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मेयर उपचुनाव : पार्षदों की रहेगी अहम भूमिका, वार्डों के चुनाव नहीं होने से माहौल ठंडा
Wed, 19 Feb 2025 01:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
Updated Wed, 19 Feb 2025 01:14 AM IST
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सोनीपत। मेयर उपचुनाव को लेकर सोनीपत नगर निगम में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। हालांकि, इस बार वार्डों के चुनाव नहीं हो रहे, जिससे चुनावी माहौल अपेक्षाकृत ठंडा है, लेकिन पार्षदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण बनी हुई है। निगम में 20 वार्ड हैं और फिलहाल सीनियर डिप्टी मेयर ही मेयर का कार्यभार संभाल रहे हैं।
नगर निगम का चुनाव 2 मार्च को होना है। नगर निगम में 20 पार्षद हैं, जिनमें भाजपा के 11 और कांग्रेस के 9 पार्षद हैं। चुनाव से पहले पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद राजनीतिक समीकरण को देखते हुए पाला बदल सकते हैं। भाजपा के पास 11 पार्षदों का संख्या बल है, जबकि कांग्रेस के पास 9 पार्षद हैं। चुनावी गणित को देखते हुए दोनों पार्टी विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती हैं, ताकि मेयर चुनाव में उनके पक्ष में माहौल बन सके। भले ही नगर निगम क्षेत्र में आम जनता के लिए चुनावी उत्साह कम हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने के पक्ष में पार्षदों को एकजुट करने की रणनीति बना रही हैं। इसके लिए गुप्त बैठक, व्यक्तिगत संवाद और अन्य राजनीतिक जोड़ तोड़ तेज हो चुके हैं।
इस मेयर उपचुनाव का असर आगामी नगर निगम चुनावों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ेगा। अगर भाजपा यह चुनाव जीतती है तो वह नगर निगम पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकेगी। वहीं कांग्रेस की जीत उसे स्थानीय स्तर पर मजबूती दे सकती है। यह चुनाव केवल एक मेयर पद का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। चूंकि नगर निगम में भाजपा के अधिक पार्षद हैं, ऐसे में यह चुनाव भाजपा के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, वहीं कांग्रेस यदि इस चुनाव में जीत दर्ज करती है, तो यह स्थानीय राजनीति में उसकी वापसी का संकेत होगा।
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जनता के मुद्दे होंगे निर्णायक
इस बार चुनाव में पार्षदों की कोई भूमिका न होने के कारण जनता के मुद्दे और उम्मीदवारों की छवि सबसे अहम कारक होंगे। जनता अपने मत से यह तय करेगी कि कौन-सा उम्मीदवार शहर के विकास के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
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नगर निगम का चुनाव 2 मार्च को होना है। नगर निगम में 20 पार्षद हैं, जिनमें भाजपा के 11 और कांग्रेस के 9 पार्षद हैं। चुनाव से पहले पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई। बताया जा रहा है कि कुछ पार्षद राजनीतिक समीकरण को देखते हुए पाला बदल सकते हैं। भाजपा के पास 11 पार्षदों का संख्या बल है, जबकि कांग्रेस के पास 9 पार्षद हैं। चुनावी गणित को देखते हुए दोनों पार्टी विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती हैं, ताकि मेयर चुनाव में उनके पक्ष में माहौल बन सके। भले ही नगर निगम क्षेत्र में आम जनता के लिए चुनावी उत्साह कम हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने के पक्ष में पार्षदों को एकजुट करने की रणनीति बना रही हैं। इसके लिए गुप्त बैठक, व्यक्तिगत संवाद और अन्य राजनीतिक जोड़ तोड़ तेज हो चुके हैं।
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इस मेयर उपचुनाव का असर आगामी नगर निगम चुनावों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ेगा। अगर भाजपा यह चुनाव जीतती है तो वह नगर निगम पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकेगी। वहीं कांग्रेस की जीत उसे स्थानीय स्तर पर मजबूती दे सकती है। यह चुनाव केवल एक मेयर पद का नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों की प्रतिष्ठा का भी सवाल बन गया है। चूंकि नगर निगम में भाजपा के अधिक पार्षद हैं, ऐसे में यह चुनाव भाजपा के लिए अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका है, वहीं कांग्रेस यदि इस चुनाव में जीत दर्ज करती है, तो यह स्थानीय राजनीति में उसकी वापसी का संकेत होगा।
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जनता के मुद्दे होंगे निर्णायक
इस बार चुनाव में पार्षदों की कोई भूमिका न होने के कारण जनता के मुद्दे और उम्मीदवारों की छवि सबसे अहम कारक होंगे। जनता अपने मत से यह तय करेगी कि कौन-सा उम्मीदवार शहर के विकास के लिए बेहतर साबित हो सकता है।