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कानून स्थिर नहीं, हमेशा नए चरण में विकसित होता रहता है : न्यायाधीश ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह

Mon, 04 Aug 2025 01:24 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत Updated Mon, 04 Aug 2025 01:24 AM IST
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Law is not static, it is always evolving into a new phase: Justice Augustine George Masih
फोटो 33- सोनीपत के राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में आयोजित दीक्षारंभ
सोनीपत। न्यायाधीश ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह ने कहा कि सीखने की प्रक्रिया न केवल नए कानूनों को बनाना, बल्कि पुराने कानूनों से निपटने में भी जारी रहेगी। कानून स्थिर नहीं है, यह हमेशा नए चरण में विकसित होता रहता है। आप युवा हो और भविष्य आपकी विचार प्रक्रिया से नियंत्रित होगा, इसलिए हमेशा सकारात्मक विचार रखें।
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राई स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में बीएएलएलबी (ऑनर्स) बैच 2025-30 में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए चल रहे सात दिवसीय दीक्षारंभ छात्र प्रेरणा समारोह के दूसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायाधीश ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह पहुंचे थे। उन्होंने दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया। उन्होंने कार्यक्रम में अधिकारों, कर्तव्यों के महत्व पर जोर देने के लिए छात्रों को प्रेरित किया।
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उन्होंने कानून की पढ़ाई के बाद मुकदमेबाजी, न्यायपालिका, कॉर्पोरेट नीति, सरकारी सेवाएं, शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर चर्चा की। कानून के क्षेत्र में भाषा पर पकड़ रखने पर जोर दिया। वहीं कुलपति प्रोफेसर डॉ. देविंद्र सिंह ने कहा कि दीक्षारंभ का उद्देश्य विधि विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से विकसित करना है, ताकि छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा का बेहतर माहौल प्रदान किया जा सके।
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समारोह में कुलसचिव एवं दीक्षारंभ के समन्वयक प्रो. डॉ. आशुतोष मिश्रा, परीक्षा नियंत्रक डॉ. बलबिंद्र कौर, मुख्य विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा जायसवाल, कुलपति के निजी सचिव राजेश कुमार, डॉ. सुखविंद्र सिंह, डॉ. अमित गुलेरिया, डॉ. सुंदर सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. कुलवंत सिंह, डॉ. मधुकर शर्मा, डॉ. नवनीत कृष्णा, डॉ. रेनु शर्मा मौजूद रहीं।

दीक्षारंभ का अर्थ केवल प्रेरणा ही नहीं, बल्कि जागृति भी है। विधि में व्यावहारिक पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जिनका अनुभव न्यायालयीन अभ्यासों को देखकर होगा। ज्ञान को बढ़ाना विधि विश्वविद्यालय का मूलमंत्र है।
- न्यायाधीश सुदेश बांसल, राजस्थान उच्च न्यायालय

इस देश में केवल एक ही संविधान की आवश्यकता है। इस राष्ट्र को विकसित करने के लिए हमें न्यायालय की न्याय प्रक्रिया को गति देनी होगी ताकि लंबित मामलों की संख्या में कमी आ सके। छात्रों को अधिक तकनीकी ज्ञान होना चाहिए। विधि के क्षेत्र में विश्वसनीयता अति महत्वपूर्ण है। युवा पीढ़ी को सामूहिक रूप से विकसित भारत का हिस्सा बनना होगा।

- सुरेंद्र नाथ त्रिपाठी, महानिदेशक, भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आईआईपीए)

सफलता को सिर पर नहीं बैठाना चाहिए, बल्कि विधि के इस क्षेत्र में हमें हर समय सीखने व विश्लेषण पर जोर देना चाहिएं। इंटर्नशिप का समय छात्रों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, यह केवल अवकाश नहीं, न ही प्रमाणपत्र है, यह उससे भी कहीं बढ़कर हैं। जितना हो सके विधि ज्ञान को बढ़ाने के लिए निरंतर शिक्षकों व वरिष्ठों से बातचीत करने की कोशिश करें।
- न्यायाधीश राजेंद्र मेनन, अध्यक्ष, सशस्त्र बल न्यायाधिकरण

न्याय व्यवस्था में संयम बनाना जरूरी है। कानून के क्षेत्र में प्रत्येक दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिलता रहेगा।
- न्यायमूर्ति डॉ. विद्युत रंजन सारंगी, सदस्य, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी)
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