 PM IST
शाहिल शर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Sat, 30 May 2026 09:36 PM IST
सार
मीनाक्षी गोयत इससे पहले अप्रैल माह में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीत चुकी हैं।
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प्रशिक्षक अजय मलिक के संग मीनाक्षी
- फोटो : संवाद
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विस्तार
गांव बड़वासनी स्थित कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी में प्रशिक्षण ले रही अंतरराष्ट्रीय पहलवान मीनाक्षी गोयत ने एशियाई खेलों के लिए आयोजित चयन ट्रायल में बड़ा उलटफेर करते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला पहलवान एवं सोनीपत की बहू विनेश फोगाट को हराकर सभी को चौंका दिया। मीनाक्षी ने 53 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल मुकाबले में विनेश को 6-4 से शिकस्त देकर ट्रायल से बाहर कर दिया। हालांकि वह फाइनल में अंतिम पंघाल से हार गई।
जींद जिले के चाबरी गांव की रहने वाली मीनाक्षी सोनीपत की प्रसिद्ध कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। अकादमी में कठोर अभ्यास और तकनीकी प्रशिक्षण का ही परिणाम है कि उन्होंने देश की सबसे अनुभवी महिला पहलवानों में शामिल विनेश फोगाट के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की। यह जीत केवल एक मुकाबले की सफलता नहीं, बल्कि उभरती हुई नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और क्षमता का परिचायक है। ट्रायल के सबसे चर्चित मुकाबले में मीनाक्षी ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने अपने दांव-पेंच और फुर्ती के दम पर विनेश फोगाट को लगातार दबाव में रखा और अंतत: 6-4 के अंतर से मुकाबला जीता। इस जीत के साथ विनेश फोगाट का एशियाई खेलों में भाग लेने का सपना टूट गया, जबकि मीनाक्षी ने खुद को देश की सबसे मजबूत महिला पहलवानों में शामिल कर लिया।
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जींद जिले के चाबरी गांव की रहने वाली मीनाक्षी सोनीपत की प्रसिद्ध कुलदीप मलिक कुश्ती अकादमी में प्रशिक्षण ले रही हैं। अकादमी में कठोर अभ्यास और तकनीकी प्रशिक्षण का ही परिणाम है कि उन्होंने देश की सबसे अनुभवी महिला पहलवानों में शामिल विनेश फोगाट के खिलाफ शानदार जीत दर्ज की। यह जीत केवल एक मुकाबले की सफलता नहीं, बल्कि उभरती हुई नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और क्षमता का परिचायक है। ट्रायल के सबसे चर्चित मुकाबले में मीनाक्षी ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया। उन्होंने अपने दांव-पेंच और फुर्ती के दम पर विनेश फोगाट को लगातार दबाव में रखा और अंतत: 6-4 के अंतर से मुकाबला जीता। इस जीत के साथ विनेश फोगाट का एशियाई खेलों में भाग लेने का सपना टूट गया, जबकि मीनाक्षी ने खुद को देश की सबसे मजबूत महिला पहलवानों में शामिल कर लिया।
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फाइनल में अंतिम से मिली हार
सेमीफाइनल में शानदार जीत के बाद मीनाक्षी का सामना फाइनल में अंतिम पंघाल से हुआ। बेहद रोमांचक और विवादास्पद रहे इस मुकाबले में मीनाक्षी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके प्रदर्शन ने कुश्ती जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और भविष्य के लिए मजबूत संकेत दिए।
एशियाई चैंपियनशिप में पहले ही जीत चुकी हैं रजत पदक
मीनाक्षी गोयत इससे पहले अप्रैल माह में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीत चुकी हैं। वह प्रतियोगिता के लिए ट्रायल में अंतिम पंघाल को हराकर बिश्केक गई थी। हालांकि अब वह अंतिम से हार गई।
साधारण किसान परिवार की बेटी ने बनाई विशेष पहचान
मीनाक्षी एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता प्रेम सिंह खेतीबाड़ी करते हैं और बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए वर्तमान में सोनीपत में रहकर उसका सहयोग कर रहे हैं। परिवार की मेहनत और मीनाक्षी के समर्पण ने आज उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
स्वर्णिम भविष्य की ओर बढ़ रही मीनाक्षी
विनेश फोगाट जैसी दिग्गज पहलवान पर जीत ने मीनाक्षी गोयत के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों को विश्वास है कि यदि वह इसी तरह प्रदर्शन करती रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्णिम सफलताओं का नया अध्याय लिख सकती हैं।
सेमीफाइनल में शानदार जीत के बाद मीनाक्षी का सामना फाइनल में अंतिम पंघाल से हुआ। बेहद रोमांचक और विवादास्पद रहे इस मुकाबले में मीनाक्षी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि उनके प्रदर्शन ने कुश्ती जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और भविष्य के लिए मजबूत संकेत दिए।
एशियाई चैंपियनशिप में पहले ही जीत चुकी हैं रजत पदक
मीनाक्षी गोयत इससे पहले अप्रैल माह में किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित सीनियर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक जीत चुकी हैं। वह प्रतियोगिता के लिए ट्रायल में अंतिम पंघाल को हराकर बिश्केक गई थी। हालांकि अब वह अंतिम से हार गई।
साधारण किसान परिवार की बेटी ने बनाई विशेष पहचान
मीनाक्षी एक साधारण किसान परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता प्रेम सिंह खेतीबाड़ी करते हैं और बेटी के खेल करियर को आगे बढ़ाने के लिए वर्तमान में सोनीपत में रहकर उसका सहयोग कर रहे हैं। परिवार की मेहनत और मीनाक्षी के समर्पण ने आज उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
स्वर्णिम भविष्य की ओर बढ़ रही मीनाक्षी
विनेश फोगाट जैसी दिग्गज पहलवान पर जीत ने मीनाक्षी गोयत के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। खेल प्रेमियों और प्रशिक्षकों को विश्वास है कि यदि वह इसी तरह प्रदर्शन करती रहीं, तो आने वाले वर्षों में भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्णिम सफलताओं का नया अध्याय लिख सकती हैं।