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Sonipat News: आनुवांशिक रोगों की समझ बढ़ाएगा एमडीयू का नया डिप्लोमा

Sat, 06 Sep 2025 11:00 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 06 Sep 2025 11:00 PM IST
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MDU's new diploma will increase understanding of genetic diseases
02 एमडीयू का जेनेटिक्स विभाग। स्रोत:एमडीयू
रोहतक। अब आनुवांशिक रोगों को समझना व उनका निदान और आसान होगा। बीमारी की रोकथाम सामाजिक प्रभाव व परामर्श में भी विद्यार्थी दक्ष बन सकेंगे। इसके लिए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के जेनेटिक्स विभाग ने जेनेटिक काउंसिलिंग में एक वर्षीय परास्नातक डिप्लोमा पाठ्यक्रम प्रारंभ किया है।
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विभाग अध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार तिवारी ने बताया कि इस क्रम में विभाग की ओर से अगस्त को एसएमए (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) जागरूकता माह के रूप में मनाया गया। इस अभियान ने न केवल वैज्ञानिक जानकारी को बढ़ावा दिया बल्कि समाज में इस गंभीर व दुर्लभ बीमारी के प्रति संवेदनशीलता भी पैदा की।
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क्या है एसएमए
एसएमए एक प्रगतिशील और विरासती न्यूरोमस्कुलर रोग है। इसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं। इसका मुख्य कारण एसएमएन 1 जीन में म्यूटेशन होता है। यह ऑटोसोमल रिसेसिव प्रकृति का रोग है। इसमें माता-पिता दोनों वाहक होने पर बच्चे को बीमारी हो सकती है। एसएमए जागरूकता कार्यक्रम आयोजन में जीवन विज्ञान संकाय की अधिष्ठाता प्रो. मीनाक्षी वशिष्ठ, विभागाध्यक्ष प्रो. संतोष कुमार तिवारी, विभागीय शिक्षक डॉ. रितु यादव, डॉ. नीलम सहरावत और डॉ. मुकेश तंवर, जेनेटिक काउंसलर अनुराधा शर्मा और डिप्लोमा के विद्यार्थी ऋतु रावत, श्वेता सहरावत और रचना कंबोज ने अहम भूमिका निभाई।
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एसएमए के प्रमुख प्रकार
टाइप 1, जन्म के बाद पहले 6 माह में लक्षण; सबसे गंभीर रूप; श्वसन समस्याएं आम। टाइप 2, 6-18 माह में लक्षण; बैठ सकते हैं पर चल नहीं पाते। टाइप 3, बचपन/किशोरावस्था में शुरुआत; चल सकते हैं, पर मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती हैं। टाइप 4, वयस्क अवस्था में लक्षण, सबसे हल्का रूप।


निदान व उपचार
जेनेटिक परीक्षण (जेनेटिक टेस्टिंग) से एसएमएन 1 जीन में दोष की पुष्टि संभव है। ईसीजी, मसल बायोप्सी और नवजात जांच (न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग) से रोग की प्रारंभिक पहचान की जा सकती है। जीन थेरेपी, नई दवाएं जैसे स्पिनराझा, रेस्पिरेटरी सपोर्ट, फिजियोथेरेपी, पोषण प्रबंधन और मानसिक सहयोग रोगियों की गुणवत्ता भरी जिंदगी में सहायक हैं।



परिवार और समाज की भूमिका
वाहक माता-पिता की समय पर पहचान (करियर स्क्रीनिंग) विशेषकर विवाह से पहले या गर्भावस्था के दौरान अगली पीढ़ी को एसएमए से बचाने में मदद कर सकती है। सामाजिक सहयोग, समावेशिता, और समय पर निदान से एसएमए से पीड़ित बच्चों को शिक्षा, कला और समाज में समान अवसर मिल सकते हैं। प्रो. तिवारी ने बताया कि जल्दी पहचान, सही परामर्श और पारिवारिक सहयोग से एसएमए के जीवन को उम्मीद दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि जेनेटिक जागरूकता ही स्वस्थ समाज की कुंजी है।
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