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सोनीपत: 358 दिन से कुंडली-सिंघु बॉर्डर बंद होने से 35 हजार करोड़ का नुकसान झेल चुके उद्योगपति
Sun, 21 Nov 2021 06:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, सोनीपत
अमर उजाला नेटवर्क, सोनीपत
Published by: रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 06:26 AM IST
सार
पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों को गुरु पर्व पर बड़ी सौगात दी है।
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आंदोलन के के चलते कुंडली में बंद पड़ी एक दुकान
- फोटो : amar ujala
विस्तार
पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों को गुरु पर्व पर बड़ी सौगात दी है। इससे जहां किसानों को राहत मिलेगी, वहीं इस आंदोलन से प्रभावित उद्योगपतियों, व्यापारियों व क्षेत्र के लोगों को भी फायदा होगा। अकेले सोनीपत जिले में सालभर से चल रहे किसान आंदोलन के कारण उद्योगों व व्यापारियों को करीब 35 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। साथ ही दस हजार मजदूर व कामगार पलायन कर चुके हैं। अब प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद उद्योगपतियों व व्यापारियों को आस जगी है कि किसान बॉर्डर से हट जाएंगे। जिससे बॉर्डर पर रास्ता खुल जाएगा।
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किसान आंदोलन के चलते बॉर्डर 358 दिन से बंद है। बॉर्डर बंद होने व जीटी रोड पर दोनों तरफ किसानों के आशियाने बनने का सीधा असर उद्योगों के साथ ही दोनों तरफ के दुकानदारों, शोरूम संचालकों, रियल एस्टेट, मल व रेहड़ी-फड़ी वालों पर पड़ा। इतना ही नहीं दर्जनों गांव भी दिल्ली से सीधे तौर पर कट गए। रोजगार पर बुरा असर पड़ा।
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एक अनुमान के अनुसार आसपास के गांवों के करीब 10 हजार कामकाजी व मजदूर लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए। इन सभी को अब एक बार फिर उम्मीद बंधी है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद अब किसान आंदोलन शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा और काम धंधे फिर से शुरू हो सकेंगे। बॉर्डर बंद होने के कारण औद्योगिक क्षेत्रों में माल न आने-जाने से काफी नुकसान हो चुका है। शुरुआत के ढाई माह तक तो सड़क पूरी तरह बंद रहने से उद्योगों में काम बंद ही हो गया था। हालांकि उसके बाद संख्या कम हुई और राई व अन्य औद्योगिक क्षेत्र में काम शुरू हुआ। लेकिन कुंडली औद्योगिक क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं हो सके। अनुमान के अनुसार सोनीपत में अब तक करीब 35 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। किसान 26 नवंबर, 2020 को नेशनल हाईवे-44 के कुंडली बॉर्डर पर बैठ गए थे। इससे केजीपी-केएमपी के जीरो प्वाइंट तक किसानों ने झोपड़ी डाल ली थी। किसान आंदोलन का केंद्र कुंडली होने के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव वहां पड़ा।
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केएमपी-केजीपी से दिल्ली आवागमन में लग रहे 3 घंटे
कुंडली-सिंघु बॉर्डर बंद होने के कारण दिल्ली की तरफ वाहनों का आवागमन केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल), केजीपी (कुंडली-गाजियाबाद-पलवल) एक्सप्रेस वे और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र से आवागमन ज्यादा होने के कारण सड़कें काफी टूट गई हैं और यहां से परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जहां सोनीपत से आईएसबीटी (कश्मीरी गेट) जाने के लिए मात्र डेढ़ घंटा लगता था, अब सोनीपत से दिल्ली जाने के लिए तीन घंटे लग रहे हैं। इस तरह समय ज्यादा लगाने के कारण लोगों को अपनी जेबें भी ढीली करनी पड़ रही हैं। ऐसे लोगों को अब राहत की उम्मीद है।
दर्जनों गांवों का टूटा हुआ है दिल्ली से लिंक
किसानों के आंदोलन से प्रभावित कुंडली व राई क्षेत्र के दर्जनों गांवों का लिंक दिल्ली से सीधे तौर पर टूटा हुआ है। सालभर से इन गांवों में न केवल कामकाज प्रभावित है बल्कि नौकरियों पर जाने वाले लोगों को बड़ा चक्कर लगाकर लिंक मार्गों से पहुंचना पड़ता है। ऐसे में न केवल खर्च बढ़ गया है बल्कि बहुत से लोगों की नौकरियां भी छूट गई हैं। कुंडली, नांगल कलां, सबौली, नाथूपुर, जाखौली, सेवली, प्रीतमपुर, अटेरना, मनौली, बढख़ालसा, राई, बीसवांमील, बढ़मलिक, जठेड़ी आदि गांवों के अधिकतर ग्रामीणों का कामकाज दिल्ली पर आधारित है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब उनके लिए जीटी रोड फिर से खुल जाएगा, किसान आंदोलन समाप्त हो सकता है।
करीब एक साल से किसान आंदोलन के चलते 15 फीसदी उद्योग बंद हो चुके हैं। इनमें ज्यादातर किराए पर प्लॉट लेकर उद्योग चलाने वाले शामिल थे। मजदूर पलायन कर चुके हैं। पीएम की कानून वापसी की घोषणा से अब उम्मीद जगी है कि बॉर्डर खुल जाएगा। पहले तीन माह ट्रांसपोर्ट पूरी तरह बंद रहा, जिससे न कच्चा माल आया और न तैयार भेजा जा सका। अब किसानों को यहां से शीघ्र चले जाना चाहिए, ताकि काम धंधे सुचारु रूप से चल सकें।
- सुभाष गुप्ता, वरिष्ठ पदाधिकारी, कुंडली औद्योगिक एसोसिएशन
किसान आंदोलन के कारण ट्रांसपोर्ट ठप हो गया था। सामान आने-जाने में काफी दिक्कत हो रही है। काफी घूमकर आना पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार अब तक 35 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। अब उद्योगों को उम्मीद बंधी है कि किसान रास्ते खाली कर देंगे। अब तुरंत रास्तों को खोल दिया जाना चाहिए। कुंडली-सिंघु बॉर्डर खुलते ही सोनीपत के उद्योगों को फिर से गति मिल सकेगी।
- राकेश देवगन, प्रधान राई औद्योगिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन
पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा कर किसानों को गुरु पर्व पर बड़ी सौगात दी है।