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Sonipat News: सुहागिनों ने पति के दीदार कर खोला करवाचौथ का व्रत
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-बादलों ने रोकी चांद की राह, सुहागिनों को करवाचौथ पर करना पड़ा इंतजार
-दिनभर बूंदाबांदी के बीच रखा निर्जला व्रत, मंदिरों और घरों में गूंजे कथा के स्वर
-पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ की पूजा-अर्चना
-सोलह शृंगार कर महिलाओं ने निभाई परंपरा, सरगी से शुरू हुआ व्रत
-आसमान में बादल छाए रहने से चंद्रदर्शन को लेकर रही असमंजस की स्थिति, साढ़े आठ बजे के बाद किया व्रत का पारण
फोटो 35: सोनीपत के धोबीवाड़ा में करवाचौथ की पूजा करती महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो 36: सोनीपत के छोटूराम चौक के पास परिवार के साथ करवाचौथ की कथा सुनतीं मोनिका दहिया। स्रोत : पाठक
फोटो 37: सोनीपत के खरखौदा में करवाचौथ की कथा सुनतीं महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो 38: सोनीपत के मोहन नगर में करवाचौथ की कथा सुनने के बाद सूर्य को अघ्र्य देतीं महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो :47: सोनीपत के गांव मोहाना में पति युद्धविंद्र का छलनी से दीदार करती सुमन महला। स्रोत पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ सुहागिनों ने वीरवार को करवाचौथ का व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा। दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी के बीच महिलाओं का उत्साह बरकरार रहा। सुबह सरगी ग्रहण कर शुरू हुआ निर्जला उपवास दिनभर पूजा-अर्चना और करवाचौथ की कथा सुनने के साथ आगे बढ़ा। हालांकि, आसमान में बादलों के कारण चंद्रदर्शन को लेकर महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। शाम ढलते ही महिलाएं पूजा की थाली सजाकर चांद निकलने की राह देखने लगीं। रात साढ़े आठ बजे के बाद पति का दीदार कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।
करवाचौथ पर सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल रहा। महिलाओं ने सोलह शृंगार कर पर्व की तैयारियां कीं। घरों में भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की पूजा-अर्चना की गई। दोपहर बाद शहर के विभिन्न इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने एकत्रित होकर करवाचौथ की कथा सुनी और पति की दीर्घायु व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मॉडल टाउन, सेक्टर-23, गोहाना रोड और गुड़ मंडी सहित शहर के कई क्षेत्रों में सामूहिक पूजा हुई। गोहाना, गन्नौर, खरखौदा, मुरथल और राई के मंदिरों में भी महिलाओं ने कथा सुनकर परंपरा निभाई।
चंद्रदर्शन के लिए छतों पर लगी रहीं निगाहें
रात होते ही महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिक गईं। बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहे थे। ऐसे में महिलाएं और बच्चे बार-बार छतों पर पहुंचकर चांद निकलने का इंतजार करते रहे। महिलाओं ने पूजा की थाली तैयार रखी और बाद में चंद्र को अघ्र्य देकर छलनी से पति का चेहरा देख व्रत खोला। व्रत खोलने और परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई गई।
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सरगी और उपहारों ने बढ़ाई पर्व की रौनक
करवाचौथ पर सरगी की परंपरा भी श्रद्धापूर्वक निभाई गई। महिलाओं ने सूर्योदय से पहले मठरी, फैनी, नारियल, मिठाई और मेवे ग्रहण कर व्रत शुरू किया। कई पतियों ने अपनी पत्नियों को उपहार देकर पर्व की खुशियां साझा कीं। दिनभर बूंदाबांदी के कारण बाजारों में अपेक्षाकृत कम रौनक रही। कई परिवारों ने एक दिन पहले ही मिठाई, पूजा सामग्री और शृंगार के सामान की खरीदारी कर ली थी। मौसम की बेरुखी के बावजूद घरों में करवाचौथ को लेकर उत्साह और पारिवारिक मेलजोल बना रहा।
