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जिले में लगातार बढ़ रही ऑक्सीजन की किल्लत, 18 की जगह मिल रही 13 टन
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जहां कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं ऑक्सीजन की किल्लत भी कम नहीं हो रही है, जिससे हालात खराब होते जा रहे हैं और लोगों को अपनों की जिंदगी बचाने के लिए जूझना पड़ रहा है। जिले को इस समय 13 टन ऑक्सीजन मिल रही है, लेकिन यहां मरीज बढ़ने के कारण 18 टन की जरूरत है। इस किल्लत को प्रशासन दूर करने में नाकाम साबित हो रहा है और घरों में मौजूद मरीजों के लिए जिमखाना क्लब से मिलने वाली ऑक्सीजन भी दो दिन पहले बंद कराए जाने से मरीजों के परिजन चक्कर काट रहे हैं।
वहीं डीसी ने प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत के अनुसार सप्लाई कराने को ऑडिट शुरू कराया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी ऑडिट नहीं हो सका है। इस तरह के हालात देखकर लग रहा है कि कोरोना मरीजों के उपचार में आने वाली समस्याओं को लेकर प्रशासन किस तरह से काम कर रहा है।
जिले के अस्पतालों में दिव्य एअर प्रोडेक्ट लिमिटेड से एक महीने पहले तक प्रतिदिन करीब दो टन तक ऑक्सीजन की सप्लाई होती थी, लेकिन कोरोना के मामले बढ़ने से ऑक्सीजन की सप्लाई भी लगातार बढ़ती जा रही थी और एक सप्ताह पहले तक 9 टन ऑक्सीजन यहां मिल रही थी, जबकि उस समय करीब 13 टन ऑक्सीजन की जरूरत थी। उसके साथ ही बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर में करीब 400 सिलिंडर सप्लाई करने वाली हिसार की कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए तो प्रशासन ने वहां की जिम्मेदारी भी दिव्य एअर कंपनी को सौंप दी, जबकि तरल गैस का कोटा नहीं बढ़ाया गया और किल्लत बढ़ने लगी। यह समस्या सीएम मनोहर लाल के सामने आई तो उसके बाद जिले का ऑक्सीजन कोटा बढ़ाकर 13 टन तक कर दिया गया। लेकिन जिस तरह से जिले में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं, उससे ऑक्सीजन की खपत भी काफी बढ़ गई और अब यहां करीब 18 टन ऑक्सीजन की जरूरत है। उसके बावजूद केवल 13 टन ऑक्सीजन ही मिल रही है, जिससे मरीजों की जान आफत में आई हुई है। सरकारी अस्पतालों की किसी तरह पूर्ति हो रही है, क्योंकि अब बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर को औद्योगिक क्षेत्र बड़ी से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी गई। उसके बावजूद प्राइवेट अस्पतालों को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल रही है तो जिनका घरों में उपचार चल रहा है, उनके लिए भी सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। जिमखाना क्लब से दो दिन पहले ही प्रशासन ने घरों में मौजूद मरीजों के परिजनों को सिलिंडर देने बंद कर दिए और अब वह भी सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं। हालात यह हैं कि आम जनता की परेशानी को देखते हुए प्रशासन पर स्थिति को संभाल नहीं पाने के आरोप तक लगने लगे हैं।
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घरों में मौजूद कोरोना मरीजों की जान पर आफत
अस्पतालों में बेड नहीं मिलने के कारण जिन कोरोना मरीजों का घरों में उपचार चल रहा था, उनको दो दिन पहले तक जिमखाना क्लब से ऑक्सीजन के सिलिंडर मिल रहे थे। लेकिन डीसी श्यामलाल पूनिया ने दो दिन पहले आदेश किए कि किसी को घर के लिए सिलिंडर नहीं दिया जाएगा और जिमखाना क्लब से 24 घंटे तक इंतजार करने के बाद मरीजों के परिजन मायूस होकर लौट गए थे। अब उन मरीजों के लिए सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं और उनकी जान आफत में आ गई है, जबकि उनके परिजन ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं और प्रशासन को उससे कोई मतलब नहीं है। अब हालात यह हो गए हैं कि अस्पतालों में मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं और घरों के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर बंद करा दिए हैं।
निजी अस्पतालों का एक सप्ताह में नहीं हो सका ऑडिट
प्राइवेट अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत को देखने के लिए डीसी ने ऑडिट कराने के आदेश दिए थे, जिसमें ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता के साथ ही उन पर कितने मरीज भर्ती किए गए हैं, उसको देखा जाना था। ऑक्सीजन की कितनी जरूरत है और कितनी खर्च हो रही है। कितनी गैस स्टाफ या अन्य के कारण बर्बाद हो रही है। कितने मरीजों को बिना कारण के ऑक्सीजन बेड पर रखा गया है। इस सभी को ऑडिट रिपोर्ट में शामिल किया जाना था, लेकिन अभी तक 10 अस्पतालों में केवल 7 का ऑडिट किया जा सका है। जबकि यह ऑडिट होने से स्थिति साफ हो सकती है कि प्राइवेट अस्पतालों में कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है और सरकारी में कितनी ऑक्सीजन चाहिए।
