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जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलने पर किसानों ने जताया विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
Updated Mon, 14 Dec 2015 12:14 AM IST
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बड़ी औद्योगिक क्षेत्र के लिए वर्ष 2004 में अधिग्रहीत की गई भूमि का बड़ी गांव के किसानों को उचित कीमत नहीं मिलने से रोष है। पीड़ित किसानों ने रविवार क गन्नौर जीटी रोड के निकट एकत्रित होकर भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात किया गया था। पीड़ित किसानों ने उचित मुआवजे के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने का मन बना लिया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2004 में बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए एचएसआईआईडीसी ने 322 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की थी। उस समय सरकार ने 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया था। मुआवजा राशि कम होने से किसानों ने सोनीपत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां कोर्ट ने किसानों को 4 लाख 26 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने का सरकार को आदेश दिया था। इस मुआवजा राशि से भी असंतुष्ट किसान हाईकोर्ट पहुंच गए थे। माननीय हाईकोर्ट ने पिछले माह की 3 तारीख को किसानों का मुआवजा 4 लाख 26 हजार से बढ़ा कर 5 लाख 80 हजार रुपयेे तय करने का फैसला सुनाया। किसानों का कहना है कि पूर्व में रही प्रदेश सरकार ने वर्ष 1997 में राई इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था, जिसका बाद में माननीय अदालत द्वारा 50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा तय किया था और साथ में किसानों को रिहायशी प्लाट भी अलॉट किए गए थे, लेकिन बड़ी के किसानों को राई के किसानों की अपेक्षा जमीन का रेट बहुत ही कम दिया गया है जबकि बड़ी गांव की भूमि का वर्ष 2004 में अधिग्रहित की गई थी। पीड़ित किसानों ने उनकी जमीन का उचित मुआवजा पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने का मन बना लिया है। किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों से उनकी जमीन को 40 रुपये प्रति गज के हिसाब से अधिग्रहीत कर आगे लगभग 6000 रुपये प्रति गज के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमा रही है। यदि सरकार उन्हें 50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा नहीं देती तो सभी किसान पंचायत कर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
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गौरतलब है कि वर्ष 2004 में बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए एचएसआईआईडीसी ने 322 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की थी। उस समय सरकार ने 2 लाख 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों को मुआवजा दिया था। मुआवजा राशि कम होने से किसानों ने सोनीपत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जहां कोर्ट ने किसानों को 4 लाख 26 हजार रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा देने का सरकार को आदेश दिया था। इस मुआवजा राशि से भी असंतुष्ट किसान हाईकोर्ट पहुंच गए थे। माननीय हाईकोर्ट ने पिछले माह की 3 तारीख को किसानों का मुआवजा 4 लाख 26 हजार से बढ़ा कर 5 लाख 80 हजार रुपयेे तय करने का फैसला सुनाया। किसानों का कहना है कि पूर्व में रही प्रदेश सरकार ने वर्ष 1997 में राई इंडस्ट्रियल एरिया के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था, जिसका बाद में माननीय अदालत द्वारा 50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा तय किया था और साथ में किसानों को रिहायशी प्लाट भी अलॉट किए गए थे, लेकिन बड़ी के किसानों को राई के किसानों की अपेक्षा जमीन का रेट बहुत ही कम दिया गया है जबकि बड़ी गांव की भूमि का वर्ष 2004 में अधिग्रहित की गई थी। पीड़ित किसानों ने उनकी जमीन का उचित मुआवजा पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने का मन बना लिया है। किसानों का कहना है कि सरकार ने किसानों से उनकी जमीन को 40 रुपये प्रति गज के हिसाब से अधिग्रहीत कर आगे लगभग 6000 रुपये प्रति गज के हिसाब से बेचकर मोटा मुनाफा कमा रही है। यदि सरकार उन्हें 50 लाख रुपये प्रति एकड़ का मुआवजा नहीं देती तो सभी किसान पंचायत कर एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे। सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
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