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-दिनभर बूंदाबांदी के बीच रखा निर्जला व्रत, मंदिरों और घरों में गूंजे कथा के स्वर
-पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ की पूजा-अर्चना
-सोलह शृंगार कर महिलाओं ने निभाई परंपरा, सरगी से शुरू हुआ व्रत
-आसमान में बादल छाए रहने से चंद्रदर्शन को लेकर रही असमंजस की स्थिति, साढ़े आठ बजे के बाद किया व्रत का पारण
फोटो 35: सोनीपत के धोबीवाड़ा में करवाचौथ की पूजा करती महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो 36: सोनीपत के छोटूराम चौक के पास परिवार के साथ करवाचौथ की कथा सुनतीं मोनिका दहिया। स्रोत : पाठक
फोटो 37: सोनीपत के खरखौदा में करवाचौथ की कथा सुनतीं महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो 38: सोनीपत के मोहन नगर में करवाचौथ की कथा सुनने के बाद सूर्य को अघ्र्य देतीं महिलाएं। स्रोत : पाठक
फोटो :47: सोनीपत के गांव मोहाना में पति युद्धविंद्र का छलनी से दीदार करती सुमन महला। स्रोत पाठक
संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ सुहागिनों ने वीरवार को करवाचौथ का व्रत श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा। दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुककर हुई बूंदाबांदी के बीच महिलाओं का उत्साह बरकरार रहा। सुबह सरगी ग्रहण कर शुरू हुआ निर्जला उपवास दिनभर पूजा-अर्चना और करवाचौथ की कथा सुनने के साथ आगे बढ़ा। हालांकि, आसमान में बादलों के कारण चंद्रदर्शन को लेकर महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। शाम ढलते ही महिलाएं पूजा की थाली सजाकर चांद निकलने की राह देखने लगीं। रात साढ़े आठ बजे के बाद पति का दीदार कर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया।
करवाचौथ पर सुबह से ही घरों में उत्सव का माहौल रहा। महिलाओं ने सोलह शृंगार कर पर्व की तैयारियां कीं। घरों में भगवान गणेश, शिव-पार्वती और कार्तिकेय की पूजा-अर्चना की गई। दोपहर बाद शहर के विभिन्न इलाकों और ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने एकत्रित होकर करवाचौथ की कथा सुनी और पति की दीर्घायु व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मॉडल टाउन, सेक्टर-23, गोहाना रोड और गुड़ मंडी सहित शहर के कई क्षेत्रों में सामूहिक पूजा हुई। गोहाना, गन्नौर, खरखौदा, मुरथल और राई के मंदिरों में भी महिलाओं ने कथा सुनकर परंपरा निभाई।
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चंद्रदर्शन के लिए छतों पर लगी रहीं निगाहें
रात होते ही महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिक गईं। बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं दे रहे थे। ऐसे में महिलाएं और बच्चे बार-बार छतों पर पहुंचकर चांद निकलने का इंतजार करते रहे। महिलाओं ने पूजा की थाली तैयार रखी और बाद में चंद्र को अघ्र्य देकर छलनी से पति का चेहरा देख व्रत खोला। व्रत खोलने और परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद लेने की परंपरा निभाई गई।
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सरगी और उपहारों ने बढ़ाई पर्व की रौनक
करवाचौथ पर सरगी की परंपरा भी श्रद्धापूर्वक निभाई गई। महिलाओं ने सूर्योदय से पहले मठरी, फैनी, नारियल, मिठाई और मेवे ग्रहण कर व्रत शुरू किया। कई पतियों ने अपनी पत्नियों को उपहार देकर पर्व की खुशियां साझा कीं। दिनभर बूंदाबांदी के कारण बाजारों में अपेक्षाकृत कम रौनक रही। कई परिवारों ने एक दिन पहले ही मिठाई, पूजा सामग्री और शृंगार के सामान की खरीदारी कर ली थी। मौसम की बेरुखी के बावजूद घरों में करवाचौथ को लेकर उत्साह और पारिवारिक मेलजोल बना रहा।