वर्जन
अस्पतालों का ऑडिट किया जा रहा है, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। ऑडिट जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। वहीं जिले में ऑक्सीजन की समस्या है और यहां 18 टन की जरूरत है तो करीब 13 टन ही मिल रही है। इसके अलावा भी काफी समस्याएं आ रही हैं, जिनको दूर किया जा रहा है।
- डॉ. आदर्श शर्मा, डिप्टी सीएमओ
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वहीं डीसी ने प्राइवेट अस्पतालों में ऑक्सीजन की जरूरत के अनुसार सप्लाई कराने को ऑडिट शुरू कराया था, लेकिन एक सप्ताह बाद भी ऑडिट नहीं हो सका है। इस तरह के हालात देखकर लग रहा है कि कोरोना मरीजों के उपचार में आने वाली समस्याओं को लेकर प्रशासन किस तरह से काम कर रहा है।
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जिले के अस्पतालों में दिव्य एअर प्रोडेक्ट लिमिटेड से एक महीने पहले तक प्रतिदिन करीब दो टन तक ऑक्सीजन की सप्लाई होती थी, लेकिन कोरोना के मामले बढ़ने से ऑक्सीजन की सप्लाई भी लगातार बढ़ती जा रही थी और एक सप्ताह पहले तक 9 टन ऑक्सीजन यहां मिल रही थी, जबकि उस समय करीब 13 टन ऑक्सीजन की जरूरत थी। उसके साथ ही बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर में करीब 400 सिलिंडर सप्लाई करने वाली हिसार की कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए तो प्रशासन ने वहां की जिम्मेदारी भी दिव्य एअर कंपनी को सौंप दी, जबकि तरल गैस का कोटा नहीं बढ़ाया गया और किल्लत बढ़ने लगी। यह समस्या सीएम मनोहर लाल के सामने आई तो उसके बाद जिले का ऑक्सीजन कोटा बढ़ाकर 13 टन तक कर दिया गया। लेकिन जिस तरह से जिले में कोरोना के मरीज बढ़ रहे हैं, उससे ऑक्सीजन की खपत भी काफी बढ़ गई और अब यहां करीब 18 टन ऑक्सीजन की जरूरत है। उसके बावजूद केवल 13 टन ऑक्सीजन ही मिल रही है, जिससे मरीजों की जान आफत में आई हुई है। सरकारी अस्पतालों की किसी तरह पूर्ति हो रही है, क्योंकि अब बीपीएस मेडिकल कॉलेज खानपुर को औद्योगिक क्षेत्र बड़ी से ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी गई। उसके बावजूद प्राइवेट अस्पतालों को पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल रही है तो जिनका घरों में उपचार चल रहा है, उनके लिए भी सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं। जिमखाना क्लब से दो दिन पहले ही प्रशासन ने घरों में मौजूद मरीजों के परिजनों को सिलिंडर देने बंद कर दिए और अब वह भी सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं। हालात यह हैं कि आम जनता की परेशानी को देखते हुए प्रशासन पर स्थिति को संभाल नहीं पाने के आरोप तक लगने लगे हैं।
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घरों में मौजूद कोरोना मरीजों की जान पर आफत
अस्पतालों में बेड नहीं मिलने के कारण जिन कोरोना मरीजों का घरों में उपचार चल रहा था, उनको दो दिन पहले तक जिमखाना क्लब से ऑक्सीजन के सिलिंडर मिल रहे थे। लेकिन डीसी श्यामलाल पूनिया ने दो दिन पहले आदेश किए कि किसी को घर के लिए सिलिंडर नहीं दिया जाएगा और जिमखाना क्लब से 24 घंटे तक इंतजार करने के बाद मरीजों के परिजन मायूस होकर लौट गए थे। अब उन मरीजों के लिए सिलिंडर नहीं मिल रहे हैं और उनकी जान आफत में आ गई है, जबकि उनके परिजन ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं और प्रशासन को उससे कोई मतलब नहीं है। अब हालात यह हो गए हैं कि अस्पतालों में मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे हैं और घरों के लिए प्रशासनिक अधिकारियों ने ऑक्सीजन सिलिंडर बंद करा दिए हैं।
निजी अस्पतालों का एक सप्ताह में नहीं हो सका ऑडिट
प्राइवेट अस्पताल में ऑक्सीजन की जरूरत को देखने के लिए डीसी ने ऑडिट कराने के आदेश दिए थे, जिसमें ऑक्सीजन बेड और वेंटिलेटर की उपलब्धता के साथ ही उन पर कितने मरीज भर्ती किए गए हैं, उसको देखा जाना था। ऑक्सीजन की कितनी जरूरत है और कितनी खर्च हो रही है। कितनी गैस स्टाफ या अन्य के कारण बर्बाद हो रही है। कितने मरीजों को बिना कारण के ऑक्सीजन बेड पर रखा गया है। इस सभी को ऑडिट रिपोर्ट में शामिल किया जाना था, लेकिन अभी तक 10 अस्पतालों में केवल 7 का ऑडिट किया जा सका है। जबकि यह ऑडिट होने से स्थिति साफ हो सकती है कि प्राइवेट अस्पतालों में कितनी ऑक्सीजन की जरूरत है और सरकारी में कितनी ऑक्सीजन चाहिए।
वर्जन
अस्पतालों का ऑडिट किया जा रहा है, जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। ऑडिट जल्द ही पूरा कर दिया जाएगा। वहीं जिले में ऑक्सीजन की समस्या है और यहां 18 टन की जरूरत है तो करीब 13 टन ही मिल रही है। इसके अलावा भी काफी समस्याएं आ रही हैं, जिनको दूर किया जा रहा है।
- डॉ. आदर्श शर्मा, डिप्टी सीएमओ